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ब्रजघाट में गंगा भक्तों की सुरक्षा रामभरोसे

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 12 Jun 2019 12:44 AM IST
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ब्रजघाट में गंगा भक्तों की सुरक्षा रामभरोसे
ब्रजघाट में गंगा भक्तों की सुरक्षा रामभरोसे
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गढ़मुक्तेश्वर। मुक्ति धाम के रूप में विख्यात ब्रजघाट गंगा में डूबने से आए साल कई की मौत हो जाती है, लेकिन इसके बाद भी डूबने वालों को बचाने के लिए सरकारी स्तर से प्रशिक्षित गोताखोरों समेत अत्याधुनिक सुविधा वाली नाव की कोई व्यवस्था नहीं हो पा रही है।
हरिद्वार को उत्तराखंड राज्य में शामिल किए जाने के बाद सन 2001 में मुक्ति धाम के रूप में विख्यात सदियों से उपेक्षित गढ़ ब्रजघाट गंगानगरी को हरिद्वार की तर्ज पर विकसित कराने की कवायद चालू हुई थी, जबकि पांच जुलाई 2017 को सीएम योगी ने भी ब्रजघाट आगमन के दौरान हरिद्वार की तर्ज पर विकास, वेदिक सिटी, ईको टूरिज्म सेंटर, ऋषिकेश की तर्ज पर हैंगिंग झूले समेत चहुमुखी विकास कराने की घोषणा की थी। विकास से जुड़ीं कुछ योजनाओं पर थोड़ा अमल तो हुआ है, लेकिन गंगा में स्नान करने के दौरान डूबने वालों के बचाने के लिए अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका है। जिसके चलते महिला बच्चों समेत साल गंगा में डूबने से कई की मौत हो जाती है। आंकड़ों पर नजर डालें तो गंगा में डूबकर जान गंवाने वालों में अधिकांश के शव तक बरामद नहीं हो पाते हैं। लेकिन इसके बाद भी शासन प्रशासन इस तरफ कोई तवज्जोह देने को तैयार नहीं हैं। ब्रजघाट गंगानगरी में डूबने वालों को बचाने के लिए सरकारी स्तर से प्रशिक्षित गोताखोरों समेत अत्याधुनिक साजो सामान वाली नावों की कोई भी व्यवस्था नहीं है। जिसके चलते नाव चलाकर अपने परिवारों की गुजर बसर करने वाले मल्लाहों को ही जान हथेली पर रखकर डूबने वालों को बचाने की जिम्मेदारी भी संभालनी पड़ती है।
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अपेक्षित संसाधन न होने से डूबने वालों को बचाने में हो जाती है देरी
- गैस सिलेंडर, पानी के भीतर देखने को कांच के चश्मे, लाइफ सेविंग जैकेट, डूबने के दौरान बचाए जाने वालों को फर्स्ट ऐड समेत डूबने वालों को बचाने के लिए अत्याधुनिक उपकरण भी उपलब्ध नहीं हैं, जिसके चलते डूबने वालों में महिला बच्चों समेत कई की जान इसी वजह से चली जाती है।
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कोट
एसडीएम राममूर्ति त्रिपाठी का कहना है कि धार्मिक मेलों के दौरान पालिका स्तर से गोताखोर तैनात रहते हैं, जबकि शासन स्तर से प्रशिक्षित गोताखोरों समेत अत्याधुनिक सुविधा वाली नाव मुहैया कराने की डिमांड भिजवाई हुई है।
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