डार्क जोन में फव्वारा विधि से लहलहायेगी फसल

Ghaziabad Bureau Updated Sun, 05 Nov 2017 11:48 PM IST
डार्क जोन में फव्वारा विधि से लहलहाएंगी फसलें
- सरकार किसानों को इस विधि से सिंचाई करने के लिए करेगी प्रेरित, मिलेगा अनुदान
- हापुड़ सहित गढ़मुक्तेश्वर और सिंभावली ब्लाक हैं डार्क जोन में शामिल

अमर उजाला ब्यूरो
हापुड़। फव्वारा विधि से अब डार्क जोन क्षेत्र के किसान आसानी से भूगर्भीय जल को संरक्षित रखकर अपनी फसलों की सिंचाई कर सकेंगे। इसके लिए सरकार किसानों को अनुदान भी देगी। सरकार के इस पहल से डार्क जोन में सिंचाई की दिक्कतों से राहत की उम्मीद है।
जिले के तीन ब्लॉक गढ़मुक्तेश्वर, हापुड़ व सिंभावली डार्क जोन की श्रेणी में हैं। ऐसे में वहां के किसानों को ट्यूबवेल कनेक्शन के लिए भटकना पड़ता है। डार्क जोन में अब तक ट्यूबवेल का कनेक्शन प्रतिबंधित था।
हालांकि, शासन इस पर से रोक हटा चुका है। लेकिन अब तक जिला स्तर पर विभाग को आदेश प्राप्त नहीं हुए हैं। इसके चलते मामला असमंजस में है।
सरकार किसानों को फव्वारा विधि से सिंचाई करने के लिए प्रेरित कर रही है। डार्क जोन में यह विधि कारगर साबित होगी। प्रभावित ब्लॉकों के किसानों को सरकार की ओर से अनुदानित स्प्रिंकलर सेट दिए जाएंगे। इसके लिए किसानों को चिन्हित किया जाएगा। एक किसान को 16.16 मीटर के छह एचडी पाइप दिए जाएंगे। इसमें सामान्य किसानों को 80 फीसदी और लघु सीमांत किसानों को 90 फीसदी का अनुदान सरकार की ओर से दिया जाएगा। किसान इस विधि से अपनी फसल की सिंचाई कर सकेंगे। इसमें पानी की बेहद कम खपत होगी।

स्प्रिंकलर विधि से होगी पानी की बचत --
स्प्रिंकलर या बौछार सिंचाई विधि बारिश की तरह ही कारगर होती है। इससे 70 से 80 फीसदी पानी की बचत हो जाती है। डार्क जोन में सिंचाई के लिए यह विधि सबसे कारगर है। इससे नोजल के जरिए फव्वारा के रूप में फसलों की सिंचाई की जाती है। इस सिंचाई के लिए कृषि भूमि के समतल रहने की भी आवश्यकता नहीं है।

-बिजली खर्च से मिलेगा छुटकारा-
जल्द ही देहात अंचल में नलकूपों पर मीटर लगाए जाने की योजना है। ऐसे में फसलों की सिंचाई के दौरान किसानों पर भारी भरकम बिल का बोझ पड़ेगा। लेकिन स्प्रिंकलर विधि से कम समय में फसलों की सिंचाई होगी। ऐसे में बिजली खर्च से भी किसानों को छुटकारा मिल जाएगा।

समय की होगी बचत
वर्तमान में नलकूप से फसल तक कच्चे भरों के जरिए पानी पहुंचाया जाता है। ऐसे में किसानों का काफी समय बर्बाद होता है। स्प्रिंकलर विधि से सीधे पानी फसल को मिलेगा। ऐसे में किसानों को समय की भी बचत होगी।
डीएम कृष्णा करुनेश ने बताया कि शासन के आदेशों पर अधिकारियों को इस बाबत निर्देशित कर दिया गया है। ताकि इस वर्ग में आने वाले किसान लाभान्वित हो सकें।

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