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जिले के एक लाख किसानों पर डीएपी की मार
Updated Sun, 14 Oct 2018 12:06 AM IST
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जिले के एक लाख किसानों पर डीएपी की मार
हापुड़। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में रुपये की कीमत गिरने से जिले के एक लाख किसानों पर आफत आ गई है। सरकार ने डीएपी खाद के दामों में बंपर बढ़ोत्तरी कर दी गई है, पोटाश के मूल्य में भी वृद्धि की गई है। साथ ही यूरिया के बैग का वजन भी 50 के स्थान पर 45 किलोग्राम कर दिया है। अब आलू, गेहूं की बुवाई का समय शुरू हो जाएगा, ऐसे में डीएपी खाद किसानों की जेब पर भारी पड़ेगा। रालोद ने जल्द कीमतों में कमी न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
जिलेभर के 1.04 लाख किसान परिवार पूर्णत: कृषि पर ही निर्भर हैं। फसलों का मुनासिब दाम न मिलने के कारण किसान आर्थिक तंगी में पहले ही डूबे हैं। बीते दिनों विद्युत दरों में भारी बढ़ोत्तरी से किसान अभी उभरे भी नहीं हैं, ऐसे में डीएपी, पोटाश के दामों में बढ़ोत्तरी तथा यूरिया के कट्टे का 5 किलो वजन कम करने से और ज्यादा मुसीबत बढ़ गई है।
इन दिनों किसान आलू की बुवाई में लगे हैं, साथ ही गेहूं की बुवाई भी जल्द शुरू हो जाएगी। इन फसलों की बुवाई के दौरान किसानों को सर्वाधिक जरूरत डीएपी खाद की ही होती है। ऐसे में डीएपी का दाम 1400 रुपये/बैग पहुंचने के कारण किसान संकट में फंस गए हैं।
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डीएपी पर 120 रुपये की हुई बढ़ोत्तरी
जून, जुलाई महीने में डीएपी 1280 रुपये/बैग था, जो अक्तूबर महीने में बढ़कर 1400 रुपये हो गया है। इतना ही नहीं पोटाश के दाम में भी बढ़ोत्तरी कर दी गई है, किसानों को 950 रुपये का बैग मिल रहा है, जो पहले करीब 690 रुपये था। इतना ही नहीं बीते यूरिया के बैग में भी करीब पांच किलोग्राम यूरिया की मात्रा कम कर दी गई थी। हालांकि इसका दाम पूर्व की भांति 300 रुपये/बैग ही रखा गया। अब किसानों को वजन घटने का पता चला तो उनमें आक्रोश पनपने लगा है।
कालाबाजारी रोकना होगा चुनौती
डीएपी के दामों में अचानक बढ़ोत्तरी से बफर गोदाम, किसान सेवा केंद्र, समितियों पर पुराने डीएपी का काफी स्टॉक रखा हुआ है। नए दाम अधिक होने के कारण किसानों को पुराना माल भी नए दामों पर थमाया जा सकता है। इस कालाबाजारी को रोकना कृषि अफसरों के लिए चुनौती होगा।
डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट से बढ़े रेट
एक खाद कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में रुपये की कीमत में गिरावट से डीएपी के रेट बढ़े हैं। क्योंकि डीएपी का कच्चा माल वाह्य देशों से मंगाया जाता है, डॉलर रुपये के मुकाबले काफी मजबूत हुआ है जिसके चलते डीएपी के रेट बढ़े हैं।
कोट-
जिला कृषि अधिकारी शिवकुमार सिंह का कहना है कि डीएपी के दामों में बढ़ोत्तरी हुई है। डीएपी की कालाबाजारी नहीं होने दी जाएगी। इसके लिए निगरानी टीम का गठन किया गया है।
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हापुड़। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में रुपये की कीमत गिरने से जिले के एक लाख किसानों पर आफत आ गई है। सरकार ने डीएपी खाद के दामों में बंपर बढ़ोत्तरी कर दी गई है, पोटाश के मूल्य में भी वृद्धि की गई है। साथ ही यूरिया के बैग का वजन भी 50 के स्थान पर 45 किलोग्राम कर दिया है। अब आलू, गेहूं की बुवाई का समय शुरू हो जाएगा, ऐसे में डीएपी खाद किसानों की जेब पर भारी पड़ेगा। रालोद ने जल्द कीमतों में कमी न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
जिलेभर के 1.04 लाख किसान परिवार पूर्णत: कृषि पर ही निर्भर हैं। फसलों का मुनासिब दाम न मिलने के कारण किसान आर्थिक तंगी में पहले ही डूबे हैं। बीते दिनों विद्युत दरों में भारी बढ़ोत्तरी से किसान अभी उभरे भी नहीं हैं, ऐसे में डीएपी, पोटाश के दामों में बढ़ोत्तरी तथा यूरिया के कट्टे का 5 किलो वजन कम करने से और ज्यादा मुसीबत बढ़ गई है।
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इन दिनों किसान आलू की बुवाई में लगे हैं, साथ ही गेहूं की बुवाई भी जल्द शुरू हो जाएगी। इन फसलों की बुवाई के दौरान किसानों को सर्वाधिक जरूरत डीएपी खाद की ही होती है। ऐसे में डीएपी का दाम 1400 रुपये/बैग पहुंचने के कारण किसान संकट में फंस गए हैं।
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डीएपी पर 120 रुपये की हुई बढ़ोत्तरी
जून, जुलाई महीने में डीएपी 1280 रुपये/बैग था, जो अक्तूबर महीने में बढ़कर 1400 रुपये हो गया है। इतना ही नहीं पोटाश के दाम में भी बढ़ोत्तरी कर दी गई है, किसानों को 950 रुपये का बैग मिल रहा है, जो पहले करीब 690 रुपये था। इतना ही नहीं बीते यूरिया के बैग में भी करीब पांच किलोग्राम यूरिया की मात्रा कम कर दी गई थी। हालांकि इसका दाम पूर्व की भांति 300 रुपये/बैग ही रखा गया। अब किसानों को वजन घटने का पता चला तो उनमें आक्रोश पनपने लगा है।
कालाबाजारी रोकना होगा चुनौती
डीएपी के दामों में अचानक बढ़ोत्तरी से बफर गोदाम, किसान सेवा केंद्र, समितियों पर पुराने डीएपी का काफी स्टॉक रखा हुआ है। नए दाम अधिक होने के कारण किसानों को पुराना माल भी नए दामों पर थमाया जा सकता है। इस कालाबाजारी को रोकना कृषि अफसरों के लिए चुनौती होगा।
डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट से बढ़े रेट
एक खाद कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में रुपये की कीमत में गिरावट से डीएपी के रेट बढ़े हैं। क्योंकि डीएपी का कच्चा माल वाह्य देशों से मंगाया जाता है, डॉलर रुपये के मुकाबले काफी मजबूत हुआ है जिसके चलते डीएपी के रेट बढ़े हैं।
कोट-
जिला कृषि अधिकारी शिवकुमार सिंह का कहना है कि डीएपी के दामों में बढ़ोत्तरी हुई है। डीएपी की कालाबाजारी नहीं होने दी जाएगी। इसके लिए निगरानी टीम का गठन किया गया है।