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प्रशासन की लापरवाही से अच्छेजा के सेनिटरी पैड उदेग में पड़ा ताला
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प्रशासन की लापरवाही से अच्छेजा के सैनिटरी पैड केंद्र में पड़ा ताला
हापुड़। जिला प्रशासन की लापरवाही के कारण अच्छेजा का सैनिटरी पैड उद्योग में पिछले काफी दिनों से ताला पड़ा है। ऐसे में वहां काम करने वाली आधा दर्जन से अधिक महिलाएं बेरोजगार हो गई हैं।
उल्लेखनीय है कि इको फ्रैंडली सैनिटरी पैड बनाने का पहला उद्योग करीब तीन साल पहले अच्छेजा में ही पंचायत उद्योग के रूप में लगा था, तब गांव की कुछ लड़कियों को इस कार्य का प्रशिक्षण दिया गया था। इस काम को तब ग्राम विकास अधिकारी बिशन सक्सेना देखते थे। बताया गया है कि शुरू में यहां तैयार सैनिटरी पैड आसपास के जिलों में वहां के सीएमओ के माध्यम से सरकारी चिकित्सालयों में सप्लाई किए जाते थे। यह इसलिए होता था, तब जिला प्रशासन के अधिकारी भी इस काम में रुचि लेते थे। अब हालात यह है कि इस पंचायत उद्योग में कई लाख रुपये का माल तैयार पड़ा है, लेकिन इसकी बिक्री नहीं की जा रही। इसका कारण साफ है कि इस कार्य में जिला प्रशासन के अधिकारी रुचि नहीं ले रहे। परिणामस्वरूप यहां तैनात ग्राम विकास अधिकारी भी ताला लगवाकर निकल लेते हें। इस केंद्र में काम करने वाली एक लड़की ने अपना नाम उजागर किए बिना बताया कि कई माह से काम नहीं मिलने के कारण पगार भी नहीं मिली। काम तब मिलेगा, जब पुराना माल बिके और पैसा आए। कुल मिलाकर एक एनजीओ का सैनिटरी पैड बनाने का उद्योग ऑस्कर तक पहुंच गया जबकि जिला प्रशासन के अधीन चलने वाले उद्योग पर ताला लटका है।
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हापुड़। जिला प्रशासन की लापरवाही के कारण अच्छेजा का सैनिटरी पैड उद्योग में पिछले काफी दिनों से ताला पड़ा है। ऐसे में वहां काम करने वाली आधा दर्जन से अधिक महिलाएं बेरोजगार हो गई हैं।
उल्लेखनीय है कि इको फ्रैंडली सैनिटरी पैड बनाने का पहला उद्योग करीब तीन साल पहले अच्छेजा में ही पंचायत उद्योग के रूप में लगा था, तब गांव की कुछ लड़कियों को इस कार्य का प्रशिक्षण दिया गया था। इस काम को तब ग्राम विकास अधिकारी बिशन सक्सेना देखते थे। बताया गया है कि शुरू में यहां तैयार सैनिटरी पैड आसपास के जिलों में वहां के सीएमओ के माध्यम से सरकारी चिकित्सालयों में सप्लाई किए जाते थे। यह इसलिए होता था, तब जिला प्रशासन के अधिकारी भी इस काम में रुचि लेते थे। अब हालात यह है कि इस पंचायत उद्योग में कई लाख रुपये का माल तैयार पड़ा है, लेकिन इसकी बिक्री नहीं की जा रही। इसका कारण साफ है कि इस कार्य में जिला प्रशासन के अधिकारी रुचि नहीं ले रहे। परिणामस्वरूप यहां तैनात ग्राम विकास अधिकारी भी ताला लगवाकर निकल लेते हें। इस केंद्र में काम करने वाली एक लड़की ने अपना नाम उजागर किए बिना बताया कि कई माह से काम नहीं मिलने के कारण पगार भी नहीं मिली। काम तब मिलेगा, जब पुराना माल बिके और पैसा आए। कुल मिलाकर एक एनजीओ का सैनिटरी पैड बनाने का उद्योग ऑस्कर तक पहुंच गया जबकि जिला प्रशासन के अधीन चलने वाले उद्योग पर ताला लटका है।
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