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11 साल बाद याद आ ही गया स्याना चौपला फ्लाईओवर

Sun, 03 Jan 2016 01:53 PM IST
अमर उजाला, गढ़मुक्तेश्वर
अमर उजाला, गढ़मुक्तेश्वर Updated Sun, 03 Jan 2016 01:53 PM IST
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11 years later, remembered the crooked Chaupla flyover.
दिल्ली-लखनऊ नेशनल हाईवे पर गढ़ के स्याना चौपला पर बने अधूरे फ्लाई ओवर के 11 साल बाद पूरे होने की उम्मीद बढ़ गई है। केंद्र सरकार ने फ्लाई ओवर के निर्माण में बाधक बने सेंचुरी एरिया के पेड़ों को काटने की अनुमति दे दी है।
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11 साल से यह अधूरा फ्लाई ओवर हाईवे पर जाम और सड़क हादसों के लिए बड़ी वजह बना हुआ था।
ज्ञात हो कि प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत 2003 में दिल्ली-लखनऊ नेशनल हाईवे पर हापुड़ से ब्रजघाट के बीच 35 किमी दूरी में हाईवे की चौड़ीकरण योजना शुरू हुई थी।
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करीब 195 करोड़ की लागत से जुड़ी इस योजना के तहत ब्रजघाट गंगा पर नया पुल भी बनना था। इस योजना का शुभारंभ गढ़ विधानसभा क्षेत्र के कुचेसर चौपला पर तत्कालीन भूतल परिवहन मंत्री मेजर भुवन चंद्र खंडूरी ने किया था।
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एनएचएआई ने 2005 में हाईवे किनारे स्थित गांव और कस्बों में ओवरब्रिज बनाने की योजना प्रारंभ की थी,  जिसे 30 माह में पूरा करना था। योजना के तहत गढ़ में स्याना चौपला, अठसैनी, बक्सर, सिंभावली, सिखैड़ा, कुचेसर चौपला, उपैड़ा, बाबूगढ़ और ततारपुर के सामने ओवरब्रिज का निर्माण सितबंर 2007 तक पूरा कराया जाना प्रस्तावित था।

अंबेडकर प्रतिमा न हटने पर बाबूगढ़ में ओवरब्रिज की बजाए हाईवे किनारे रेलिंग लगाने का कार्य किया गया था।

स्याना चौपला को छोड़कर शेष स्थानों पर ओवरब्रिज का निर्माण होने के साथ ही उन पर कई वर्ष पहले आवागमन भी शुरू हो गया था, लेकिन गढ़ में स्याना चौपला ओवरब्रिज निर्माण केंद्र सरकार के दो मंत्रालयों के बीच 919 पेड़ों के कटान को लेकर अटक गया।


सेंचुरी एरिया के पेड़ों के कटान की मंजूरी न मिलने पर मामला प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली वाइल्ड लाइफ बोर्ड से होकर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने पेड़ों के कटान की मंजूरी का जिम्मा प्रदेश सरकार को सौंप दिया। एनएचआई ने पेड़ों की कीमत अदा करने के साथ ही पौधरोपण के लिए दिसंबर 2012 को वन विभाग को 3.10 करोड़ की राशि भी जमा कर दी थी। तब भी पेड़ काटने की मंजूरी नहीं मिल सकी थी।
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