{"_id":"6248936e5a0ab12b7b653263","slug":"yojana-hamirpur-news-knp6889822108","type":"story","status":"publish","title_hn":"लक्ष्मी बन घर में देतीं धन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लक्ष्मी बन घर में देतीं धन
विज्ञापन
हरौलीपुर गांव में हैंड होल्डिंग डिवाइस में महिला से अंगूठा लगवाती बीसी प्राची बाजपेयी।
- फोटो : HAMIRPUR
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हमीरपुर। महिलाएं बैंक सखी बनकर प्रधानमंत्री की डिजिटल इंडिया के जरिए बैंकिंग को ग्रामीण क्षेत्र में बढ़ावा दे रही हैं। यह हर जरूरतमंद को उनके गांव और घर में बैंक खातों से पैसा निकालने की सुविधा देतीं हैं। ग्राम पंचायतों में काम कर रही इन बैंक सखियों ने एक साल में तीन करोड़ 64 लाख की जमा व निकासी कर एक मिशाल पेश की है।
इस काम को बेहतर तरीके से अंजाम दे रहीं कुछ सखियों का कहना है कि ग्रामीण बैंक को नेट बैंकिंग से जोड़ा जाना चाहिए। ताकि उनकी हर मुश्किल आसान हो जाए। जनपद में मौजूदा समय में 246 बीसी सखियों को (इंडियन बैंक रोजगार प्रशिक्षण संस्थान के माध्यम से प्रशिक्षित किया जा चुका है। राष्ट्रीय आजीविका मिशन के जरिए प्रत्येक को 75 हजार का ऋण समूह के माध्यम से उपलब्ध कराया गया है। इसमें एक हैंड होल्डिंग डिवाइस व 40 हजार रुपये की लिमिट शामिल है।
कुरारा के हरौलीपुर गांव निवासी प्राची बाजपेयी आर्यावर्त बैंक की बैंक सखी हैं। आजीविका मिशन से अभी निर्धारित चार हजार रुपये मानदेय मिल रहा है। लेनदेन करने पर एक हजार पर चार रुपये बतौर कमीशन मिलता है। पांच माह में छह लाख की जमा निकासी हुई है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण बैंक में नेट बैंकिंग की सुविधा होनी चाहिए। मौदहा के मकरांव निवासी बैंक सखी अर्चना ने बताया कि पिछले छह माह में 48 लाख की निकासी व 60 लाख रुपये जमा कराए हैं। वह पिछले 10 माह से काम कर रही हैं। अभी तीन माह का मानदेय व 10 हजार रुपये बतौर कमीशन मिला है। दोनों बैंक सखियों का कहना है कि इस काम से उनके घर की माली हालत सुधरी है।
विज्ञापन
पिछले एक साल के अंदर जिले 246 बैंक सखियों की तैनाती हुई है। इन सखियों ने अभी तक तीन करोड़ 64 लाख की जमा निकासी कर एक मिशाल पेश की है। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए एनआरएलएम हर संभव प्रयास कर रहा है।
-प्रशांत मिश्रा, मैनेजर राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन
विज्ञापन
इस काम को बेहतर तरीके से अंजाम दे रहीं कुछ सखियों का कहना है कि ग्रामीण बैंक को नेट बैंकिंग से जोड़ा जाना चाहिए। ताकि उनकी हर मुश्किल आसान हो जाए। जनपद में मौजूदा समय में 246 बीसी सखियों को (इंडियन बैंक रोजगार प्रशिक्षण संस्थान के माध्यम से प्रशिक्षित किया जा चुका है। राष्ट्रीय आजीविका मिशन के जरिए प्रत्येक को 75 हजार का ऋण समूह के माध्यम से उपलब्ध कराया गया है। इसमें एक हैंड होल्डिंग डिवाइस व 40 हजार रुपये की लिमिट शामिल है।
विज्ञापन
कुरारा के हरौलीपुर गांव निवासी प्राची बाजपेयी आर्यावर्त बैंक की बैंक सखी हैं। आजीविका मिशन से अभी निर्धारित चार हजार रुपये मानदेय मिल रहा है। लेनदेन करने पर एक हजार पर चार रुपये बतौर कमीशन मिलता है। पांच माह में छह लाख की जमा निकासी हुई है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण बैंक में नेट बैंकिंग की सुविधा होनी चाहिए। मौदहा के मकरांव निवासी बैंक सखी अर्चना ने बताया कि पिछले छह माह में 48 लाख की निकासी व 60 लाख रुपये जमा कराए हैं। वह पिछले 10 माह से काम कर रही हैं। अभी तीन माह का मानदेय व 10 हजार रुपये बतौर कमीशन मिला है। दोनों बैंक सखियों का कहना है कि इस काम से उनके घर की माली हालत सुधरी है।
विज्ञापन
पिछले एक साल के अंदर जिले 246 बैंक सखियों की तैनाती हुई है। इन सखियों ने अभी तक तीन करोड़ 64 लाख की जमा निकासी कर एक मिशाल पेश की है। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए एनआरएलएम हर संभव प्रयास कर रहा है।
-प्रशांत मिश्रा, मैनेजर राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन