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खतरे के निशान से 1.808 मीटर ऊपर बह रही यमुना नदी

Fri, 06 Aug 2021 11:14 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 06 Aug 2021 11:14 PM IST
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Yamuna river flowing 1.808 meters above the danger mark
सुमेरपुर क्षेत्र के कुंडौरा गांव के पास बेतवा नदी के पानी से डूबी फसलें। - फोटो : HAMIRPUR
हमीरपुर। यमुना और बेतवा नदियां उफान पर हैं। बेतवा में माताटीला बांध से दो लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे बाढ़ का खतरा और बढ़ गया है। शुक्रवार को दोपहर तीन बजे यमुना का जलस्तर 105.440 मीटर पर पहुंच गया, जो खतरे के निशान 103.632 मीटर से 1.80 मीटर ज्यादा है।
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दोनों नदियां अभी भी पांच सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रही हैं। बेतवा नदी भी खतरे के निशान से 34 सेमी ऊपर बह रही है। मौजूदा में इसका जल स्तर 104.580 मीटर पर पहुंच गया है, जबकि खतरे का बिंदु 104.546 मीटर है। बाढ़ का पानी कुरारा मूसानगर की सड़क पर नाले से होकर भरने से आवागमन बंद है। कुछेछा-टिकरौली मार्ग पर पानी भरने से आवागमन बंद हो गया है।
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नदियों के किनारे की निचली बस्तियों में बाढ़ का पानी धीरे-धीरे बढ़ रहा है। शहर के चूरामन डेरा, राठ मार्ग के किनारे के परिवार सामान समेट कर ऊंचाई के स्थानों पर पहुंचे हैं। शहर के गौरादेवी नई बस्ती, पुराना यमुना घाट, डिग्गी व सिडरा गांव के पास बाढ़ का पानी पहुंचने से कई परिवार सामान समेट कर ऊपर रखने में लगे हैं। मौदहा बांध निर्माण खंड के अधिशासी अभियंता तरनपाल सिंह ने बताया दोनों नदियां उफान पर हैं। कहा माताटीला बांध से दो लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने की सूचना आई है। मौजूदा समय में दोनों नदियां 8 सेमी की रफ्तार से बढ़ रही हैं।
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360201 हेक्टेयर क्षेत्रफल को प्रभावित करतीं हैं नदियां
1983 में आई बाढ़ से यमुना पांच मीटर व बेतवा चार मीटर बह चुकी ऊपर
राजेश सिंह
हमीरपुर। यमुना और बेतवा नदियां कई बार अपना विकराल रूप को दिखा चुकी हैं। इन नदियों में 1978, 1982, 1983, 1996, 2013 और 2019 में आई बाढ़ से लोग हलाकान हो चुके हैं। इन नदियों से जिले का 360201 हेक्टेयर क्षेत्रफल प्रभावित होता है।
जिले के उत्तरी सीमा पर बहने वाली यमुना नदी 77 किमी लंबी है। इसकी सीमा के लगभग 250 वर्ग किमी क्षेत्र को प्रभावित कर ऊबड़-खाबड़ दिशाएं बनाए रहती है। यमुना और बेतवा नदियों की बाढ़ ने सबसे ज्यादा वर्ष 1978 व 1982 में प्रभावित किया। 1983 में यमुना का जलस्तर 108.58 मीटर और बेतवा का जलस्तर 108.67 मीटर रिकार्ड हुआ था। तब यमुना खतरे के निशान से पांच मीटर और बेतवा चार मीटर ऊपर तक पहुंच गई थी। बांधों से पानी छोड़े जाने के बाद नदियों में बाढ़ की स्थित बनती है। बाढ़ के चलते 95 गांव प्रभावित हुए और फसलों की क्षति व जनहानि हो चुकी है।
हमीरपुर में संगम होने के कारण बाढ़ के समय नदियों का जलस्तर एक जैसा रहता है। यमुना नदी सदर तहसील के मनकीकला, मनकीखुर्द, उमराहट, बरुआ, बिलौटा, भौली, भटपुरा, जलाला, जमरेही ऊपर, जमरेहीतीर, बचरौली, सिकरोढ़ी, चंदूपुर, भिलांवा, मेरापुर, पत्योरा, सुरौलीबुजुर्ग, बरुवा, भौंरा व शहर को प्रभावित करती है। जिले में 134 किमी लंबी बेतवा नदी 1500 वर्ग क्षेत्र में अपना असर दिखाती है। इस नदी में चंदवारी के पास धसान नदी का संगम है, जबकि कुपरा के पास विरमा नदी मिलती है। यह नदी सरीला के चंदवारी, घुरौली, मगरौठ, चिकासी, सुजगवां, हरदुआ, बडेरा, खालसा, बरौली, बिरहट, इस्लामपुर, इछौरा, बेंदो, बडेरामाफ, बंधौली, जिटकरी, रतौली, जमौड़ी, अतरौली, चंडौत, बसरिया, रिरुवाबुजुर्ग, भेड़ी व कुपरा को प्रभावित करती है।
बेतवा नदी से सदर तहसील के बेरी, रानीगंज, बिंदपुरी, इंदपुरी, बैजेइस्लामपुर, मगरेड़ी, पारा, कंडौर, हरेहटा, केवटरा, नैठी, गिमुहा, रिठौरा, कनौटा, बदनपुर व हमीरपुर हैं। जबकि नदी के दाहिने किनारे में मोराकांदर, परसनी, कुम्हऊपुर, सहुरापुर, पौथिया, कीतरपुर, बरदहा, सजहना, कलौलीतीर, हेलापुर, चंदुलीतीर, अमिरता, कुछेछा, सूरजपुर, पाराओझी, सिडरा, टिकरौली, कारीमाटी, देवगांव, बड़ागांव प्रभावित होते हैं। मौदहा तहसील के बहदीना, अछपुरा, बजेहटा व भुजपुर भी बाढ़ की चपेट में प्रभावित होते है।
अब तक आई बाढ़ पर एक नजर
वर्ष बाढ़ की अवधि वर्षा (मिमी में)
1978 4 से 6 सितंबर तक 986.40
1980 14 से 16 अगस्त तक 1578.00
1982 28 से 30 अगस्त तक 951.52
1983 10 से 14 सितंबर तक 894.83
1996 22 से 30 अगस्त तक 986.83
2013 28 जुलाई से 8 अगस्त तक 995.76
2019 8 से 17 सितंबर तक 995.90
नदी की बाढ़ में डूबा शिव मंदिर
जलालपुर। बेतवा नदी के उफनाने से जलालपुर भेड़ी गांव के अंदर नाले से होकर पानी निचले स्थानों पर भर गया है। नदी किनारे पक्का घाट स्थित शंकर जी का मंदिर डूबा है। नदी में बाढ़ आने से नदी किनारे के खेतों में बोई गई ज्वार की फसलें डूबी हैं। बाढ़ में तमाम किसानों की फसलें जलमग्न हो गईं हैं।
सिंचाई विभाग के एसी ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया
हमीरपुर। यमुना बेतवा में आई बाढ़ को लेकर मौदहा बांध (निर्माण खंड) के अधीक्षण अभियंता एसकेे श्रीवास्तव ने अधिशासी अभियंता तरनपाल के साथ बाढ़ क्षेत्र का भ्रमण किया और क्षेत्रीय लोगों से जानकारी ली। यमुना व बेतवा नदी के तटबंधों पर सिंचाई विभाग ने तटबंधों का काम कराया है। मेरापुर मोहल्ले के निकट 450 मीटर तटबंध में डाली गई मिट्टी बाढ़ में बह रही है। अधिशासी अभियंता ने बताया अभी पानी बढ़ने की संभावना है। इस कारण तटबंधों का निरीक्षण कर जायजा लिया जा रहा है। संवाद
बेतवा की बाढ़ में पुल का एप्रोच मार्ग डूबा
आवागमन ठप होने से दस किमी चक्कर लगाना मजबूरी
पत्योरा। करीब दो करोड़ 90 लाख की लागत से बना महिला नाला पुल का एप्रोच मार्ग क्षतिग्रस्त होने के साथ बाढ़ से डूबा गया है। इससे करीब 12 गांवों का मुख्यालय से संपर्क टूट गया है। बाढ़ का पानी निर्माणाधीन मिनी स्टेडियम में एक फीट तक भर गया है। इससे निर्माण कार्य प्रभावित है। करीब छह गांवों की करीब 600 एकड़ फसल बाढ़ में डूब गईं, जिससे किसानों में मायूसी है। टिकरौली के बीडीसी प्रतिनिधि राजू पाल ने बताया कि वर्ष 2019-20 में स्वीकृत महिलानाला पुल एक बरसात भी नहीं झेल सका। नदियों में भीषण बाढ़ से पुल का पूरा एप्रोच मार्ग एक मीटर से अधिक नीचे धंसने से डूब गया है।
टिकरौली प्रधान प्रतिनिधि अक्षय पाल ने बताया कि करीब एक किमी पुल के दोनों साइड एप्रोच मार्ग बनाया गया है। लोनिवि को मिनी स्टेडियम के पास बनी पुलिया पर एक छोटा पांच मीटर ऊंचाई का पुल बनाना चाहिए, जिसे कार्य योजना में नहीं डाला गया है। कारीमाटी निवासी किसान कृष्ण कुमार ने बताया कि करीब चार बीघे तिल की फसल डूब गई है। टिकरौली, देवलार, कारीमाटी, कंजौली डेरा, पाराओझी, कुंडौरा के हजारों किसानों की करीब 600 एकड़ तिल, ज्वार आदि की फसलें नष्ट हो गईं। लोनिवि के अवर अभियंता नंदकिशोर ने बताया कि नई मिट्टी का पुराव होने से एप्रोच मार्ग धंस गया है। बाढ़ खत्म होते ही ठीक कराया जाएगा। मिनी स्टेडियम के पास एक छोटा पुल निर्माण अगले सीजन तक बनाया जाएगा।

मनकी पुल के पार पानी भरने से आवागमन ठप
कुरारा। यमुना की बाढ़ से मनकीखुर्द गांव के एक दर्जन मकानों में पानी घुसने से लोग अपना आशियाना छोड़ ऊंचाई वाले स्थान को पहुंच रहे हैं। वहीं मनकी पुल के उस पार नाले से होकर सड़क पर पानी से भरने से आवागमन बंद हो गया है। करीब 100 एकड़ में खड़ी तिल की फसल जलमग्न हो गई है। पूर्व प्रधान सभाजीत सिंह चंदेल ने एक दर्जन घरों में पानी घुस गया है। राम लखन यादव, रामबाबू कबीर, जयराम, जगराम, रामफल, कैलाश, छोटे, श्रीराम, श्रीकृष्ण, राजेंद्र आदि ऊंचाई वाले स्थानों पर पहुंच रहे हैं। मनकी कला में अदान सिंह के पशुबाड़े में पानी घुसने से भूसा भीग गया है। ग्राम प्रधान जयराम ने बताया कि गलियों में सीसी सड़क के ऊपर यमुना नदी का पानी आ गया है। अगर जलस्तर और बढ़ा तो नुकसान का खतरा ज्यादा हो सकता है। संवाद

टिकरौली गांव के पास महिलानाले का निरीक्षण करते एडीएम विनय प्रकाश श्रीवास्तव व एसडीएम संजय कुमार

टिकरौली गांव के पास महिलानाले का निरीक्षण करते एडीएम विनय प्रकाश श्रीवास्तव व एसडीएम संजय कुमार- फोटो : HAMIRPUR

जलालपुर गांव के पास बेतवा नदी के पानी में डूबे मंदिर।

जलालपुर गांव के पास बेतवा नदी के पानी में डूबे मंदिर।- फोटो : HAMIRPUR

टिकरौली गांव के पास महिलानाले के एप्रोच मार्ग में भरा  बेतवा नदी का पानी।

टिकरौली गांव के पास महिलानाले के एप्रोच मार्ग में भरा बेतवा नदी का पानी।- फोटो : HAMIRPUR

मौदहा क्षेत्र के गुढ़ा गांव के पास रपटे के ऊपर केन नदी का पानी भरने से नाव से आवागमन करते लोग।

मौदहा क्षेत्र के गुढ़ा गांव के पास रपटे के ऊपर केन नदी का पानी भरने से नाव से आवागमन करते लोग।- फोटो : HAMIRPUR

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