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पत्नी के हत्यारे को उम्रकैद
अमर उजाला/हमीरपुर
Updated Wed, 27 Sep 2017 11:12 PM IST
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दहेज की मांग पूरी न होने पर शादी के करीब ढाई माह बाद पत्नी की हत्या करने के मामले में अदालत ने आरोपी पति को दोषी ठहराया। बुधवार को अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम के न्यायाधीश शैलोज चंद्रा ने आरोपी पति को उम्रकैद व 30 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
यह मामला इस वजह से भी खास था कि वादी और गवाहों ने राजीनामा कर लिया था, लेकिन पुलिस की चार्जशीट में दिए गए साक्ष्य को अदालत ने आधार बनाया।
न्यायालय के शासकीय अधिवक्ता आनंद कुमार सक्सेना ने बताया कि मझगवां थाना क्षेत्र के जराखर गांव निवासी दशाराम की बेटी अरुण कुमारी की शादी चिकासी थाना क्षेत्र के अमरपुरा गांव निवासी हरीसिंह पुत्र मूलचंद्र के साथ 24 मई 2012 को हुई थी। 13 अगस्त 2012 को रात करीब दो बजे अरुण कुमारी की मौत हो गई।
पिता ने आरोप लगाया कि शादी के बाद से पति, जेठ वीरपाल, जेठानी नीरज कुमार, चचेरा ससुर पूरन सिंह 10 हजार रुपये व एक मोटरसाइकिल की मांग कर रहे थे। मांग पूरी नहीं होने पर हत्या कर दी। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर अदालत में चार्जशीट पेश किया। न्यायालय में मुकदमा विचारण के दौरान वादी व उसके गवाहों ने राजीनामा कर लिया और आरोपियों द्वारा मारपीट करने व हत्या करने के लगाए आरोपों से मुकर गए।
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इस पर न्यायालय ने दहेज प्रताड़ना व दहेज हत्या के आरोपों से उन्हें मुक्त कर दिया गया। लेकिन पुलिस की ओर से पेश की गई चार्जशीट पर अदालत ने स्वत: संज्ञान लिया। इसमें बताया गया था कि बेड पर मृतका के सेप्टीपिन, मोती की टूटी माला मिली। बेडशीट पर सिलवटें थी और वहीं से टूटी चूड़ियां भी बरामद की गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में थ्रोटिंग (गला दबाकर मारना) से मृत्यु होना आया था। बताया कि जिस दीवार पर लगी खूंटी से लटककर आत्महत्या करना बताया गया था।
वह खूटी मात्र पांच फिट की ऊंचाई पर है। जबकि मृतका की ऊंचाई भी पांच फिट के करीब थी, जिससे लटककर आत्महत्या करना संभव नहीं है। पुलिस ने यह भी बताया कि रात दो बजे पत्नी के बेड पर पति ही हो सकता है। इन सबूतों पर विचार करते हुए न्यायाधीश शैलोज चंद्रा ने मृतका के पति को दोषी मानते हुए उसे आजीवन कारावास व 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जबकि जेठ, जेठानी व चचिया ससुर को साक्ष्य अभाव में दोषमुक्त कर दिया।
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यह मामला इस वजह से भी खास था कि वादी और गवाहों ने राजीनामा कर लिया था, लेकिन पुलिस की चार्जशीट में दिए गए साक्ष्य को अदालत ने आधार बनाया।
न्यायालय के शासकीय अधिवक्ता आनंद कुमार सक्सेना ने बताया कि मझगवां थाना क्षेत्र के जराखर गांव निवासी दशाराम की बेटी अरुण कुमारी की शादी चिकासी थाना क्षेत्र के अमरपुरा गांव निवासी हरीसिंह पुत्र मूलचंद्र के साथ 24 मई 2012 को हुई थी। 13 अगस्त 2012 को रात करीब दो बजे अरुण कुमारी की मौत हो गई।
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पिता ने आरोप लगाया कि शादी के बाद से पति, जेठ वीरपाल, जेठानी नीरज कुमार, चचेरा ससुर पूरन सिंह 10 हजार रुपये व एक मोटरसाइकिल की मांग कर रहे थे। मांग पूरी नहीं होने पर हत्या कर दी। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर अदालत में चार्जशीट पेश किया। न्यायालय में मुकदमा विचारण के दौरान वादी व उसके गवाहों ने राजीनामा कर लिया और आरोपियों द्वारा मारपीट करने व हत्या करने के लगाए आरोपों से मुकर गए।
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इस पर न्यायालय ने दहेज प्रताड़ना व दहेज हत्या के आरोपों से उन्हें मुक्त कर दिया गया। लेकिन पुलिस की ओर से पेश की गई चार्जशीट पर अदालत ने स्वत: संज्ञान लिया। इसमें बताया गया था कि बेड पर मृतका के सेप्टीपिन, मोती की टूटी माला मिली। बेडशीट पर सिलवटें थी और वहीं से टूटी चूड़ियां भी बरामद की गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में थ्रोटिंग (गला दबाकर मारना) से मृत्यु होना आया था। बताया कि जिस दीवार पर लगी खूंटी से लटककर आत्महत्या करना बताया गया था।
वह खूटी मात्र पांच फिट की ऊंचाई पर है। जबकि मृतका की ऊंचाई भी पांच फिट के करीब थी, जिससे लटककर आत्महत्या करना संभव नहीं है। पुलिस ने यह भी बताया कि रात दो बजे पत्नी के बेड पर पति ही हो सकता है। इन सबूतों पर विचार करते हुए न्यायाधीश शैलोज चंद्रा ने मृतका के पति को दोषी मानते हुए उसे आजीवन कारावास व 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जबकि जेठ, जेठानी व चचिया ससुर को साक्ष्य अभाव में दोषमुक्त कर दिया।