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यूपी: हमीरपुर में आतिशबाजी का थैला गिरने से हुआ विस्फोट, धमाके से छत उड़ी, मकान जमींदोज, चचेरे भाई घायल
Thu, 09 Sep 2021 12:13 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हमीरपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हमीरपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Thu, 09 Sep 2021 12:13 PM IST
सार
उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में गुरुवार सुबह एक मकान तेज धमाके के साथ जमींदोज हो गया। घटना में दो चचेरे भाई गंभीर रूप से घायल हो गए। मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया है।
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विस्फोट के बाद घायल को अस्पताल ले जाती पुलिस
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
हमीरपुर में आतिशबाजी का थैला जमीन पर गिरते ही धमाके के साथ कमरे की छत उड़ गई। इसी के साथ पूरा मकान जमींदोज हो गया। आतिशबाजी में आग लगने से घर की गृहस्थी में आग लग गई। जिससे कमरे में मौजूद चचेरे भाई झुलस गए। एक युवक कमरे में मलबे में दब गया, दूसरा धमाके के कारण दूर जा गिरा। विस्फोट की आवाज सुनकर पहुंचे लोगों ने मलबा हटाकर दोनों को जिला अस्पताल भेजा।
जहां से दोनों को कानपुर के लिए रेफर किया गया है। सूचना पर पहुंचे एसपी केके दीक्षित ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। कहा, घटना की जांच कराई जा रही है। शहर के मेरापुर मोहल्ले से दो किमी दूर गुरुवार सुबह करीब साढ़े दस बजे खेत में बने एक पक्के मकान में तेज विस्फोट हुआ। जिससे मकान धराशायी हो गया। बतादें मेरापुर निवासी राजकुमार गुप्ता के पास आतिशबाजी बनाने का लाइसेंस है। उनका बेटा ज्ञानेंद्र (20) अपने चचेरे भाई बृजेंद्र (30) के साथ गुरुवार सुबह संगमहेश्वर मंदिर के पास यमुना नदी किनारे खेत पर बने अपने पक्के मकान पर गए थे।
इसी मकान में उनका आतिशबाजी का समान रखा था। बताया गया कि बीते माह यमुना नदी में आई बाढ़ के कारण मकान के कमरे में रखे पटाखे व विस्फोटक सामग्री को थैलों में भरकर कमरे में टाड़ पर रख दिया गया था। गुरुवार सुबह बृजेश वहां पहुंचे और जैसे ही दरवाजा खोला, तभी कमरे में टाड़ से पटाखे का थैला नीचे गिर गया। तभी जबरदस्त विस्फोट हुआ। विस्फोट इतना तेज था कि छत उड़ गई और जब नीचे गिरी तो पलट गई।
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साथ ही मकान पूरी तरह जमींदोज हो गया। हादसे में बृजेंद्र का आधा शरीर छत के नीचे दब गया, जबकि ज्ञानेंद्र विस्फोट से काफी दूर जा गिरा। धमाके की तेज आवाज से आसपास खेतों में काम कर रहे लोग पहुंचे और मलबा हटाकर बृजेंद्र को बाहर निकाला। सूचना पर कोतवाली पुलिस दमकल लेकर पहुंची।
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जहां से दोनों को कानपुर के लिए रेफर किया गया है। सूचना पर पहुंचे एसपी केके दीक्षित ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। कहा, घटना की जांच कराई जा रही है। शहर के मेरापुर मोहल्ले से दो किमी दूर गुरुवार सुबह करीब साढ़े दस बजे खेत में बने एक पक्के मकान में तेज विस्फोट हुआ। जिससे मकान धराशायी हो गया। बतादें मेरापुर निवासी राजकुमार गुप्ता के पास आतिशबाजी बनाने का लाइसेंस है। उनका बेटा ज्ञानेंद्र (20) अपने चचेरे भाई बृजेंद्र (30) के साथ गुरुवार सुबह संगमहेश्वर मंदिर के पास यमुना नदी किनारे खेत पर बने अपने पक्के मकान पर गए थे।
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इसी मकान में उनका आतिशबाजी का समान रखा था। बताया गया कि बीते माह यमुना नदी में आई बाढ़ के कारण मकान के कमरे में रखे पटाखे व विस्फोटक सामग्री को थैलों में भरकर कमरे में टाड़ पर रख दिया गया था। गुरुवार सुबह बृजेश वहां पहुंचे और जैसे ही दरवाजा खोला, तभी कमरे में टाड़ से पटाखे का थैला नीचे गिर गया। तभी जबरदस्त विस्फोट हुआ। विस्फोट इतना तेज था कि छत उड़ गई और जब नीचे गिरी तो पलट गई।
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साथ ही मकान पूरी तरह जमींदोज हो गया। हादसे में बृजेंद्र का आधा शरीर छत के नीचे दब गया, जबकि ज्ञानेंद्र विस्फोट से काफी दूर जा गिरा। धमाके की तेज आवाज से आसपास खेतों में काम कर रहे लोग पहुंचे और मलबा हटाकर बृजेंद्र को बाहर निकाला। सूचना पर कोतवाली पुलिस दमकल लेकर पहुंची।
108 एंबुलेंस से झुलसे चचेरे भाइयों को सदर अस्पताल पहुंचाया गया। जहां से दोनों को कानपुर रेफर किया गया है। वहीं दमकल कर्मियों ने आग पर काबू पाया। एसपी कमलेश दीक्षित ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद बताया मेरापुर निवासी राजकुमार के नाम से आतिशबाजी का लाइसेंस है। कहा फोरेंसिक टीम जांच कर रही है। इसके बाद वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
करीब 25 साल पूर्व भी हो चुकी घटना
शहर के मेरापुर मोहल्ले में करीब 25 वर्ष पूर्व बस्ती के अंदर इसी लाइसेंस धारक के घर में विस्फोट हुआ था। तब लाइसेंस धारक आतिशबाज राजकुमार घायल हुए थे। इस घटना से पूर्व हुए विस्फोट की लोगों को याद ताजा हो गई। उस घटना में राजकुमार की एक आंख खराब हो गई। आरके आतिशबाज के नाम से उनका रजिस्ट्रेशन है। आसपास खेतों में काम कर रहे खुशीराम सहित करीब तीस लोगों ने मलबे में दबे बृजेंद्र को बाहर निकाला। वहीं धमाके से ज्ञानेंद्र करीब 20 मीटर दूर जा गिरे।
खेत में बनाया था पक्का मकान
राजकुमार की पत्नी रामदुलारी के नाम एक बीघा खेत है। बताया गया गांव के अंदर आतिशबाजी बनाने का ग्रामीणों ने विरोध किया तो गांव से करीब दो किमी दूर खेत में राजकुमार ने पक्का मकान बनाकर आतिशबाजी का काम शुरू किया। राजकुमार का लाइसेंस 1993 में पास हुआ था।
जिसे 31 मार्च 2020 को रिनूवल के लिए राजकुमार ने डाला था, लेकिन अभी तक पुलिस अधिकारियों की रिपोर्ट लंबित है। हालांकि आतिशबाजी को बाहर से लाकर स्टोर करने के लिए भी एक लाइसेंस बनवाने का आवेदन लंबित है। इस घटना की जानकारी के बाद तहसीलदार मो. असलम, फायर सीओ राहुल पाल, लेखपाल राजकिशोर ने घटना को लेकर लोगों से जानकारी ली।
करीब 25 साल पूर्व भी हो चुकी घटना
शहर के मेरापुर मोहल्ले में करीब 25 वर्ष पूर्व बस्ती के अंदर इसी लाइसेंस धारक के घर में विस्फोट हुआ था। तब लाइसेंस धारक आतिशबाज राजकुमार घायल हुए थे। इस घटना से पूर्व हुए विस्फोट की लोगों को याद ताजा हो गई। उस घटना में राजकुमार की एक आंख खराब हो गई। आरके आतिशबाज के नाम से उनका रजिस्ट्रेशन है। आसपास खेतों में काम कर रहे खुशीराम सहित करीब तीस लोगों ने मलबे में दबे बृजेंद्र को बाहर निकाला। वहीं धमाके से ज्ञानेंद्र करीब 20 मीटर दूर जा गिरे।
खेत में बनाया था पक्का मकान
राजकुमार की पत्नी रामदुलारी के नाम एक बीघा खेत है। बताया गया गांव के अंदर आतिशबाजी बनाने का ग्रामीणों ने विरोध किया तो गांव से करीब दो किमी दूर खेत में राजकुमार ने पक्का मकान बनाकर आतिशबाजी का काम शुरू किया। राजकुमार का लाइसेंस 1993 में पास हुआ था।
जिसे 31 मार्च 2020 को रिनूवल के लिए राजकुमार ने डाला था, लेकिन अभी तक पुलिस अधिकारियों की रिपोर्ट लंबित है। हालांकि आतिशबाजी को बाहर से लाकर स्टोर करने के लिए भी एक लाइसेंस बनवाने का आवेदन लंबित है। इस घटना की जानकारी के बाद तहसीलदार मो. असलम, फायर सीओ राहुल पाल, लेखपाल राजकिशोर ने घटना को लेकर लोगों से जानकारी ली।