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भूगर्भ जलस्तर उठाने के लिए बनेंगे 53 चेकडैम
ब्यूरो अमर उजाला, हमीरपुर
Updated Mon, 25 Jul 2016 11:38 PM IST
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गुढ़ा गांव में चंद्रावल नदी पर बना चेकडैम।
- फोटो : अमर उजाला
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जिले का ज्यादातर एरिया डार्कजोन की श्रेणी में पहुंचता जा रहा है। इसे लेकर भूगर्भ जलस्तर ऊपर उठाने के प्रयास तेज किए गए हैं। इसी के मद्देनजर बुंदेलखंड पैकेज से 12 करोड़ 84 लाख रुपये की धनराशि जिले के लघु सिंचाई विभाग को आवंटित की गई है। बजट मिलने के बाद विभाग पांच विकास खंडों में 53 चेकडैम का निर्माण कराएगा।
बीते कई वर्षों से जिले में सामान्य से कम वर्षा हो रही है। जिले में सामान्य वर्षा 850.70 एमएम है। बीते 2006 से लेकर 2015 तक होने वाली बरसात का आंकड़ा देखें तो वर्ष 2008 में 1190 एमएम, वर्ष 2011 में 904 एमएम और 2013 में 1071.29 एमएम वर्षा हुई है। वहीं इन सात वर्षों में औसत से कम बारिश हुई है।
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सबसे कम वर्षा बीते 2014 में 450.46 एमएम रिकार्ड की गई। वहीं बीते वर्ष 2015 में 505.35 एमएम वर्षा हुई है। जनपद में हर साल सरकारी व निजी नलकूपों के साथ पेयजल योजनाओं तथा हैंडपंपों की संख्या में इजाफा हो रहा है। भूगर्भ जल दोहन की रफ्तार तेज है।
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वहीं जिस स्पीड से पानी का उपयोग किया जा रहा है उतनी तेजी से वाटर रिचार्जिंग के कार्य नहीं कराए जा रहे हैं। इधर, भूगर्भ जलस्तर गिरने से बीती गर्मियों में पीने के पानी को लेकर हाहाकार मचा रहा। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के अधिकांश नलकूपों में जवाब दे दिया तो लोगों को दूरदराज से पानी ढोकर लाना पड़ा।
प्रशासन सिर्फ कुछ स्थानों पर ही टैंकरों की व्यवस्था करा सका। जिले में पानी के संकट से तीन विकासखंड बुरी तरह प्रभावित है। इसमें सुमेरपुर विकासखंड को डार्कजोन घोषित कर दिया गया है। साथ ही सरीला और मौदहा ब्लाक सेमी क्रिटिकल की श्रेणी में पहुंच गए हैं।
बुंदेलखंड में पड़ रहे सूखे को देखते शासन ने कई योजनाएं संचालित की हैं। इसके चलते बुंदेलखंड पैकेज से चालू वित्तीय वर्ष में राठ, सरीला, गोहांड, मौदहा व सुमेरपुर विकास खंडों में 53 चेकडैम का निर्माण होगा। इसके लिए पैकेज से लघु सिंचाई विभाग को 12 करोड़ 84 लाख रुपये का बजट मिला है।
मौदहा तहसील क्षेत्र के गुढ़ा गांव के निकट चंद्रावल नदी पर पांच साल से अधूरा चेकडैम बनकर तैयार है। इस चेकडैम में डेढ़ मीटर पानी रहेगा। इसकी वाटर स्टोरेज क्षमता 91 हजार 880 क्यूसेक है। इससे जहां भूगर्भ जलस्तर ऊपर उठाने में मदद मिलेगी, वहीं किसान भी खेतों में फसलों की सिंचाई कर सकेंगे।
साथ ही चेकडैम बनने पर इसके रपटे से गुढ़ा सहित लरौंद, चमरखन्ना, छिरका के ग्रामीणों का आवागमन सुलभ हो सकेगा। यह चेकडैम तत्कालीन बसपा सरकार में बुंदेलखंड विकास निधि से स्वीकृत हुआ, लेकिन तब निर्माण के लिए आधा बजट जारी हुआ। लघु सिंचाई विभाग ने लंबे प्रयास के बाद चेकडैम निर्माण का बजट पांच साल बाद मिल सका है।
फिलहाल बरसात होने पर अभी चेकडैम के रपटे के ऊपर रेलिंग और बगल के हिस्सों में मिट्टी के साथ सीसी का काम बाकी रह गया है। सुमेरपुर ब्लाक डार्कजोन घोषित है। इस पर ब्लाक क्षेत्र में किसानों को निजी नलकूप लगवाने की मनाही है। लघु सिंचाई विभाग इस ब्लाक के किसानों के आवेदन नहीं ले रहा है।
इसको देखते भूगर्भ जल स्तर उठाने के प्रयास तेज हैं। फिलहाल लघु सिंचाई विभाग ब्लाक क्षेत्र में 11 तालाबों की खुदाई कराएगा। इसमें बांक और मवई गांवों में दो- दो तालाबों की खुदाई होगी। वहीं देवगांव, टेढ़ा, मिहूंना, ललपुरा, पौथिया व पलरा गांवों के तालाब भी खोदे जाएंगे। खोदे जाने वाले तालाबों का क्षेत्रफल एक हेक्टेयर से अधिक है।
सहायक अभियंता लघु सिंचाई जीबी आर्या ने कहा कि बुंदेलखंड पैकेज से नालों में 53 चेकडेम बनाने की स्वीकृति मिलने के साथ बजट भी जारी कर दिया गया है। चेकडेम निर्माण को साइडों पर सर्वे चल रहा है। बरसात खत्म होते इनका निर्माण शुरू हो जाएगा।