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स्लोवाकिया पुहंची प्रतिष्ठा, होटल के भूतल में शरण
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सुमेरपुर कस्बे में अपने घर में गमगीन बैठे प्रतिष्ठा के पिता व दादा।
- फोटो : HAMIRPUR
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भरुआसुमेरपुर। यूक्रेन की राजधानी कीव से निकलकर प्रतिष्ठा अपने साथियों के साथ स्लोवाकिया पहुंच गई है। यहां पर केंद्र सरकार ने सौ छात्रों को एक होटल के भूतल में ठहराया है। आठ मार्च को इनके स्वदेश आने की उम्मीद जताई जा रही है।
मेडिकल व्यवसायी मुकेश गुप्ता ने बताया कि पुत्री प्रतिष्ठा गुप्ता यूक्रेन की राजधानी कीव में रहकर एमबीबीएस कर रही है। रूस व यूक्रेन मध्य जंग के बीच सोमवार को कर्फ्यू में ढील मिलने पर साथी छात्रों के साथ कीव से ट्रेन के सहारे बाहर निकली थी। कीव से लबीब पहुंची प्रतिष्ठा मंगलवार को कैब लेकर हंगरी रवाना हुई थी। हंगरी की सीमा शाम होते ही बंद होने की बात कैब चालक ने कही।
इस पर सभी लोग हंगरी की बजाय रास्ता बदलकर स्लोवाकिया पहुंचे हैं। यहां पर केंद्र सरकार ने एक सैकड़ा छात्रों को एक होटल के भूतल में शरण दिलाई है। यहां से आठ मार्च को इनके स्वदेश लौटने की संभावना जताई जा रही है। छात्रा के पिता मुकेश गुप्ता ने बताया कि बिटिया से लगातार संपर्क में है। बुधवार को प्रतिष्ठा के पिता मुकेश व दादा चंद्र किशोर शिवहरे अपने घर के दरवाजे में गमगीन बैठे मिले। उन्होंने कहा कि जब तक बेटी घर नहीं आ जाती है, तब तक उनकी धड़कने बढ़ी हुई हैं।
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मेडिकल व्यवसायी मुकेश गुप्ता ने बताया कि पुत्री प्रतिष्ठा गुप्ता यूक्रेन की राजधानी कीव में रहकर एमबीबीएस कर रही है। रूस व यूक्रेन मध्य जंग के बीच सोमवार को कर्फ्यू में ढील मिलने पर साथी छात्रों के साथ कीव से ट्रेन के सहारे बाहर निकली थी। कीव से लबीब पहुंची प्रतिष्ठा मंगलवार को कैब लेकर हंगरी रवाना हुई थी। हंगरी की सीमा शाम होते ही बंद होने की बात कैब चालक ने कही।
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इस पर सभी लोग हंगरी की बजाय रास्ता बदलकर स्लोवाकिया पहुंचे हैं। यहां पर केंद्र सरकार ने एक सैकड़ा छात्रों को एक होटल के भूतल में शरण दिलाई है। यहां से आठ मार्च को इनके स्वदेश लौटने की संभावना जताई जा रही है। छात्रा के पिता मुकेश गुप्ता ने बताया कि बिटिया से लगातार संपर्क में है। बुधवार को प्रतिष्ठा के पिता मुकेश व दादा चंद्र किशोर शिवहरे अपने घर के दरवाजे में गमगीन बैठे मिले। उन्होंने कहा कि जब तक बेटी घर नहीं आ जाती है, तब तक उनकी धड़कने बढ़ी हुई हैं।
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