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Hamirpur News: सन 1962 में मिला पट्टा, बना दुश्मनी का कारण
Tue, 17 Feb 2026 11:41 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
Updated Tue, 17 Feb 2026 11:41 PM IST
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हत्या के दो साल पुराने मामले में छह दोषियों को आजीवन कारावास की सजा का मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। कुरारा थाना क्षेत्र के डिमुहा गांव के सिद्धबाबा डेरा निवासी मानसिंंह जब कानपुर देहात के मूसानगर के तहरापुर से अपने ननिहाल में रहने आया था। पहले मानसिंह के पिता यहां रहते थे। उस वक्त किसी से कोई विवाद नहीं था। गांव में सभी लोग रिश्तेदार कहकर पुकारते थे। मानसिंह ने उस समय पांच बीघा जमीन खरीदी। इसके बाद सन 1962 में 14 बीघा का पट्टा मिल गया। बस यहीं से गांवदारी में रंजिश शुरू हो गई।
मृतक ने जो जमीन खरीदी थी वह अपने मामा की लड़की से ही खरीदी थी। इस बात पर भी विवाद रहा। बहुत लोगों को यह बात नागवार गुजरी थी। हालांकि इसकी कोई परवाह नहीं की और वह मेहनत करके आगे बढ़ता रहा। ग्रामीणों की मानें तो मानसिंह यहां पर अपनी पत्नी के साथ यहां रहता था। एक बेटा उसके पैतृक गांव मूसानगर में रहता था और उसका आना जाना रहता था। बड़े बेटे देवराज की बीमारी के चलते मौत हो गई थी। पट्टा का विवाद कोर्ट तक पहुंचा। 14 बीघा का जो पट्टा मिला था उस पर कुछ लोग काबिज थे। हाईकोर्ट से वापस फाइल चकबंदी विभाग में लौट आई थी, जिस पर विचरण चल रहा था। 26 अगस्त की तारीख लगी हुई थी। इसके पहले ही घटना को अंजाम दिया गया।
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हमीरपुर। कुरारा थाना क्षेत्र के डिमुहा गांव के सिद्धबाबा डेरा निवासी मानसिंंह जब कानपुर देहात के मूसानगर के तहरापुर से अपने ननिहाल में रहने आया था। पहले मानसिंह के पिता यहां रहते थे। उस वक्त किसी से कोई विवाद नहीं था। गांव में सभी लोग रिश्तेदार कहकर पुकारते थे। मानसिंह ने उस समय पांच बीघा जमीन खरीदी। इसके बाद सन 1962 में 14 बीघा का पट्टा मिल गया। बस यहीं से गांवदारी में रंजिश शुरू हो गई।
मृतक ने जो जमीन खरीदी थी वह अपने मामा की लड़की से ही खरीदी थी। इस बात पर भी विवाद रहा। बहुत लोगों को यह बात नागवार गुजरी थी। हालांकि इसकी कोई परवाह नहीं की और वह मेहनत करके आगे बढ़ता रहा। ग्रामीणों की मानें तो मानसिंह यहां पर अपनी पत्नी के साथ यहां रहता था। एक बेटा उसके पैतृक गांव मूसानगर में रहता था और उसका आना जाना रहता था। बड़े बेटे देवराज की बीमारी के चलते मौत हो गई थी। पट्टा का विवाद कोर्ट तक पहुंचा। 14 बीघा का जो पट्टा मिला था उस पर कुछ लोग काबिज थे। हाईकोर्ट से वापस फाइल चकबंदी विभाग में लौट आई थी, जिस पर विचरण चल रहा था। 26 अगस्त की तारीख लगी हुई थी। इसके पहले ही घटना को अंजाम दिया गया।
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