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Hamirpur News: आर्थिक सहायता मिलते ही फफक पड़ा पिता ...
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फोटो-08एचएएमपी 10
हमीरपुर। बुधवार को यमुना नदी में नाव पलटने से उसमें सवार एक महिला छह की डूबने से मौत हो गई थी। इस हादसे में मृतकों के परिजनों को दैवी आपदा राहत कोष से चार-चार लाख की त्वरित आर्थिक मदद सीधे बैंक खाते में भेजी गई। शुक्रवार को तहसील सभागार में उन्हें डमी चेक सौंपी गई। इस दौरान कंपकपाते हाथों से मृतकों के परिजनों ने चेक तो पकड़ ली, लेकिन आंखों के आंसू नहीं रोक पाए। पत्नी व बेटे को खोने वाले पप्पू ने बस इतना कहा कि भगवान ऐसी मदद किसी को मिले।
कुरारा थाना क्षेत्र के भौली गांव के मजरा कोतूपुर पटिया क्षेत्र में यमुना नदी में बुधवार की शाम को एक नाव पलट गई थी। नाव सवार नौ लोगों में से तीन किसी तरह बच गए। बृजरानी व उसके पांच साल के बेटे लव्यांश समेत छह डूब गए थे। डूबने वालों के शव बृहस्पतिवार को 22 घंटे चले रेस्क्यू के बाद यमुना नदी से निकाले गए थे। पोस्टमार्टम के बाद राजस्व टीम ने रिपोर्ट लेकर काम किया और मृतकों के परिजनों का खाता संख्या लिया। विधिक कार्रवाई के बाद दैवी आपदा राहत कोष से चार-चार लाख रुपये ट्रांसफर कराए। रात 12 बजे तक सभी छह मृतकों के खाते में पैसा भेज दिया गया।
शुक्रवार को सदर विधायक डॉ. मनोज कुमार प्रजापति, चेयरमैन कुलदीप निषाद, एसडीएम अभिषेक कुमार, तहसीलदार वीरपाल सिंह ने मनकी निवासी मृतक बृजरानी के पति व लव्यांश के पिता पप्पू, जलाला भटपुरा निवासी मृतका आकांक्षा की मां माधुरी व कोतूपुर निवासी मृतका रानी के पिता बच्चन व मां सावित्री को तहसील सभागार में आर्थिक मदद की डमी चेक सौंपी। इस दौरान सभी ने परिजनों को ढांढस बंधाया और कहा कि इस पैसे का सदुपयोग करना। बृजरानी के पति व लव्यांश के पिता पप्पू को आठ लाख रुपये की डमी चेक मिली। चेक पकड़ते ही वह फफक पड़ा। वह बोला कि ऐसी मदद किसी को न मिले। इस दौरान उसके साथ ठेकेदार अशोक कुमार के अलावा उसकी छोटी बेटी ने पिता के आंसू पोंछे।
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दोनों बेटियों के नाम कर दूंगा पैसा
पत्नी व बेटे को नाव हादसे में खोने वाले मनकी निवासी पप्पू मेहनत मजदूरी करता है। तहसील सभागार में उसे जब प्रशासन ने डमी चेक के लिए बुलाया तो वह अपनी बड़ी बेटी अनामिका 11 वर्ष को साथ लाया। चेक मिलने के बाद उसने बताया कि यह पैसा हम दोनों बेटियों के नाम कर देंगे जिससे उनका भविष्य सुरक्षित हो सके। हमारा जीवन तो मजदूरी करते बीत ही जाएगा। आंखों में आंसू लिए पप्पू ने बताया कि पत्नी व बेटे से आखिरी बार वह 10 दिन पहले मिला था। मौजूदा समय में वह झांसी जिला एरच में बेतवा नदी पर बन रहे पुल पर मजदूरी कर रहा है। जब यह हादसा हुआ तो इसकी जानकारी ठेकेदार अशोक के पास पहुंची। वह अपने पास मोबाइल ही नहीं रखता। रात 09 बजे ठेकेदार ने मुझे बताया कि गांव चलना है। नाव पलटने की जानकारी यहीं पर आकर मिली। मेरी दुनिया उजड़ गई। पत्नी का अंतिम संस्कार किया और बेटे के शव को जलप्रवाह किया गया।
बड़ी होनहार बेटी थी आकांक्षा
हमीरपुर। नाव हादसे में काल के गाल में समाई जलाला भटपुरा निवासी आकांक्षा बड़ी होनहार थी। वह अपनी मौसी की भतीजी की शादी में आई हुई थी। यहां खरबूजा खाने की लालसा उसकी मौत का कारण बन गया। पिता रामहेत का कहना है कि वह मेहनत मजदूरी करते हैं, जमीन है नहीं फिर भी बिटिया की जिद पर उसे पढ़ा रहे थे। वह बड़ी होनहार थी। मां माधुरी ने रोते हुए बताया कि कभी स्कूल जाने की मनाही कर दो तो वह रोने लगती थी। स्कूल से गैरहाजिर नहीं होती थी। मास्टरनी भी कहती थी कि बिटिया पढ़ने में होशियार है। आर्थिक मदद मिली है उसे अपने दो बेटे और दो बेटियों की पढ़ाई पर खर्च करूंगी।
अब मेरे बच्चे किससे राखी बंधवाएंगे
नाव हादसे का शिकार हुए कोतूपुर निवासी रानी तीन भाइयों के बीच में अकेली बहन थी। डमी चेक लेते वक्त मृतका रानी की मां सावित्री की आंखें नम थीं। उन्होंने बताया कि मुझे क्या पता था कि यह घटना हो जाएगी। नाव तो हमारा पुस्तैनी साधन है वही मेरी बिटिया की मौत का कारण बन गया। शादी में हंसी-खुशी शामिल हुई थी। मेरे तीन बेटे हैं अब उनकी कलाई पर राखी कौन बांधेगा यह कहते हुए वह सिसक पड़ी। मृतका रानी की मां व पिता के नाम दो-दो लाख रुपये आर्थिक मदद के तौर पर मिले हैं।
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कुरारा थाना क्षेत्र के भौली गांव के मजरा कोतूपुर पटिया क्षेत्र में यमुना नदी में बुधवार की शाम को एक नाव पलट गई थी। नाव सवार नौ लोगों में से तीन किसी तरह बच गए। बृजरानी व उसके पांच साल के बेटे लव्यांश समेत छह डूब गए थे। डूबने वालों के शव बृहस्पतिवार को 22 घंटे चले रेस्क्यू के बाद यमुना नदी से निकाले गए थे। पोस्टमार्टम के बाद राजस्व टीम ने रिपोर्ट लेकर काम किया और मृतकों के परिजनों का खाता संख्या लिया। विधिक कार्रवाई के बाद दैवी आपदा राहत कोष से चार-चार लाख रुपये ट्रांसफर कराए। रात 12 बजे तक सभी छह मृतकों के खाते में पैसा भेज दिया गया।
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शुक्रवार को सदर विधायक डॉ. मनोज कुमार प्रजापति, चेयरमैन कुलदीप निषाद, एसडीएम अभिषेक कुमार, तहसीलदार वीरपाल सिंह ने मनकी निवासी मृतक बृजरानी के पति व लव्यांश के पिता पप्पू, जलाला भटपुरा निवासी मृतका आकांक्षा की मां माधुरी व कोतूपुर निवासी मृतका रानी के पिता बच्चन व मां सावित्री को तहसील सभागार में आर्थिक मदद की डमी चेक सौंपी। इस दौरान सभी ने परिजनों को ढांढस बंधाया और कहा कि इस पैसे का सदुपयोग करना। बृजरानी के पति व लव्यांश के पिता पप्पू को आठ लाख रुपये की डमी चेक मिली। चेक पकड़ते ही वह फफक पड़ा। वह बोला कि ऐसी मदद किसी को न मिले। इस दौरान उसके साथ ठेकेदार अशोक कुमार के अलावा उसकी छोटी बेटी ने पिता के आंसू पोंछे।
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दोनों बेटियों के नाम कर दूंगा पैसा
पत्नी व बेटे को नाव हादसे में खोने वाले मनकी निवासी पप्पू मेहनत मजदूरी करता है। तहसील सभागार में उसे जब प्रशासन ने डमी चेक के लिए बुलाया तो वह अपनी बड़ी बेटी अनामिका 11 वर्ष को साथ लाया। चेक मिलने के बाद उसने बताया कि यह पैसा हम दोनों बेटियों के नाम कर देंगे जिससे उनका भविष्य सुरक्षित हो सके। हमारा जीवन तो मजदूरी करते बीत ही जाएगा। आंखों में आंसू लिए पप्पू ने बताया कि पत्नी व बेटे से आखिरी बार वह 10 दिन पहले मिला था। मौजूदा समय में वह झांसी जिला एरच में बेतवा नदी पर बन रहे पुल पर मजदूरी कर रहा है। जब यह हादसा हुआ तो इसकी जानकारी ठेकेदार अशोक के पास पहुंची। वह अपने पास मोबाइल ही नहीं रखता। रात 09 बजे ठेकेदार ने मुझे बताया कि गांव चलना है। नाव पलटने की जानकारी यहीं पर आकर मिली। मेरी दुनिया उजड़ गई। पत्नी का अंतिम संस्कार किया और बेटे के शव को जलप्रवाह किया गया।
बड़ी होनहार बेटी थी आकांक्षा
हमीरपुर। नाव हादसे में काल के गाल में समाई जलाला भटपुरा निवासी आकांक्षा बड़ी होनहार थी। वह अपनी मौसी की भतीजी की शादी में आई हुई थी। यहां खरबूजा खाने की लालसा उसकी मौत का कारण बन गया। पिता रामहेत का कहना है कि वह मेहनत मजदूरी करते हैं, जमीन है नहीं फिर भी बिटिया की जिद पर उसे पढ़ा रहे थे। वह बड़ी होनहार थी। मां माधुरी ने रोते हुए बताया कि कभी स्कूल जाने की मनाही कर दो तो वह रोने लगती थी। स्कूल से गैरहाजिर नहीं होती थी। मास्टरनी भी कहती थी कि बिटिया पढ़ने में होशियार है। आर्थिक मदद मिली है उसे अपने दो बेटे और दो बेटियों की पढ़ाई पर खर्च करूंगी।
अब मेरे बच्चे किससे राखी बंधवाएंगे
नाव हादसे का शिकार हुए कोतूपुर निवासी रानी तीन भाइयों के बीच में अकेली बहन थी। डमी चेक लेते वक्त मृतका रानी की मां सावित्री की आंखें नम थीं। उन्होंने बताया कि मुझे क्या पता था कि यह घटना हो जाएगी। नाव तो हमारा पुस्तैनी साधन है वही मेरी बिटिया की मौत का कारण बन गया। शादी में हंसी-खुशी शामिल हुई थी। मेरे तीन बेटे हैं अब उनकी कलाई पर राखी कौन बांधेगा यह कहते हुए वह सिसक पड़ी। मृतका रानी की मां व पिता के नाम दो-दो लाख रुपये आर्थिक मदद के तौर पर मिले हैं।

फोटो-08एचएएमपी 10

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