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Hamirpur News: बेतवा नदी पर बना पुल राहगीरों, वाहन चालकों को दे रहा ''जख्म''
Thu, 02 Oct 2025 12:10 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
Updated Thu, 02 Oct 2025 12:10 AM IST
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फोटो 01 एचएएमपी 33- चिकासी मुहाना जर्जर पुल पर दिखती सरिया। संवाद
हमीरपुर। राठ-उरई मार्ग पर बेतवा नदी पर बना पुल दो जनपदों हमीरपुर व जालौन को जोड़ता है। मुहाना घाट पर बना यह पुल क्षतिग्रस्त हो गया है। पुल पर कई स्थानों पर गहरे गड्ढे हो गए हैं। सरिया भी निकल आई हैं। सरियों व गड्ढों में फंसकर दोपहिया व चौपहिया वाहन सवार घायल हो रहे हैं। हमीरपुर और जालौन जिले की सीमा में आने के कारण इस पुल की मरम्मत भी नहीं हो रही है। लोगों को कहना है कि कई बार विभाग के अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है पर सुनवाई नहीं हो रही है।
बताते चलें कि इस पुल का निर्माण वर्ष 1973 में शुरू हुआ था। दस साल तक चले काम के बाद 699 मीटर लंबा व 7.5 मीटर चौड़ा पुल वर्ष 1983 में बनकर तैयार हुआ। तब से एक-दो बार इसकी हल्की-फुल्की मरम्मत हुई है पर इसके बाद कोई काम नहीं हुआ है। इस पुल की मरम्मत को लेकर दो जिलों का पेंच फंस गया है, क्योंकि पुल जालौन व हमीरपुर जिले की सीमा में आता है। मुहाना तक जालौन की सीमा है। पुल समाप्त होने के बाद हमीरपुर की सीमा का चिकासी गांव पड़ जाता है। वहां से जनपद हमीरपुर की सीमा शुरू हो जाती है। सबसे ज्यादा परेशानी बरसात के मौसम में होती है। ऐसे में लोगों को हमेशा डर लगा रहता है। (संवाद)
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पुल टूटा तो इन गांवों को होगी मुसीबत
पंडित दीनदयाल इंटर कॉलेज चिकासी के प्रधानाचार्य रघुवीर शरण मिश्र कहते हैं कि जालौन के मकरेछा, मुहाना, जैसारी, जैसारी कलां, डकोर, कुसमिलिया व हमीरपुर के चिकासी, गोहांड, अतरा जैसे गांवों के लोगों का संपर्क एक दूसरे गांवों से कट जाएगा। इन गांव के लोगों की खेती पुल के दोनों तरफ है। पुल टूटने पर खेती किसानी करने वाले किसान मजदूरों की मुसीबत बढ़ सकती है।
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भारी वाहन गुजरने से हिलता है पुल
इंद्रपुरा गांव निवासी सुशील कुमार पाल का कहना है कि इस पुल से जब भारी वाहन निकलते हैं तो पूरा पुल हिलता है। दोपहिया वाहन सवार इस पुल पर निकलने में घबराते हैं। चौपहिया वाहन या बसों में सवार यात्री दिल थामकर इस पुल से गुजरते हैं। इस पुल की मरम्मत के लिए कई बार विभागीय अधिकारियों से गुहार लगाई जा चुकी है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
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दो जिलों के चक्कर में लटका है काम
सरीला निवासी नीलमा यादव कहती हैं कि हमीरपुर व जालौन जनपद के चक्कर में पुल मरम्मत का काम सालों से लटका हुआ है। उरई मेडिकल कॉलेज मरीज को ले जाने में इस पुल से डर लगता है। यदि जल्द काम शुरू नहीं हुआ तो कभी भी हादसे की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।
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रोजाना गुजरते करीब 2,500 वाहन
चिकासी ग्राम प्रधान ईशू राजपूत कहती हैं कि इस पुल के रास्ते खजुराहो, महोबा, चित्रकूट, छतरपुर, राठ, पनवाड़ी जाने का सीधा रास्ता है। रोजाना करीब 2,500 वाहन गुजरते हैं। कई सालों से पुल की मरम्मत तक नहीं कराई गई। पुल की सरिया बाहर निकल आई हैं। यदि यह पुल टूट गया तो लोगों को करीब 50 किलोमीटर से अधिक का चक्कर काटकर जाना होगा।
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जनपद को मिला है मरम्मत का काम
गतवर्ष पुल की मरम्मत आदि कार्य कराए गए थे। बारिश व ओवरलोड वाहनों की मार के चलते फिर से पुल क्षतिग्रस्त हो गया है। जल्द ही मरम्मत कार्य कराया जाएगा।
- दृगपाल वर्मा, अधिशासी अभियंता लोनिवि हमीरपुर।
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बताते चलें कि इस पुल का निर्माण वर्ष 1973 में शुरू हुआ था। दस साल तक चले काम के बाद 699 मीटर लंबा व 7.5 मीटर चौड़ा पुल वर्ष 1983 में बनकर तैयार हुआ। तब से एक-दो बार इसकी हल्की-फुल्की मरम्मत हुई है पर इसके बाद कोई काम नहीं हुआ है। इस पुल की मरम्मत को लेकर दो जिलों का पेंच फंस गया है, क्योंकि पुल जालौन व हमीरपुर जिले की सीमा में आता है। मुहाना तक जालौन की सीमा है। पुल समाप्त होने के बाद हमीरपुर की सीमा का चिकासी गांव पड़ जाता है। वहां से जनपद हमीरपुर की सीमा शुरू हो जाती है। सबसे ज्यादा परेशानी बरसात के मौसम में होती है। ऐसे में लोगों को हमेशा डर लगा रहता है। (संवाद)
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पुल टूटा तो इन गांवों को होगी मुसीबत
पंडित दीनदयाल इंटर कॉलेज चिकासी के प्रधानाचार्य रघुवीर शरण मिश्र कहते हैं कि जालौन के मकरेछा, मुहाना, जैसारी, जैसारी कलां, डकोर, कुसमिलिया व हमीरपुर के चिकासी, गोहांड, अतरा जैसे गांवों के लोगों का संपर्क एक दूसरे गांवों से कट जाएगा। इन गांव के लोगों की खेती पुल के दोनों तरफ है। पुल टूटने पर खेती किसानी करने वाले किसान मजदूरों की मुसीबत बढ़ सकती है।
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भारी वाहन गुजरने से हिलता है पुल
इंद्रपुरा गांव निवासी सुशील कुमार पाल का कहना है कि इस पुल से जब भारी वाहन निकलते हैं तो पूरा पुल हिलता है। दोपहिया वाहन सवार इस पुल पर निकलने में घबराते हैं। चौपहिया वाहन या बसों में सवार यात्री दिल थामकर इस पुल से गुजरते हैं। इस पुल की मरम्मत के लिए कई बार विभागीय अधिकारियों से गुहार लगाई जा चुकी है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
दो जिलों के चक्कर में लटका है काम
सरीला निवासी नीलमा यादव कहती हैं कि हमीरपुर व जालौन जनपद के चक्कर में पुल मरम्मत का काम सालों से लटका हुआ है। उरई मेडिकल कॉलेज मरीज को ले जाने में इस पुल से डर लगता है। यदि जल्द काम शुरू नहीं हुआ तो कभी भी हादसे की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।
रोजाना गुजरते करीब 2,500 वाहन
चिकासी ग्राम प्रधान ईशू राजपूत कहती हैं कि इस पुल के रास्ते खजुराहो, महोबा, चित्रकूट, छतरपुर, राठ, पनवाड़ी जाने का सीधा रास्ता है। रोजाना करीब 2,500 वाहन गुजरते हैं। कई सालों से पुल की मरम्मत तक नहीं कराई गई। पुल की सरिया बाहर निकल आई हैं। यदि यह पुल टूट गया तो लोगों को करीब 50 किलोमीटर से अधिक का चक्कर काटकर जाना होगा।
जनपद को मिला है मरम्मत का काम
गतवर्ष पुल की मरम्मत आदि कार्य कराए गए थे। बारिश व ओवरलोड वाहनों की मार के चलते फिर से पुल क्षतिग्रस्त हो गया है। जल्द ही मरम्मत कार्य कराया जाएगा।
- दृगपाल वर्मा, अधिशासी अभियंता लोनिवि हमीरपुर।

फोटो 01 एचएएमपी 33- चिकासी मुहाना जर्जर पुल पर दिखती सरिया। संवाद

फोटो 01 एचएएमपी 33- चिकासी मुहाना जर्जर पुल पर दिखती सरिया। संवाद

फोटो 01 एचएएमपी 33- चिकासी मुहाना जर्जर पुल पर दिखती सरिया। संवाद

फोटो 01 एचएएमपी 33- चिकासी मुहाना जर्जर पुल पर दिखती सरिया। संवाद

फोटो 01 एचएएमपी 33- चिकासी मुहाना जर्जर पुल पर दिखती सरिया। संवाद