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Hamirpur News: सुलोचना ने खेती में बनाई पहचान खड़ा हुआ लाखों रुपये का कारोबार

Sat, 17 Jan 2026 12:44 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर Updated Sat, 17 Jan 2026 12:44 AM IST
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Sulochana made a name for herself in farming and established a business worth lakhs of rupees.
फोटो16एचएएमपी 09- पपीता के खेत में काम करती सुलोचना। संवाद - फोटो : 1
हमीरपुर। मुस्करा गांव की सुलोचना घर की देहरी से घूंघट की ओट लेकर खेती किसानी में आगे बढ़ी तो फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। अपने पति का हाथ बंटाते हुए अब वह स्वयं ही सफल किसान के रूप में ...जय किसान का नारा बुलंद कर रही है। शाक भाजी में टमाटर की खेती से शुरू हुआ सफर अमरूद के बाग और पपीता की खेती तक पहुंच गया है। लाखों का टर्न ओवर हो गया। बेटे की नौकरी छुड़वाकर उसे भी खेती के काम में लगा दिया।
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मौदहा तहसील क्षेत्र के गांव मुस्करा निवासी रामकुमार साधारण किसान थे, और पारंपरिक खेती करके अपना गुजर बसर करते थे। खेती किसानी से बमुश्किल जीवन यापन होता था। पत्नी सुलोचना का साथ खेती से हटकर बागवानी का रुख किया। सुलोचना ने अपने पति के साथ टमाटर की खेती शुरू की। हालांकि पहले दौर में कोई खास मुनाफा नहीं हुआ। इसके बाद टमाटर, मिर्चा, बैंगन के अलावा अन्य शाक भाजी की खेती की। अच्छी पैदावार हुई तो फिर नित नए प्रयोग शुरू किए। शाकभाजी के साथ ही फूलों की खेती शुरू की। गुलाब, गेंदा से लेकर सजावट के अन्य फूलों से सुलोचना का कृषि फार्म महक उठा। इसी के साथ आमदनी और बढ़ गई।
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वर्ष 2018 में पहली बार पपीता की खेती शुरू की। दो बीघा खेत में पपीता लगाया। पपीता का पहला प्रयोग मौसम के चक्कर में फेल हो गया। यहां से हिम्मत नहीं हारी और अगले वर्ष ही एक हेक्टेयर में पपीता लगाया। इस बार मौसम ने साथ दिया तो अच्छी पैदावार हुई। यहीं से सफलता की नई इबारत लिख दी। सुलोचना बताती है कि उन्होंने उद्यान विभाग से अमरूद के पौधे लेकर बाग तैयार किया है। थाई पिंक वैरायटी के अमरूद का बाग देखने के लिए आसपास के किसान और अधिकारी भी आते है। मौजूदा समय में दो हेक्टेयर क्षेत्रफल में पपीता की खेती कर रहे है। मेरा बेटा मिथुन उज्जैन में एक हर्बल कंपनी में मैनेजर के पद पर नौकरी करता था, उसे वापस बुला लिया है। नौकरी छुड़वाकर उसे खेती में लगाया तो काम और बढ़ गया। एक साल में 20 लाख की कमाई हर हाल में हो जाती है।
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