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Hamirpur News: मोहब्बत, भाईचारा का पैगाम किसको दें, वह अमृत पी गए खाली जाम किसको दें
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संवाद न्यूज एजेंसी
मौदहा (हमीरपुर)। कस्बे के रहमानिया इंटर कॉलेज में बीती रात सईद मौलाना सलीम जाफरी की याद में ऑल इंडिया मुशायरा का आयोजन किया गया। जिसका आयोजन निजामुद्दीन पावर व उनके सहयोगियों ने किया। जिसमें मुल्क भर से मशहूर शायरों ने शिरकत की। महशर आफरीदी के शेर मोहब्बत, भाईचारा, अमन का पैगाम किसको दें। लोगों ने खूब पसंद किया।
मुशायरे की सदारत मौलाना खान ने व निजात नदीम फर्रुख अनजान ने दिए। मुख्य अतिथि कमरउद्दीन जुगनू, विशिष्ट अतिथि तुफैल अहमद, शहजाद प्रधान मांचा के अलावा और भी लोगों ने शिरकत की। मुशायरे की शुरुआत नाते नबी से डाॅ. माजिद देवबंद ने की। महशर आफरीदी के शेर मोहब्बत, भाईचारा, अमन का पैगाम किसको दें, वह अमृत पी गए खाली जाम किसको दें। खुर्शीद हैदर का आवामी दर्द है गजल में मेरी, कोई भी शेर दरबारी नहीं है।
हाशिम फिरोजाबादी की नज्म इल्म हासिल करो, यह रसूले खुदा का फरमान भी है। इल्म से ही मुकम्मल हर इंसान है, इल्म ही अस्ल में अपनी पहचान है। मुशायरे में शिरकत करने वाले मेहमान शायरों में जनाब माजिद देवबंदी, महशर आफरीदी महाराष्ट्र, अबरार काशिफ अमरावती, खुर्शीद हैदर मुजफ्फरनगर, जहाज देवबंदी, हाशिम फिरोजाबादी, निकहत अमरोही, रूखसार बलरामपुरी के साथ मेजबान शायर मसीह निजामी ने भी अपना कलाम पेश किया।
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मुशायरे में सबसे ज्यादा हाशिम फिरोजाबाद की नज्म व अबरार काशिफ की नज्म को पसंद किया गया। वहीं खुर्शीद हैदर ने अपने कलाम से मुशायरा में नई जान फूंक दी। आसान अल्फाज में की गई शायरी को लोगों ने खूब पसंद किया।
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मौदहा (हमीरपुर)। कस्बे के रहमानिया इंटर कॉलेज में बीती रात सईद मौलाना सलीम जाफरी की याद में ऑल इंडिया मुशायरा का आयोजन किया गया। जिसका आयोजन निजामुद्दीन पावर व उनके सहयोगियों ने किया। जिसमें मुल्क भर से मशहूर शायरों ने शिरकत की। महशर आफरीदी के शेर मोहब्बत, भाईचारा, अमन का पैगाम किसको दें। लोगों ने खूब पसंद किया।
मुशायरे की सदारत मौलाना खान ने व निजात नदीम फर्रुख अनजान ने दिए। मुख्य अतिथि कमरउद्दीन जुगनू, विशिष्ट अतिथि तुफैल अहमद, शहजाद प्रधान मांचा के अलावा और भी लोगों ने शिरकत की। मुशायरे की शुरुआत नाते नबी से डाॅ. माजिद देवबंद ने की। महशर आफरीदी के शेर मोहब्बत, भाईचारा, अमन का पैगाम किसको दें, वह अमृत पी गए खाली जाम किसको दें। खुर्शीद हैदर का आवामी दर्द है गजल में मेरी, कोई भी शेर दरबारी नहीं है।
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हाशिम फिरोजाबादी की नज्म इल्म हासिल करो, यह रसूले खुदा का फरमान भी है। इल्म से ही मुकम्मल हर इंसान है, इल्म ही अस्ल में अपनी पहचान है। मुशायरे में शिरकत करने वाले मेहमान शायरों में जनाब माजिद देवबंदी, महशर आफरीदी महाराष्ट्र, अबरार काशिफ अमरावती, खुर्शीद हैदर मुजफ्फरनगर, जहाज देवबंदी, हाशिम फिरोजाबादी, निकहत अमरोही, रूखसार बलरामपुरी के साथ मेजबान शायर मसीह निजामी ने भी अपना कलाम पेश किया।
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मुशायरे में सबसे ज्यादा हाशिम फिरोजाबाद की नज्म व अबरार काशिफ की नज्म को पसंद किया गया। वहीं खुर्शीद हैदर ने अपने कलाम से मुशायरा में नई जान फूंक दी। आसान अल्फाज में की गई शायरी को लोगों ने खूब पसंद किया।