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सागर-कानपुर हाईवे : 24 घंटे के जाम में फुंकता है एक करोड़ का ईंधन
Tue, 02 Dec 2025 12:32 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
Updated Tue, 02 Dec 2025 12:32 AM IST
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हमीरपुर। कानपुर-सागर हाईवे खूनी सड़क के बाद अब जाम हाईवे के रूप में भी अपनी पहचान बना ली है। कानपुर देहात के अलियापुर टोल प्लाजा से लेकर हमीरपुर, मौदहा और महोबा के बीच आए दिन जाम लगता है। लोग घंटों परेशान रहते हैं। कई बार तो 10 किलोमीटर की यात्रा करने में एक, दो नहीं बल्कि तीन से चार घंटे तक लग जाते हैं। यह सड़क पूरी तरह से लोगों की लाइफ लाइन ही प्रभावित कर देती है। शनिवार और रविवार को लगे 24 घंटे के जाम में फंसे वाहनों पर लगभग एक करोड़ रुपये से अधिक का ईंधन फुंक गया। इसके साथ ही समय की बर्बादी, लोगों के काम का नुकसान का आंकलन लगाना कठिन है। यमुना पुल से लेकर बेतवा पुल के बीच छह हजार से अधिक बड़े वाहन गुजरे जो जाम में फंसे रहे। इन वाहनों में डीजल खपत का आंकलन किया जाए तो एक घंटे में स्टार्ट खड़े एक ट्रक या बस में दो लीटर डीजल अधिक खर्च होता है। वर्तमान में एक लीटर डीजल की कीमत 88.21 रुपये है। इस हिसाब से एक घंटे में बड़े वाहनों पर 10 लाख 58 हजार रुपये से अधिक का डीजल फुंकता है। गैस और पेट्रोल वाहनों के आंकड़ों समेत 24 घंटे में लगभग एक करोड़ से अधिक का ईंधन तो सिर्फ जाम में फंसने की वजह से खर्च हो जाता है। (संवाद)
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जाम लील गया कई जिंदगियां
जाम की वजह से मरीजों को ले जा रही एम्बुलेंस और प्राइवेट वाहन समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाते, जिस वजह से मरीज तड़प-तड़प कर काल के गाल में समा जाते हैं। बृहस्पतिवार की रात भी बेतवा पुल पर वाहन के खराब होने से जाम लगा था। उधर, चंदुलीतीर गांव के पास सड़क हादसे में कबरई थाने में तैनात सिपाही घायल हो गया। वह दर्द से तड़पता रहा, लेकिन एंबुलेंस जाम की वजह से अस्पताल तक नहीं पहुंच पाई। दूसरे साधन से उसे जब तक अस्पताल पहुंचाया गया तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। रविवार को यमुना पुल पर लगे जाम की वजह से फतेहपुर के दपसौरा गांव के एक मासूम की जान चली गई। जाम की वजह से अस्पताल न पहुंच पाने की वजह से पौथिया गांव की एक महिला ने एंबुलेंस में ही बच्चे को जन्म दे दिया।
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जाम से बिगड़ रही चालकों की सेहत
कानपुर-सागर हाईवे पर आए दिन के जाम से चालक परेशान हो रहे है। रतजगा करने से उनकी सेहत बिगड़ रही है। नींद पूरी न होने से वाहन चलाते वक्त झपकी आ जाती है तो हादसे का कारण बन जाती है। डाक्टरों की माने तो जागने की वजह से चिड़चिड़ापन बढ़ता है। चालक तनाव में रहता है, जिससे उसके हाईपरशन की संभावना बढ़ जाती है।
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इनकी भी सुनिए
चक्कर के हिसाब से मिलता है पैसा
- फतेहपुर निवासी लोडर चालक चौबे सिंह महोबा से लौटते वक्त सुमेरपुर में जाम में फंस गया। उसने बताया कि जाम में चालकों को सबसे अधिक परेशानी होती है। कई चालक चक्कर के हिसाब से वाहन चला रहे है। अब अगर जाम में वाहन 10 घंटे के लिए फंस गया तो उसका अगले दिन का एक फेरा बर्बाद हो जाता है। पैसा भी मिल पाता है। ईंधन भी अधिक लगता है।
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गाड़ी चालू रखने में डीजल होता है बर्बाद
- सुमेरपुर निवासी बस चालक भगवान सिंह का कहना है कि जाम में अगर बड़ा वाहन फंसा है तो एक घंटे में दो लीटर ईंधन की अधिक खपत होती है। बस चार से छह किमी का एवरेज निकालती है। बड़े डंपर दो से तीन किलोमीटर प्रति लीटर का एवरेज निकालते है। जाम में हम चालकों के सामने बहुत समस्याएं है। एक तो नींद पूरी नहीं होती। इस वजह से एक्सीडेंट के खतरे भी बढ़ जाते है।
जाम में वाहन फंसा तो तीन हजार खर्चा बढ़ा
- हमीरपुर के ट्रक आपरेटर यूनियन के अध्यक्ष रेवती रमण बाजपेयी का कहना कहना है कि सड़क के जाम से बहुत कुछ प्रभावित होता है। ट्रक का खर्च बढ़ जाता है। चालक व परिचालकों को रात की खुराकी देनी पड़ती है। कानपुर सागर हाईवे पर दो से तीन हजार रुपये का डीजल हर चक्कर पर अधिक खर्च होता है। 24 घंटे के जाम में तो आमदनी घट जाती है।
- मजदूर संघ के अध्यक्ष रोडवेज के चालक शिवशरण सिंह का कहना है कि जाम में डीजल की खपत अधिक होती है तो ऐसी स्थिति में उसी दौरान उसी रूट की दूसरी बस में खर्च हुए डीजल का आंकलन करके विभाग मैनेज करता है। अगर डीजल की खपत अधिक होती है तो वह चालक से वसूली होती है। जाम में चालक का कोई दोष नहीं होता, लेकिन फिर भी सजा भुगतनी पड़ती है।
शनिवार को 4867 वाहन टोल से गुजरे तो वहीं रविवार को 5149 वाहन निकले। 24 घंटे में 10 हजार वाहन के लगभग फिलहाल अभी निकल रहे है। जाम की वजह से कई बार टोल प्लाजा पर ही अव्यवस्था सी नजर आने लगती है। यहां के कर्मियों को परेशान होना पड़ता है।
- राघवेंद्र तिवारी, प्रबंधक, अलियापुर टोल प्लाजा
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जाम लील गया कई जिंदगियां
जाम की वजह से मरीजों को ले जा रही एम्बुलेंस और प्राइवेट वाहन समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाते, जिस वजह से मरीज तड़प-तड़प कर काल के गाल में समा जाते हैं। बृहस्पतिवार की रात भी बेतवा पुल पर वाहन के खराब होने से जाम लगा था। उधर, चंदुलीतीर गांव के पास सड़क हादसे में कबरई थाने में तैनात सिपाही घायल हो गया। वह दर्द से तड़पता रहा, लेकिन एंबुलेंस जाम की वजह से अस्पताल तक नहीं पहुंच पाई। दूसरे साधन से उसे जब तक अस्पताल पहुंचाया गया तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। रविवार को यमुना पुल पर लगे जाम की वजह से फतेहपुर के दपसौरा गांव के एक मासूम की जान चली गई। जाम की वजह से अस्पताल न पहुंच पाने की वजह से पौथिया गांव की एक महिला ने एंबुलेंस में ही बच्चे को जन्म दे दिया।
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जाम से बिगड़ रही चालकों की सेहत
कानपुर-सागर हाईवे पर आए दिन के जाम से चालक परेशान हो रहे है। रतजगा करने से उनकी सेहत बिगड़ रही है। नींद पूरी न होने से वाहन चलाते वक्त झपकी आ जाती है तो हादसे का कारण बन जाती है। डाक्टरों की माने तो जागने की वजह से चिड़चिड़ापन बढ़ता है। चालक तनाव में रहता है, जिससे उसके हाईपरशन की संभावना बढ़ जाती है।
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चक्कर के हिसाब से मिलता है पैसा
- फतेहपुर निवासी लोडर चालक चौबे सिंह महोबा से लौटते वक्त सुमेरपुर में जाम में फंस गया। उसने बताया कि जाम में चालकों को सबसे अधिक परेशानी होती है। कई चालक चक्कर के हिसाब से वाहन चला रहे है। अब अगर जाम में वाहन 10 घंटे के लिए फंस गया तो उसका अगले दिन का एक फेरा बर्बाद हो जाता है। पैसा भी मिल पाता है। ईंधन भी अधिक लगता है।
गाड़ी चालू रखने में डीजल होता है बर्बाद
- सुमेरपुर निवासी बस चालक भगवान सिंह का कहना है कि जाम में अगर बड़ा वाहन फंसा है तो एक घंटे में दो लीटर ईंधन की अधिक खपत होती है। बस चार से छह किमी का एवरेज निकालती है। बड़े डंपर दो से तीन किलोमीटर प्रति लीटर का एवरेज निकालते है। जाम में हम चालकों के सामने बहुत समस्याएं है। एक तो नींद पूरी नहीं होती। इस वजह से एक्सीडेंट के खतरे भी बढ़ जाते है।
जाम में वाहन फंसा तो तीन हजार खर्चा बढ़ा
- हमीरपुर के ट्रक आपरेटर यूनियन के अध्यक्ष रेवती रमण बाजपेयी का कहना कहना है कि सड़क के जाम से बहुत कुछ प्रभावित होता है। ट्रक का खर्च बढ़ जाता है। चालक व परिचालकों को रात की खुराकी देनी पड़ती है। कानपुर सागर हाईवे पर दो से तीन हजार रुपये का डीजल हर चक्कर पर अधिक खर्च होता है। 24 घंटे के जाम में तो आमदनी घट जाती है।
- मजदूर संघ के अध्यक्ष रोडवेज के चालक शिवशरण सिंह का कहना है कि जाम में डीजल की खपत अधिक होती है तो ऐसी स्थिति में उसी दौरान उसी रूट की दूसरी बस में खर्च हुए डीजल का आंकलन करके विभाग मैनेज करता है। अगर डीजल की खपत अधिक होती है तो वह चालक से वसूली होती है। जाम में चालक का कोई दोष नहीं होता, लेकिन फिर भी सजा भुगतनी पड़ती है।
शनिवार को 4867 वाहन टोल से गुजरे तो वहीं रविवार को 5149 वाहन निकले। 24 घंटे में 10 हजार वाहन के लगभग फिलहाल अभी निकल रहे है। जाम की वजह से कई बार टोल प्लाजा पर ही अव्यवस्था सी नजर आने लगती है। यहां के कर्मियों को परेशान होना पड़ता है।
- राघवेंद्र तिवारी, प्रबंधक, अलियापुर टोल प्लाजा