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Hamirpur News: नियम ने दिखाया बीएलओ को आईना, छुट्टी भी गई बेकार, नोटिस का नहीं निकला समाधान
Tue, 24 Feb 2026 12:08 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
Updated Tue, 24 Feb 2026 12:08 AM IST
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हमीरपुर। विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) में गणना प्रपत्रों की जांच और अपलोडिंग में हुई गड़बड़ियों को दुरुस्त करना अब बड़ी चुनौती बन गया है। मतदाताओं के साथ-साथ बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) भी अपने ही वोट को बचाने के लिए परेशान हैं।
सुमेरपुर क्षेत्र में ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां एक बीएलओ को अपनी ही दादी से रिश्ते का प्रमाण देने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार नगर पंचायत सुमेरपुर के भाग संख्या 133 के निवासी राजेंद्र कुमार पुत्र आशादीन लखनऊ में शिक्षक है। वहां पर उन्हें विधानसभा क्षेत्र 173 के भाग संख्या 327 में बीएलओ की जिम्मेदारी दी गई है। वह भले ही लखनऊ में रह रहे हो,लेकिन उनका परिवार, सुमेरपुर में ही रहता है। यहां पर गणना प्रपत्र भरा और उसमें दादी से रिश्ता दिखाया। चूंकि माता-पिता का नाम वर्ष 2003 की मतदाता सूची से कट गया था। गणना प्रपत्र का सत्यापन हुआ तो उसमें लॉजिकल नोटिस के जरिए रिश्ते का प्रमाण मांगा गया। संबंधित दस्तावेज वह प्रस्तुत नहीं कर पाए।
समस्या के समाधान के लिए लखनऊ के बीएलओ राजेंद्र कुमार दो दिन की छुट्टी लेकर यहां आए। उन्होंने आवश्यक कागजात जुटाने का प्रयास किया, लेकिन दस्तावेज उपलब्ध न होने से मामला सुलझ नहीं सका। ऐसे में वह अपने ही मताधिकार को सुरक्षित रखने के लिए परेशान हैं।
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राजेंद्र कुमार ने कहा कि मुझे अनावश्यक परेशान किया जा रहा है। मेरी जन्मतिथि के अनुसार एक ही प्रमाण जरूरी है। इसके बावजूद बाबा-दादी के प्रमाणपत्र मांगे गए। दादी का निधन हो गया। माता-पिता का वर्ष 2003 की सूची में नाम नहीं है। उस वक्त किसी ने नाम कटवा दिया था।
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सुमेरपुर क्षेत्र में ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां एक बीएलओ को अपनी ही दादी से रिश्ते का प्रमाण देने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार नगर पंचायत सुमेरपुर के भाग संख्या 133 के निवासी राजेंद्र कुमार पुत्र आशादीन लखनऊ में शिक्षक है। वहां पर उन्हें विधानसभा क्षेत्र 173 के भाग संख्या 327 में बीएलओ की जिम्मेदारी दी गई है। वह भले ही लखनऊ में रह रहे हो,लेकिन उनका परिवार, सुमेरपुर में ही रहता है। यहां पर गणना प्रपत्र भरा और उसमें दादी से रिश्ता दिखाया। चूंकि माता-पिता का नाम वर्ष 2003 की मतदाता सूची से कट गया था। गणना प्रपत्र का सत्यापन हुआ तो उसमें लॉजिकल नोटिस के जरिए रिश्ते का प्रमाण मांगा गया। संबंधित दस्तावेज वह प्रस्तुत नहीं कर पाए।
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समस्या के समाधान के लिए लखनऊ के बीएलओ राजेंद्र कुमार दो दिन की छुट्टी लेकर यहां आए। उन्होंने आवश्यक कागजात जुटाने का प्रयास किया, लेकिन दस्तावेज उपलब्ध न होने से मामला सुलझ नहीं सका। ऐसे में वह अपने ही मताधिकार को सुरक्षित रखने के लिए परेशान हैं।
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राजेंद्र कुमार ने कहा कि मुझे अनावश्यक परेशान किया जा रहा है। मेरी जन्मतिथि के अनुसार एक ही प्रमाण जरूरी है। इसके बावजूद बाबा-दादी के प्रमाणपत्र मांगे गए। दादी का निधन हो गया। माता-पिता का वर्ष 2003 की सूची में नाम नहीं है। उस वक्त किसी ने नाम कटवा दिया था।