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Hamirpur News: चंद्रावल नदी का पुनरुद्धार शुरू 22 गांवों में मिलेगा भरपूर पानी

Thu, 18 Dec 2025 12:06 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 18 Dec 2025 12:06 AM IST
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Revival of Chandrawal river begins, 22 villages will get plenty of water
- जलशक्ति मंत्री ने भूमि पूजन कर चलाया फावड़ा, डीएम ने जलोदय अभियान को दी गति
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- 22 गांवों से होकर गुजरी नदी की जिले में कुल 68 किलोमीटर लंबाई है
फोटो 17 एचएएमपी 11- चंद्रावल नदी किनारे भूमि पूजन करते जलशक्ति मंत्री। संवाद

फोटो 17 एचएएमपी 12- पढ़ोरी गांव स्थिति चंद्रावल नदी में सिल्ट सफाई करती मशीन। संवाद

फोटो 17 एचएएमपी 13- नदी पुनरोद्धार अभियान में गति देते जलशक्ति मंत्री, भाजपा जिलाध्यक्ष व डीएम। संवाद


संवाद न्यूज एजेंसी


मौदहा (हमीरपुर)। विलुप्त होती चंद्रावल नदी के पुनरुद्धार के लिए बुधवार से प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। जिले के 68 किलोमीटर के दायरे में बहने वाली इस नदी की सिल्ट सफाई, पौधरोपण, घाटों का निर्माण सहित इसकी गहराई व चौड़ाई में एकरूपता रखी जाएगी। जल शक्ति मंत्री ने भूमि पूजन कर फावड़ा चलाकर इसके पुनरुद्धार की शुरुआत की। पूरे काम को मूर्तरूप देने के लिए 10 जोनल अधिकारियों की भी ड्यूटी लगाई गई है।

क्षेत्र के पढ़ोरी गांव स्थिति चंद्रावल नदी किनारे नदी बचाओ अभियान को सफल बनाने के लिए बुधवार को शुरुआत कर दी गई। मुख्य अतिथि जलशक्ति मंत्री रामकेश निषाद, भाजपा जिलाध्यक्ष शकुंतला निषाद, जिला पंचायत अध्यक्ष जयंती राजपूत, सदर विधायक डॉ. मनोज प्रजापति, डीएम घनश्याम मीना ने नदी किनारे भूमि पूजन कर फावड़ा चलाकर अभियान को गति दी।
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अभियान को सफल बनाने के लिए प्रशासन ने संबंधित विभागों, उद्यमियों, खनन पट्टाधारकों व स्वयंसेवी संगठनों से सहयोग मांगा है। प्रशासन का उद्देश्य जनसहयोग के माध्यम से नदी को पुनर्जीवित कर जल संकट का स्थायी समाधान निकालना है। डीएम ने कहा कि चंद्रावल नदी क्षेत्र के 22 गांवों से होते हुए गुजरी है। जिले में इसकी कुल 68 किलोमीटर लंबाई है। इसके पुनरुद्धार के लिए इसे 20 भागों में बांटा गया है।
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जलशक्ति मंत्री ने कहा कि नदी की गहराई और चौड़ाई में एकरूपता रखी जाएगी। सिल्ट को उपयुक्त स्थानों पर पैच में लगाया जाएगा। घाटों का सुंदरीकरण और पौधारोपण भी किया जाएगा। इसके दूरगामी और सकारात्मक परिणाम निकलेंगे। मंत्री ने डीएम के इस अभियान की सराहना की। इस मौके पर ब्लाक प्रमुख प्रतिनिधि लालाराम निषाद, भाजपा नेता साधना सिंह सहित क्षेत्र के सभी प्रधान और समाजसेवी मौजूद रहे।
20 भागों में बांटा गया पूरा अभियान

नदी के पुनरुद्धार के लिए कार्य को 20 भागों में बांटा गया है। इसमें 6 तकनीकी सहायक, 10 जोनल अधिकारी, 6 ग्राम पंचायत अधिकारी व ग्राम विकास अधिकारी नामित किए गए हैं। गुढ़ा, गहबरा, भवानी, चमरखन्ना से छिरका तक तकनीकी सहायक मो. आदिल की ड्यूटी लगाई गई है। मवइया, छिरका, नरायच, मदारपुर होते हुए छिमौली तक दिलीप शुक्ला को लगाया गया है। वहीं, छिमौली, परछा, गहरौली खुर्द, बम्हरौली, तिलसरस, खैरी से परेहटा तक तकनीकी सहायक इसरायल को रखा गया है। किसवाही, मौहर, धुंधपुर से कैथी तक तकनीकी सहायक मुकेश और ओमप्रकाश कार्य में गति देंगे।
महोबा जिला से आती है चंद्रावल नदी

चंद्रावल नदी जनपद महोबा से ग्राम गुढ़ा में प्रवेश करती है और हमीरपुर में 62 किलोमीटर प्रवाह क्षेत्र है। इसके बाद बांदा जनपद में केन नदी में जाकर समाहित हो जाती है। इस नदी की जलग्रहण क्षमता 990 वर्ग किलोमीटर की है। यह नदी जनपद हमीरपुर के 18 ग्रामों से गुजरती है जिसमें कई छोटे-बड़े नाले आकर मिलते है।
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बोले ग्रामीण


फोटो 17 एचएएमपी 14- श्यामबाबू।
80 के दशक में दिखाया था रौद्र रूप
मौदहा। बचपन में गांव के बीच 60-70 मीटर की चौड़ाई से जलधारा बहती थी। इस नदी के जल का उपयोग सभी ग्रामवासी करते थे। बुजुर्ग बताया करते थे कि 80 के दशक में इस नदी पर जलप्रलय जैसे हालात हो गए थे। मौदहा से बांदा को जोड़ने वाली मुख्य सड़क, कपसा मार्ग पर बना सिजनौड़ा पुल व कानपुर-बांदा रेलवे रूट पर इचौली के पास बना रेलवे पुल इसके वेग से बह गए थे। नगर से ग्रामीण क्षेत्रों का संपर्क टूट गया था और कई गांव बाढ़ के पानी में डूब गए थे। इसके पुनरुद्धार से क्षेत्र के लोगों को भारी लाभ होगा।
- श्यामबाबू, प्रधान बम्हरौली।


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फोटो 17 एचएएमपी 15- महेंद्र सिंह।
नदी में गिर रहे नालों पर भी लगे रोक

जब क्षेत्र में पेजयल की व्यवस्था बहुत अच्छी नहीं थी, तो आसपास के ग्रामीण इसी नदी के पानी का उपयोग किया करते थे। समय बीतता गया और नगर के बड़ेरी नाले का पानी नदी में गिराए जाने से इसका पानी दूषित हो गया। इससे अब यह पानी मवेशियों के पीने योग्य नहीं रहा है। इसके पुनरुद्धार के साथ नदी में गिरने वाले नालों को रोका जाए।

- महेंद्र सिंह, करहिया।


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फोटो 17 एचएएमपी 16- राजा।
गर्मियों के सीजन में टूट जाती जलधारा

नारायच-मदारपुर के बीच से निकली चंद्रावल नदी अपने समय पर विशाल नदियों में गिनी जाती थी। धीरे-धीरे नदी का पाट जलधारा के हिसाब से सिकुड़ता चला गया। गर्मियों के सीजन में जलधारा भी टूट जाती है। इससे पशु पक्षियों को बूंद-बूंद पानी के लिए भटकना पड़ता है। सरकार की यह अच्छी पहल है। - राजा, मदारपुर।
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