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Hamirpur News: मौदहा बांध के गेटों में आई तकनीकी खामी की मरम्मत आज से शुरू

Thu, 14 May 2026 11:44 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 14 May 2026 11:44 PM IST
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Repairs to the technical fault in the Maudaha Dam gates began today.
मौदाहा बांध पर जांच करती केंद्रीय टीम।  - फोटो : सिंचाई विभाग
हमीरपुर। मौदहा बांध के गेटों में आई तकनीकी खामी को दूर करने के लिए बांध से 127 अरब लीटर (मिलियन क्यूबिक मीटर) पानी छोड़ा गया है। बांध पूरी तरह खाली होने के बाद शुक्रवार से गेटों की मरम्मत का कार्य शुरू कराया जाएगा। वहीं, केंद्रीय मृदा एवं सामग्री अनुसंधानशाला दिल्ली की छह सदस्यीय टीम भी पहुंच चुकी है जो तकनीकी शोध और परीक्षण करेगी। इसके अलावा 24 व 25 मई को बांध सुरक्षा विशेषज्ञ समिति इसका निरीक्षण भी करेगी।
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मौदाहा बांध को 15 मई तक खाली करने की अनुमति पांच मई को मिली थी। बांध में कुल 127 एमसीएम पानी था। शासन से अनुमति मिलने के बाद बांध के गेट खोल दिए गए थे। पहले दिन 3200 क्यूसेक के हिसाब से पानी छोड़ा गया। इसके बाद 4000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। आठ दिन बीतने के बाद मौदहा बांध पूरी तरह से खाली हो गया है।
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बांध से पानी छोड़े जाने का सबसे ज्यादा असर बेतवा नदी के जलस्तर पर पड़ा है। यहां पानी बढ़ने से किनारे पर बारी लगाकर खेती करने वालों की मेहनत पानी में डूबी गई। माना जा रहा कि जब तक पानी उतरेगा पूरी फसल सड़ चुकी होगी। इधर, बांध खाली होने के बाद गेटों की मरम्मत का काम शुरू किया जाना है।
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मौदहा बांध के अधिशासी अधिकारी दिनेश कुमार ने बताया कि 13 मई को पूरा बांध खाली हो गया था और अब बेतवा का जलस्तर भी घटने लगा है। उन्होंने बताया कि सिंचाई विभाग के इंजीनियर शुक्रवार से गेटों की मरम्मत का कार्य शुरू करेंगे। वहीं, केंद्रीय मृदा एवं सामग्री अनुसंधानशाला दिल्ली के वैज्ञानिक डॉ. पी सेंथिल के नेतृत्व में छह सदस्यीय टीम भी आ चुकी है जो बांध का शोध कार्य करेंगे। कहा कि पानी इस हिसाब से छोड़ा गया कि नदी के बेड के ऊपर पानी नहीं आया है।

नदी की तलहटी से ज्यादा नहीं बढ़ा जलस्तर

मौदाहा बांध से पानी छोड़े जाने से बेतवा व यमुना नदी का जल स्तर मामूली रूप से बढ़ा था। पानी की वजह से नदी किनारे बारी डूब गई। मौदाहा से हमीरपुर संगम स्थल तक तकरीबन 200 किसान प्रभावित हुए। किसानों ने जिला प्रशासन से मुआवजा की मांग भी की। दूसरी तरफ मौदाहा बांध के अधिकारियों का कहना है कि नदी की तलहटी से अधिक पानी नहीं बढ़ा। किसानों से बातचीत कर उन्हें संतुष्ट किया गया। जो फसल डूबी थी वह बेड में बोई गई थी।

किसान बोले-नुकसान की भरपाई होनी चाहिए
शहर निवासी विमल निषाद का कहना है कि गर्मी में कभी भी बेतवा का जलस्तर नहीं बढ़ा। बांध का पानी छोड़ने से उनकी मेहनत पानी में डूब गई है। अगर बांध से पानी छोड़ा जाना था तो पहले से ही अवगत कराया होता तो बीज आदि में पैसा खर्च न होता। हमारे सामने भरण पोषण का संकट खड़ा हो गया है।


पुराने बेतवा घाट निवासी राजरानी का कहना है कि हम निषाद समाज के लोग नदी किनारे खरबूजा, तरबूज, खीरा, ककड़ी आदि की फसल करके अपना जीवन-यापन करते हैं। बेतवा में पानी बढ़ने से इस बार सब बर्बाद हो गया। यही हाल रहा तो परिवार के सामने खर्च का संकट खड़ा हो जाएगा। नुकसान की भरपाई होनी चाहिए।
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