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Hamirpur News: तीन माह से अंधेरे में डूबी साढ़े तीन हजार की आबादी
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फोटो 14 एचएएमपी 01- कनेरा व गलिहामऊ मजरे के टूटे पड़े बिजली के खंभे। संवाद
बिवांर (हमीरपुर)। विकासखंड मुस्करा क्षेत्र के गलिहामऊ और कनेरा मजरों में तीन माह से बिजली आपूर्ति ठप है। साढ़े तीन हजार की आबादी वाले इन मजरों में बिजली न आने से लोग अंधेरे में जीवन-यापन करने को मजबूर हैं। बीते तीन माह पूर्व यहां की बिजली लाइन बाढ़ की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हो गई थी।
कनेरा मजरे की आबादी करीब 600 और गलिहामऊ की लगभग 3,000 है। ग्रामीणों के अनुसार, यहां सरीला के ममना सब स्टेशन से बिजली की आपूर्ति होती है। विरमा नदी पार कर आने वाली लाइन अक्सर टूट जाती है। बीते 28 मई को तेज आंधी में लाइन के पांच खंभे टूट गए थे। विभाग की उदासीनता के चलते ग्रामीणों ने चंदा करके खंभे लगवाए थे। करीब तीन माह पहले मौसम की पहली तेज बारिश के दौरान बांध से पानी छोड़ा गया था। नदी में बाढ़ आने पर कई खंभे टूट गए थे और बिजली आपूर्ति ठप हो गई।
बीते 29 सितंबर को एसडीएम सरीला से मामले की शिकायत की गई। सात अक्तूबर को डीएम को भी मामले से अवगत कराया गया था। अभी तक कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई। ग्रामीणों ने जल्द बिजली व्यवस्था बहाल न होने पर धरना प्रदर्शन की चेतावनी दी है।
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बाढ़ में टूटे खंभे नहीं लगवाए गए
बीते तीन माह से गांव में बिजली नहीं आ रही है। बरसात में आई बाढ़ के दौरान बिजली पोल टूट गए थे, जो अभी तक नहीं लगाए गए हैं। पहले भी गांव वालों ने 15 हजार रुपये का चंदा करके पांच पोल लगवाए थे। - सुरेंद्र कुमार, कनेरा।
नवरात्र का पर्व चल रहा है। गांव में दुर्गा पंडाल सजाए गए हैं। जनरेटर रखकर बिजली की व्यवस्था की जा रही है। करीब छह पोल टूटे पड़े हैं। बिजली न आने से रात की नींद हराम है। मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है। - रामलखन, गलिहामऊ।
वर्जन:
बाढ़ के चलते लाइन क्षतिग्रस्त हो गई थी। अभी नदी में पानी भरा हुआ है। टीमें बराबर निरीक्षण कर रही हैं। एक-दो दिनों में बिजली आपूर्ति बहाल कराए जाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
-ज्ञानचंद्र यादव, अधीक्षण अभियंता विद्युत।
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कनेरा मजरे की आबादी करीब 600 और गलिहामऊ की लगभग 3,000 है। ग्रामीणों के अनुसार, यहां सरीला के ममना सब स्टेशन से बिजली की आपूर्ति होती है। विरमा नदी पार कर आने वाली लाइन अक्सर टूट जाती है। बीते 28 मई को तेज आंधी में लाइन के पांच खंभे टूट गए थे। विभाग की उदासीनता के चलते ग्रामीणों ने चंदा करके खंभे लगवाए थे। करीब तीन माह पहले मौसम की पहली तेज बारिश के दौरान बांध से पानी छोड़ा गया था। नदी में बाढ़ आने पर कई खंभे टूट गए थे और बिजली आपूर्ति ठप हो गई।
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बीते 29 सितंबर को एसडीएम सरीला से मामले की शिकायत की गई। सात अक्तूबर को डीएम को भी मामले से अवगत कराया गया था। अभी तक कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई। ग्रामीणों ने जल्द बिजली व्यवस्था बहाल न होने पर धरना प्रदर्शन की चेतावनी दी है।
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बाढ़ में टूटे खंभे नहीं लगवाए गए
बीते तीन माह से गांव में बिजली नहीं आ रही है। बरसात में आई बाढ़ के दौरान बिजली पोल टूट गए थे, जो अभी तक नहीं लगाए गए हैं। पहले भी गांव वालों ने 15 हजार रुपये का चंदा करके पांच पोल लगवाए थे। - सुरेंद्र कुमार, कनेरा।
नवरात्र का पर्व चल रहा है। गांव में दुर्गा पंडाल सजाए गए हैं। जनरेटर रखकर बिजली की व्यवस्था की जा रही है। करीब छह पोल टूटे पड़े हैं। बिजली न आने से रात की नींद हराम है। मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है। - रामलखन, गलिहामऊ।
वर्जन:
बाढ़ के चलते लाइन क्षतिग्रस्त हो गई थी। अभी नदी में पानी भरा हुआ है। टीमें बराबर निरीक्षण कर रही हैं। एक-दो दिनों में बिजली आपूर्ति बहाल कराए जाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
-ज्ञानचंद्र यादव, अधीक्षण अभियंता विद्युत।