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बारिश ने उपचुनाव के मतदान में डाला खलल
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हमीरपुर। यमुना व बेतवा नदियों की बाढ़ से जूझ रहे मतदाताओं को उपचुनाव के मतदान में बारिश से भी दो चार होना पड़ा, लेकिन कुदरत के यह अड़ंगे कुछ खास गुल नहीं खिला सके। अपना नया जनप्रतिनिधि चुनने के लिए विधानसभा क्षेत्र के लगभग 50 फीसदी मतदाता तमाम दुश्वारियों के बीच मतदान केंद्र पहुंचे।
पिछले एक सप्ताह से मुख्यालय व इससे सटे ग्रामीण इलाके यमुना व बेतवा नदियों की बाढ़ का ताडंव झेलते रहे। अभी भी बड़ी संख्या में बाढ़ पीड़ित वापस अपने घरों को नहीं पहुंच सके हैं। राहत शिविरों या खुले आसमान तले ऊंचे स्थानों पर शरण लिए हैं। इन्हीं कठिन परिस्थितियों के बीच सोमवार को मतदान हुआ। तड़के से ही शुरू हुआ चौतरफा बारिश का सिलसिला पूरे दिन जारी रहा।
विधानसभा क्षेत्र के 50 फीसदी मतदाताओं ने मौसम की इस मार को मात देकर मतदान किया। उन्हें बारिश में तरबतर होकर कीचड़ भरे रास्तों से गुजरना पड़ा। बीमारों, बूढ़ों व महिलाओं को ज्यादा असुविधा हुई। तमाम मतदाताओं ने छाते का सहारा लिया। संसाधन विहीन गरीब तबके मतदाता भीगते हुए मतदान केंद्रों पर पहुंचे। उधर मौसम के इन हालात को देखकर चुनावी जानकारों का कयास है कि उच्च घरानों के मतदाताओं के वोट न डालने से कुछ दलों को नुकसान हो सकता है। इन दलों के प्रत्याशी और समर्थकों तथा पार्टी कार्यकर्ताओं के चेहरे पर यह चिंता झलकने लगी है।
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तटबंध नहीं तो वोट नहीं
हमीरपुर। बाढ़ प्रभावित शहर के मेरापुर भिलांवा मोहल्ले के मतदाताओं ने सुबह से ही एकजुट होकर मतदान बहिष्कार कर दिया। यहां के मतदाताओं का गुस्सा इस बात पर था उनका इलाका यमुना और बेतवा नदी की कटान में लगातार समा रहा है। जनप्रतिनिधियों से आरजू मिन्नत के बाद भी सुनवाई नहीं हो रही है। खबर मिलते ही एसडीएम राजेश चौरसिया यहां पहुंचे। साथ ही कांग्रेस, भाजपा प्रत्याशी भी पहुंचे। सभी ने मतदाताओं को मनाने की कोशिश में नाकाम रहे। बूथ संख्या 121 में एक भी वोट नहीं पड़ा। अलबत्ता बूथ 122 में मात्र एक व बूथ संख्या 123 में कुल चार वोट पड़े। सुभाष मेरापुरी, रामप्रकाश, सचिन सविता, रामबाबू, महेश सहित अन्य ने बताया कि तटबंध बनाने की मांग कई सालों से की जा रही है जिसे पूरा नहीं किया गया है। इसे गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।
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सड़क को लेकर कई गांवों में मतदान बहिष्कार
कुरारा विकासखंड के ककरऊ, लहरा, खरेहटा, गुजौरा में मतदान का बहिष्कार किया गया। लहरा में मात्र तीन वोट पड़े। वहीं सिकरोढ़ी के ग्रामीणों ने भी मतदान का बहिष्कार किया। ग्रामीणों ने मतदान बहिष्कार के बैनर लगाकर नारेबाजी की। ग्रामीणों ने कहा कि बेरी तक खराब सड़क को बनवाने के लिए कई बार फरियाद की है, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ है। एसडीएम सदर और सीओ मौके पर पहुंच ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया। मगर ग्रामीण अपनी जिद पर अड़े रहे।
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मोबाइल से ईवीएम की फोटो लेकर की वायरल
उपचुनाव के मतदान में भाजपा कार्यकर्ताओं ने आचार संहिता का जमकर उल्लंघन किया। कई कार्यकर्ताओं ने बूथ के अंदर वोट डालते समय की ईवीएम की फोटो ली और उसे सोशल मीडिया में वायरल कर दिया। जबकि बूथ के मुख्य गेट पर ड्यूटी कर रहे अर्द्धसैनिक बल के जवान मतदाताओं को मोबाइल अंदर न ले जाने की हिदायत देते रहे। इसके बावजूद लोग चोरी छिपे मोबाइल ले जाने में सफल रहे।
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पिछले एक सप्ताह से मुख्यालय व इससे सटे ग्रामीण इलाके यमुना व बेतवा नदियों की बाढ़ का ताडंव झेलते रहे। अभी भी बड़ी संख्या में बाढ़ पीड़ित वापस अपने घरों को नहीं पहुंच सके हैं। राहत शिविरों या खुले आसमान तले ऊंचे स्थानों पर शरण लिए हैं। इन्हीं कठिन परिस्थितियों के बीच सोमवार को मतदान हुआ। तड़के से ही शुरू हुआ चौतरफा बारिश का सिलसिला पूरे दिन जारी रहा।
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विधानसभा क्षेत्र के 50 फीसदी मतदाताओं ने मौसम की इस मार को मात देकर मतदान किया। उन्हें बारिश में तरबतर होकर कीचड़ भरे रास्तों से गुजरना पड़ा। बीमारों, बूढ़ों व महिलाओं को ज्यादा असुविधा हुई। तमाम मतदाताओं ने छाते का सहारा लिया। संसाधन विहीन गरीब तबके मतदाता भीगते हुए मतदान केंद्रों पर पहुंचे। उधर मौसम के इन हालात को देखकर चुनावी जानकारों का कयास है कि उच्च घरानों के मतदाताओं के वोट न डालने से कुछ दलों को नुकसान हो सकता है। इन दलों के प्रत्याशी और समर्थकों तथा पार्टी कार्यकर्ताओं के चेहरे पर यह चिंता झलकने लगी है।
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तटबंध नहीं तो वोट नहीं
हमीरपुर। बाढ़ प्रभावित शहर के मेरापुर भिलांवा मोहल्ले के मतदाताओं ने सुबह से ही एकजुट होकर मतदान बहिष्कार कर दिया। यहां के मतदाताओं का गुस्सा इस बात पर था उनका इलाका यमुना और बेतवा नदी की कटान में लगातार समा रहा है। जनप्रतिनिधियों से आरजू मिन्नत के बाद भी सुनवाई नहीं हो रही है। खबर मिलते ही एसडीएम राजेश चौरसिया यहां पहुंचे। साथ ही कांग्रेस, भाजपा प्रत्याशी भी पहुंचे। सभी ने मतदाताओं को मनाने की कोशिश में नाकाम रहे। बूथ संख्या 121 में एक भी वोट नहीं पड़ा। अलबत्ता बूथ 122 में मात्र एक व बूथ संख्या 123 में कुल चार वोट पड़े। सुभाष मेरापुरी, रामप्रकाश, सचिन सविता, रामबाबू, महेश सहित अन्य ने बताया कि तटबंध बनाने की मांग कई सालों से की जा रही है जिसे पूरा नहीं किया गया है। इसे गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।
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सड़क को लेकर कई गांवों में मतदान बहिष्कार
कुरारा विकासखंड के ककरऊ, लहरा, खरेहटा, गुजौरा में मतदान का बहिष्कार किया गया। लहरा में मात्र तीन वोट पड़े। वहीं सिकरोढ़ी के ग्रामीणों ने भी मतदान का बहिष्कार किया। ग्रामीणों ने मतदान बहिष्कार के बैनर लगाकर नारेबाजी की। ग्रामीणों ने कहा कि बेरी तक खराब सड़क को बनवाने के लिए कई बार फरियाद की है, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ है। एसडीएम सदर और सीओ मौके पर पहुंच ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया। मगर ग्रामीण अपनी जिद पर अड़े रहे।
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मोबाइल से ईवीएम की फोटो लेकर की वायरल
उपचुनाव के मतदान में भाजपा कार्यकर्ताओं ने आचार संहिता का जमकर उल्लंघन किया। कई कार्यकर्ताओं ने बूथ के अंदर वोट डालते समय की ईवीएम की फोटो ली और उसे सोशल मीडिया में वायरल कर दिया। जबकि बूथ के मुख्य गेट पर ड्यूटी कर रहे अर्द्धसैनिक बल के जवान मतदाताओं को मोबाइल अंदर न ले जाने की हिदायत देते रहे। इसके बावजूद लोग चोरी छिपे मोबाइल ले जाने में सफल रहे।