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घरों के बाहर चिपकाए गए नाग देवता के चित्र
ब्यूरो अमर उजाला, हमीरपुर
Updated Mon, 08 Aug 2016 12:22 AM IST
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बिदोखर गांव में नाग पंचमी के पोस्टर चिपकाता चौकीदार।
- फोटो : अमर उजाला
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आधुुनिकता की चकाचौंध में शहरों में भले ही परंपराओं का तरीका बदल गया हो। लेकिन गांवों में आज भी लोग श्रद्धा और आस्था के साथ परंपरा का निर्वहन कर रहे हैं। तभी तो आज भी गांवों में नागपंचमी के दिन घरों के बाहर नाग देवता का छायाचित्र चिपकाने की परंपरा जारी है। साथ ही महिलाएं अपने दरवाजाें पर गाय के गोबर से नागचित्र बनाने की परंपरा निभा रही हैं।
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नाग पंचमी का पर्व पूरे देश में धूमधाम से मनाया गया। सभी जगहों पर इसे अलग-अलग ढंग से मनाने की परंपरा है। बुंदेलखंड में घरों के बाहर गाय के गोबर से नाग के छायाचित्र बनाकर पूजने की परंपरा अभी भी जारी है। इसी के साथ गांव के चौकीदारों व लेखपालों द्वारा घर-घर जाकर नागदेवता के छाया चित्र चिपकाने की परंपरा कायम है।
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नाग पंचमी पर सुबह से ही गांव का चौकीदार नाग देवता के पोस्टर लेकर गांव में निकलता है और प्रत्येक दरवाजे पर एक चित्र चिपका देता है। बदले में ग्रामीण चौकीदार को अनाज या रुपये देकर विदा करते हैं। मान्यता है कि जिस घर में नागदेवता का यह छायाचित्र चिपका होता है। उस घर में अनिष्ठ नहीं होता है।
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शाम के समय बुंदेलखंड के इस क्षेत्र में लोग आंगन में बरगद के पत्तों का दोना बनाकर दूध रखते हैं। लोगों का मानना है कि रात में नाग देवता आकर इस दूध का सेवन करते हैं और बदले में उस घर में रहने वाले लोगों की सुख समृद्धि की कामना करते हैं। नाग पंचमी पर यह परंपरा आज भी गांवों में बदस्तूर जारी है।
कस्बे के भोला तिवारी बताते हैं कि पूर्व में कस्बे में इस तरह की परंपरा विद्यमान थी। लेकिन आधुनिकता की चकाचौंध में अब यह गुम हो गई है। वहीं बिदोखर गांव निवासी राजकुमार द्विवेदी का कहना है कि गांवों में आज भी परंपराओं के हिसाब से त्योहार व पर्व मनाए जाते हैं और लोग श्रद्धा और उमंग के साथ इन परंपराओं को जीवंत रखे हैं।