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Hamirpur News: हत्यारोपी हिस्ट्रीशीटर की किडनी की बीमारी से मौत
Tue, 03 Jun 2025 11:26 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
Updated Tue, 03 Jun 2025 11:26 PM IST
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हमीरपुर। हत्या के आरोप में जिला कारागार में निरुद्ध हत्यारोपी हिस्ट्रीशीटर की मंगलवार शाम पीजीआई लखनऊ में मौत हो गई। किडनी की बीमारी के चलते उसे पहले कानपुर हैलट व बाद में लखनऊ पीजीआई में भर्ती कराया गया। उस पर भाई के अंगरक्षक की हत्या का आरोप था।
सुमेरपुर कस्बे में सात जनवरी को भाइयों के बीच जमीन के विवाद में जमकर फायरिंग हुई। इसमें सुमेरपुर निवासी राहुल पॉलीवाल केे निजी अंगरक्षक बांदा जनपद के जसपुरा थानांतर्गत नर्जिता निवासी फूल सिंह प्रजापति की मौत हो गई थी। इसमें आरोपी डॉ. आलोक पॉलीवाल समेत अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया। आलोक को पुलिस ने जनवरी माह में गिरफ्तार कर जेल भेजा। तब से वह जिला कारागार में निरुद्ध था। जेल अधीक्षक मंजीव विश्वकर्मा ने बताया कि बंदी ने 2021 में किडनी ट्रांसप्लांट कराया था। इसके बाद वह इंफेक्शन को लेकर परेशान था। जिला अस्पताल से उसे इलाज के लिए 19 मई को कानपुर हैलट भेजा गया। जहां सुधार न होने पर पीजीआई लखनऊ 26 मई को भेजा गया। परिजनों से प्राप्त जानकारी के अनुसार बीते दो दिन से वह आईसीयू में था। मंगलवार शाम करीब चार बजे चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
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रसूखदार परिवारों में शामिल है पालीवाल घराना
- भाइयों के मध्य हुए विवाद में जेल में था आलोक
भरुआ सुमेरपुर। आनंदी प्रसाद पालीवाल कस्बे के रसूखदार घरानों में गिने जाते रहे हैं। यह तीन बार कस्बे के अध्यक्ष रहे। उनकी बहू जिला पंचायत सदस्य रह चुकी है। आलोक पालीवाल क्षेत्र पंचायत सदस्य रहे हैं। राहुल चंद्रपुरवा बुजुर्ग के प्रधान रहे हैं। यह घराना जमींदारों का रहा है। चंदपुरवा बुजुर्ग के मजरा इटरा में इनकी जमीदारी रही है। आनंदी प्रसाद पालीवाल की मौत के बाद उनके पुत्रों में संपत्ति बंटवारे का विवाद उत्पन्न हो गया। एक पक्ष में राहुल है। अन्य सभी भाई आलोक पालीवाल के साथ है। बीते सात जनवरी को इटरा में खेत में पानी लगाने को लेकर दोनों भाइयों के मध्य हुई गोलीबारी में राहुल के गनर फूल सिंह प्रजापति की मौत हो गई थी और राहुल के साथ उसका पुत्र गोली लगने से घायल हुए थे। पुलिस ने राहुल की तहरीर पर आलोक पालीवाल, पुनीत पालीवाल, संजय पालीवाल,अजय पालीवाल व इस्लाम खान के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज की थी। पुलिस ने आलोक पालीवाल, पुनीत पालीवाल, इस्लाम खान, संजय पालीवाल को जेल भेजा था। विवेचना में अजय पालीवाल की घटना स्थल पर मौजूदगी के साक्ष्य नहीं पाए गए थे। इस वजह से उनकी गिरफ्तारी नहीं हुई थी। एक पखवाड़े पूर्व इस्लाम खान की जमानत हो गई थी। अन्य सभी जेल में बंद है। जेल में ही आलोक की तबीयत बिगड़ी और उन्हें जेल प्रशासन ने गंभीर हालत में पीजीआई में भर्ती कराया था।
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आपराधिक इतिहास एक नजर में
भरुआ सुमेरपुर। आलोक पालीवाल थाने का हिस्ट्रीशीटर अपराधी था। इसके खिलाफ हत्या सहित 22 मुकदमे दर्ज है। इसकी हिस्ट्रीशीट संख्या 58 ए है।
पहला मुकदमा 1998 में मारपीट का दर्ज हुआ था। इसी वर्ष दो और मुकदमे हुए। वर्ष 2000 में डकैती का मुकदमा दर्ज हुआ। इसी वर्ष गुंडा एक्ट भी लगाया गया। वर्ष 2002 में लोक सेवक पर हमले करने का रिपोर्ट दर्ज हुई थी। वर्ष 2003 में धन उगाही, गुंडा एक्ट,हत्या एवं आर्म्स एक्ट दर्ज हुआ था। इसके बाद गैंगस्टर लगाया गया। वर्ष 2004 में जानलेवा हमला,वर्ष 2006 में गाली गलौज एवं मारपीट का मुकदमा दर्ज हुआ। 2007 में बलवा, हत्या का प्रयास का मुकदमा दर्ज हुआ। इसी वर्ष हत्या, हत्या की साजिश का मुकदमा दर्ज हुआ। वर्ष 2008 में एनएसए की कार्यवाही हुई थी। 2010 में दलित उत्पीड़न,वर्ष 2011 में मारपीट का मुकदमा होने के साथ गुंडा एक्ट की कार्यवाही हुई थी। वर्ष 2022 में सरकारी कार्य में बाधा डालने एवं पुनः गैंगस्टर एक्ट कार्रवाई हुई। वर्ष 2025 में जनवरी माह में हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ। इसी मुकदमे में यह जेल में निरुद्ध थे। उसे दौरान इनकी मौत हो गई।
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सुमेरपुर कस्बे में सात जनवरी को भाइयों के बीच जमीन के विवाद में जमकर फायरिंग हुई। इसमें सुमेरपुर निवासी राहुल पॉलीवाल केे निजी अंगरक्षक बांदा जनपद के जसपुरा थानांतर्गत नर्जिता निवासी फूल सिंह प्रजापति की मौत हो गई थी। इसमें आरोपी डॉ. आलोक पॉलीवाल समेत अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया। आलोक को पुलिस ने जनवरी माह में गिरफ्तार कर जेल भेजा। तब से वह जिला कारागार में निरुद्ध था। जेल अधीक्षक मंजीव विश्वकर्मा ने बताया कि बंदी ने 2021 में किडनी ट्रांसप्लांट कराया था। इसके बाद वह इंफेक्शन को लेकर परेशान था। जिला अस्पताल से उसे इलाज के लिए 19 मई को कानपुर हैलट भेजा गया। जहां सुधार न होने पर पीजीआई लखनऊ 26 मई को भेजा गया। परिजनों से प्राप्त जानकारी के अनुसार बीते दो दिन से वह आईसीयू में था। मंगलवार शाम करीब चार बजे चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
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रसूखदार परिवारों में शामिल है पालीवाल घराना
- भाइयों के मध्य हुए विवाद में जेल में था आलोक
भरुआ सुमेरपुर। आनंदी प्रसाद पालीवाल कस्बे के रसूखदार घरानों में गिने जाते रहे हैं। यह तीन बार कस्बे के अध्यक्ष रहे। उनकी बहू जिला पंचायत सदस्य रह चुकी है। आलोक पालीवाल क्षेत्र पंचायत सदस्य रहे हैं। राहुल चंद्रपुरवा बुजुर्ग के प्रधान रहे हैं। यह घराना जमींदारों का रहा है। चंदपुरवा बुजुर्ग के मजरा इटरा में इनकी जमीदारी रही है। आनंदी प्रसाद पालीवाल की मौत के बाद उनके पुत्रों में संपत्ति बंटवारे का विवाद उत्पन्न हो गया। एक पक्ष में राहुल है। अन्य सभी भाई आलोक पालीवाल के साथ है। बीते सात जनवरी को इटरा में खेत में पानी लगाने को लेकर दोनों भाइयों के मध्य हुई गोलीबारी में राहुल के गनर फूल सिंह प्रजापति की मौत हो गई थी और राहुल के साथ उसका पुत्र गोली लगने से घायल हुए थे। पुलिस ने राहुल की तहरीर पर आलोक पालीवाल, पुनीत पालीवाल, संजय पालीवाल,अजय पालीवाल व इस्लाम खान के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज की थी। पुलिस ने आलोक पालीवाल, पुनीत पालीवाल, इस्लाम खान, संजय पालीवाल को जेल भेजा था। विवेचना में अजय पालीवाल की घटना स्थल पर मौजूदगी के साक्ष्य नहीं पाए गए थे। इस वजह से उनकी गिरफ्तारी नहीं हुई थी। एक पखवाड़े पूर्व इस्लाम खान की जमानत हो गई थी। अन्य सभी जेल में बंद है। जेल में ही आलोक की तबीयत बिगड़ी और उन्हें जेल प्रशासन ने गंभीर हालत में पीजीआई में भर्ती कराया था।
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आपराधिक इतिहास एक नजर में
भरुआ सुमेरपुर। आलोक पालीवाल थाने का हिस्ट्रीशीटर अपराधी था। इसके खिलाफ हत्या सहित 22 मुकदमे दर्ज है। इसकी हिस्ट्रीशीट संख्या 58 ए है।
पहला मुकदमा 1998 में मारपीट का दर्ज हुआ था। इसी वर्ष दो और मुकदमे हुए। वर्ष 2000 में डकैती का मुकदमा दर्ज हुआ। इसी वर्ष गुंडा एक्ट भी लगाया गया। वर्ष 2002 में लोक सेवक पर हमले करने का रिपोर्ट दर्ज हुई थी। वर्ष 2003 में धन उगाही, गुंडा एक्ट,हत्या एवं आर्म्स एक्ट दर्ज हुआ था। इसके बाद गैंगस्टर लगाया गया। वर्ष 2004 में जानलेवा हमला,वर्ष 2006 में गाली गलौज एवं मारपीट का मुकदमा दर्ज हुआ। 2007 में बलवा, हत्या का प्रयास का मुकदमा दर्ज हुआ। इसी वर्ष हत्या, हत्या की साजिश का मुकदमा दर्ज हुआ। वर्ष 2008 में एनएसए की कार्यवाही हुई थी। 2010 में दलित उत्पीड़न,वर्ष 2011 में मारपीट का मुकदमा होने के साथ गुंडा एक्ट की कार्यवाही हुई थी। वर्ष 2022 में सरकारी कार्य में बाधा डालने एवं पुनः गैंगस्टर एक्ट कार्रवाई हुई। वर्ष 2025 में जनवरी माह में हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ। इसी मुकदमे में यह जेल में निरुद्ध थे। उसे दौरान इनकी मौत हो गई।