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हमीरपुर से चंदेल तो राठ से मनीषा पर दांव
अमर उजाला ब्यूरो, हमीरपुर
Updated Sun, 22 Jan 2017 10:53 PM IST
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अशोक सिंह चंदेल।
- फोटो : अमर उजाला
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भारतीय जनता पार्टी ने दोनों विधान सभा क्षेत्रों में उम्मीदवार उतार दिए हैं। सदर सीट से अशोक सिंह चंदेल और राठ से मनीषा अनुरागी पर दांव लगाया है। चंदेल सांसद रह चुके हैं तो मनीषा पालिका का पिछला चुनाव हार चुकी है। दोनों की पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से अच्छी पकड़ बताई जाती है।
ऐन मौके पर बाजी मारी
हमीरपुर सदर से भाजपा उम्मीदवार बने अशोक सिंह चंदेल ऐन मौके पर बाजी मारने में कामयाब रहे। वह अक्तूबर 2015 में भाजपा में शामिल हुए थे। चंदेल ने राजनीतिक शुरुआत 1989 में निर्दलीय चुनाव जीतकर की थी। वह वर्ष1993 व 2007 में विधायक चुने गए। इसी बीच वह बसपा से सांसद बने, लेकिन अक्टूबर 2015 में भाजपा का दामन थाम लिया था और टिकट हासिल करने में कामयाब रहे।
राठ विधानसभा क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार बनीं मनीषा जातीय समीकरण के साथ ही महिला समीकरण से टिकट हासिल करने में कामयाब रही। वर्ष 2012 में वह पालिका का चुनाव हार चुकी है। विधान सभा चुनाव वह पहली बार लड़ रही है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का आशीर्वाद होने के साथ ही क्षेत्र में निरंतर सक्रियता उन्हें टिकट हासिल करने में सहारा बना।
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सपा ने विधायक के बेटे को बनाया प्रत्याशी
सदर विधानसभा से सपा ने अपना प्रत्याशी बदल दिया है। रविवार को प्रत्याशियों की जारी सूची में हाईकमान ने मनोज प्रजापति को प्रत्याशी घोषित किया है। वह सदर विधायक शिवचरन प्रजापति के पुत्र हैं। सदर विधायक शिवचरन प्रजापति वर्ष 1991 में पहली बार बसपा के टिकट पर विधायक चुने गए थे। वह बसपा सरकार में दो बार मंत्री भी रह चुके हैं। वर्ष 2014 में सदर विधानसभा में हुए उप चुनाव में भी उन्होंने जीत कराई। प्रत्याशियों के टिकट के दौरान विधायक अपने बेटे मनोज को टिकट दिलाने की वकालत कर चुके हैं।
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ऐन मौके पर बाजी मारी
हमीरपुर सदर से भाजपा उम्मीदवार बने अशोक सिंह चंदेल ऐन मौके पर बाजी मारने में कामयाब रहे। वह अक्तूबर 2015 में भाजपा में शामिल हुए थे। चंदेल ने राजनीतिक शुरुआत 1989 में निर्दलीय चुनाव जीतकर की थी। वह वर्ष1993 व 2007 में विधायक चुने गए। इसी बीच वह बसपा से सांसद बने, लेकिन अक्टूबर 2015 में भाजपा का दामन थाम लिया था और टिकट हासिल करने में कामयाब रहे।
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राठ विधानसभा क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार बनीं मनीषा जातीय समीकरण के साथ ही महिला समीकरण से टिकट हासिल करने में कामयाब रही। वर्ष 2012 में वह पालिका का चुनाव हार चुकी है। विधान सभा चुनाव वह पहली बार लड़ रही है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का आशीर्वाद होने के साथ ही क्षेत्र में निरंतर सक्रियता उन्हें टिकट हासिल करने में सहारा बना।
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सपा ने विधायक के बेटे को बनाया प्रत्याशी
सदर विधानसभा से सपा ने अपना प्रत्याशी बदल दिया है। रविवार को प्रत्याशियों की जारी सूची में हाईकमान ने मनोज प्रजापति को प्रत्याशी घोषित किया है। वह सदर विधायक शिवचरन प्रजापति के पुत्र हैं। सदर विधायक शिवचरन प्रजापति वर्ष 1991 में पहली बार बसपा के टिकट पर विधायक चुने गए थे। वह बसपा सरकार में दो बार मंत्री भी रह चुके हैं। वर्ष 2014 में सदर विधानसभा में हुए उप चुनाव में भी उन्होंने जीत कराई। प्रत्याशियों के टिकट के दौरान विधायक अपने बेटे मनोज को टिकट दिलाने की वकालत कर चुके हैं।