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गिरे घरों में कीचड़- मलबा, कैसे खड़ी करें दीवारें
अमर उजाला ब्यूरो, हमीरपुर
Updated Sat, 03 Sep 2016 11:48 PM IST
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छानी गांव में बाढ़ से गिरे मकान का मलबा हटाकर सामान ढुंढते पीड़ित
- फोटो : अमर उजाला
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पिछले दिनों हुई मूसलाधार बारिश में आई बाढ़ सेे छानी बुजुर्ग व इससे जुड़े छानी खुर्द गांवों में सैकड़ों लोग बेघर हो चुके हैं। ऐसे लोग सिर छिपाने के लिए दूसरों के घरों में डेरा डाले हैं या फिर प्राथमिक स्कूल व पंचायत घर को अपना आशियाना बनाए हैं। रहने का ठौर न होने से कुछ लोगों ने अपने बच्चों को ननिहाल या किसी दूसरे रिश्तेदारों के यहां भेज दिया है। कई लोगों के घरों में कीचड़ भरा होने से वे गिरी कच्ची दीवारों को दुबारा नहीं खड़ा कर पा रहे हैं। वहीं परिषदीय स्कूल में ठहरे लोगों को टीचर जगह खाली करने को कह रहे हैं।
गांव में चाराें ओर फैली गंदगी व कीचड़ से संक्रामक बीमारियां फैल रही हैं। स्वास्थ्य विभाग ने एक दिन कैंप लगाकर रस्म अदायगी की और स्लाइडें बर्नाइं लेकिन जांच में क्या निकला मरीजों को अभी तक नहीं बताया गया है। छानी गांव में निचली बस्तियां जलमग्न होने से लोगों के घर पानी में डूबे रहे। इससे दोनों गांवों के करीब 170 घर गिर गए। पानी निकासी के लिए बने नालों पर अतिक्रमण होने से यह समस्या हुई। बुजुर्ग कहते हैं कि कभी उन्होंने गांव में ऐसी आपदा नहीं देखी है। पहली बार बाढ़ के हालात पैदा होने पर गांव के अंदर नाव चलानी पड़ी। गांव के कोटेदार के गोदाम में पानी भरने से सैकड़ाें क्विंटल खाद्यान्न भीग गया। सिर्फ प्रधानों ने जितना बन पड़ा लोगों की मदद की लेकिन प्रशासन की ओर से अभी तक मदद नहीं मिली है। इधर प्रधानों ने गरीबों की सेवा करने से हाथ खींच लिए हैं। केवल लेखपाल ने गिरे मकानों की क्षति का सर्वे किया है। हालात यह है कि लोग दूसरों से मांग कर भोजन की व्यवस्था रहे हैं। दोनों गांवों में बाढ़ से बर्बाद हुए परिवारों की पड़ताल करती एक रिपोर्ट-
गांव निवासी अनिल कुमार अपने परिवार के साथ गांव के स्कूल में डेरा डाले हुए हैं। बताया कि उसका नौ सदस्यों का परिवार है। बारिश में जलभराव वह तो बर्बाद हो चुका है। उसने कहा कि प्रधान की ओर से पांच दिन खाना मिला था। अब वह मांगकर अपने बच्चों को खिला रहा है। अब उसे स्कूल से भी हटाया जा रहा है। अभी भी उसके घर में कीचड़ भरा हुआ है।
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रहुनियां तालाब के किनारे रहने वाले महेश्वरीदीन उर्फ मुल्लू ने बताया कि उसके दो कच्चे कमरे थे। रात में अचानक पानी भर गया। एक में वह लेटा था और दूसरे में जानवर बंधे थे। अचानक घर भरभराने लगा। उसके जानवर दब गए। तब से वह गांव के एक गेस्ट हाउस में शरण लिए हैं और कर्ज लेकर परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं। प्रशासन से कोई मदद नहीं मिली।
छानी खुर्द के हरदौल लाला पुरानी बाजार में रहने वाली रहमनियां अपने गिरे घर में दबे सामान को निकालते मिली। उसने बताया कि उसकी मदद किसी ने नहीं की है। प्रधान ने खाना बनवाया लेकिन उ,को नहीं मिला। दो दिनों तक भूखे रहे। फिर बिरादरी के लोगों ने खाना मुहैया कराया। उन्हीं के यहां डेरा डाले हैं। वहां से भी कब हटना न पड़ जाए। इसी चिंता में परेशान हैं।
ग्राम प्रधान प्रतिनिधि हरगोविंद प्रजापति ने बताया कि छानी खुर्द गांव में करीब 70 लोगों के मकान जमींदोज हो चुके हैं। कहा कि जो भी हो सका लोगों की मदद की है। लेकिन प्रशासन की ओर से कोई सहयोग नहीं मिला है। इसी प्रकार छानीबुजुर्ग के प्रधान प्रतिनिधि बाबू यादव ने बताया कि उनके गांव में करीब 100 परिवार के लोग मकान गिरने से बेघर हो गए हैं। अब उनके परिवार भुखमरी से जूझ रहे हैं, प्रशासन मौन बैठा हुआ है।
लेखपालों की हड़ताल से राजस्व विभाग जलभराव से गिरे मकानों का सर्वे पूरा नहीं कर पाया है। हड़ताल खिंचने से परेशानी आ रही है। छानी गांव में मकानों के गिरने से लोगों का भारी नुकसान हुआ है। इसके लिए नायब तहसीलदार के जरिए सर्वे कार्य कराया जा रहा है।
- सालिगराम, तहसीलदार सदर
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गांव में चाराें ओर फैली गंदगी व कीचड़ से संक्रामक बीमारियां फैल रही हैं। स्वास्थ्य विभाग ने एक दिन कैंप लगाकर रस्म अदायगी की और स्लाइडें बर्नाइं लेकिन जांच में क्या निकला मरीजों को अभी तक नहीं बताया गया है। छानी गांव में निचली बस्तियां जलमग्न होने से लोगों के घर पानी में डूबे रहे। इससे दोनों गांवों के करीब 170 घर गिर गए। पानी निकासी के लिए बने नालों पर अतिक्रमण होने से यह समस्या हुई। बुजुर्ग कहते हैं कि कभी उन्होंने गांव में ऐसी आपदा नहीं देखी है। पहली बार बाढ़ के हालात पैदा होने पर गांव के अंदर नाव चलानी पड़ी। गांव के कोटेदार के गोदाम में पानी भरने से सैकड़ाें क्विंटल खाद्यान्न भीग गया। सिर्फ प्रधानों ने जितना बन पड़ा लोगों की मदद की लेकिन प्रशासन की ओर से अभी तक मदद नहीं मिली है। इधर प्रधानों ने गरीबों की सेवा करने से हाथ खींच लिए हैं। केवल लेखपाल ने गिरे मकानों की क्षति का सर्वे किया है। हालात यह है कि लोग दूसरों से मांग कर भोजन की व्यवस्था रहे हैं। दोनों गांवों में बाढ़ से बर्बाद हुए परिवारों की पड़ताल करती एक रिपोर्ट-
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गांव निवासी अनिल कुमार अपने परिवार के साथ गांव के स्कूल में डेरा डाले हुए हैं। बताया कि उसका नौ सदस्यों का परिवार है। बारिश में जलभराव वह तो बर्बाद हो चुका है। उसने कहा कि प्रधान की ओर से पांच दिन खाना मिला था। अब वह मांगकर अपने बच्चों को खिला रहा है। अब उसे स्कूल से भी हटाया जा रहा है। अभी भी उसके घर में कीचड़ भरा हुआ है।
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रहुनियां तालाब के किनारे रहने वाले महेश्वरीदीन उर्फ मुल्लू ने बताया कि उसके दो कच्चे कमरे थे। रात में अचानक पानी भर गया। एक में वह लेटा था और दूसरे में जानवर बंधे थे। अचानक घर भरभराने लगा। उसके जानवर दब गए। तब से वह गांव के एक गेस्ट हाउस में शरण लिए हैं और कर्ज लेकर परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं। प्रशासन से कोई मदद नहीं मिली।
छानी खुर्द के हरदौल लाला पुरानी बाजार में रहने वाली रहमनियां अपने गिरे घर में दबे सामान को निकालते मिली। उसने बताया कि उसकी मदद किसी ने नहीं की है। प्रधान ने खाना बनवाया लेकिन उ,को नहीं मिला। दो दिनों तक भूखे रहे। फिर बिरादरी के लोगों ने खाना मुहैया कराया। उन्हीं के यहां डेरा डाले हैं। वहां से भी कब हटना न पड़ जाए। इसी चिंता में परेशान हैं।
ग्राम प्रधान प्रतिनिधि हरगोविंद प्रजापति ने बताया कि छानी खुर्द गांव में करीब 70 लोगों के मकान जमींदोज हो चुके हैं। कहा कि जो भी हो सका लोगों की मदद की है। लेकिन प्रशासन की ओर से कोई सहयोग नहीं मिला है। इसी प्रकार छानीबुजुर्ग के प्रधान प्रतिनिधि बाबू यादव ने बताया कि उनके गांव में करीब 100 परिवार के लोग मकान गिरने से बेघर हो गए हैं। अब उनके परिवार भुखमरी से जूझ रहे हैं, प्रशासन मौन बैठा हुआ है।
लेखपालों की हड़ताल से राजस्व विभाग जलभराव से गिरे मकानों का सर्वे पूरा नहीं कर पाया है। हड़ताल खिंचने से परेशानी आ रही है। छानी गांव में मकानों के गिरने से लोगों का भारी नुकसान हुआ है। इसके लिए नायब तहसीलदार के जरिए सर्वे कार्य कराया जा रहा है।
- सालिगराम, तहसीलदार सदर