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कभी रियासत रहा जिगनी स्टेट एक सड़क को मोहताज
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राठ (हमीरपुर)। जिस जिगनी गांव के लोगों ने रविवार को मतदान में वोट नहीं डाले, वह गांव कभी रियासत की राजधानी रहा है। रियासत के राजा का गहन इसी गांव में था, हर सुविधा इस गांव में मौजूद थे। किंतु आज की सियासत में कभी रियासत रहे गांव की सड़क नहीं बन पा रही है। गांव की नौ किलोमीटर सड़क उखड़ी होने से लोगों को आवागमन में दिक्कत होती है।
1950 तक जिगनी रियासत थी। राजा का महल इसी गांव में था। उरई रोड से गांव को जोड़ने के लिए 1996 में सड़क बनवाई गई थी। 25 साल से सड़क की मरम्मत नहीं कराई गई है। बालू लदे ट्रक निकलने से सड़क पूरी तरह उखड़ गई है। सड़क की समस्या ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों से लेकर अधिकारियों तक बताई लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई। इससे रविवार को एक भी ग्रामीण ने विधानसभा चुनाव के लिए वोट नहीं डाला।
लोनिवि के अधिशासी अभियंता एमएल वर्मा ने बताया कि चुनाव के पहले सड़क के गड्ढे भराए गए थे। बताया कि मगरौठ से जिगनी तक साढ़े पांच किमी सड़क खदान मार्ग है। 2017 में विशेष मरम्मत की स्वीकृति के साथ 127 लाख रुपये मंजूर हुए थे। 38 लाख रुपये लोनिवि को मिले थे। खदान का रास्ता होने से विभाग ने सड़क बनाने से इनकार कर बजट लौटा दिया था। सड़क चौड़ीकरण का प्रस्ताव भेजा गया है। इस बार सीसी रोड बनाई जाएगी।
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रास्ते में हो जाते हैं महिलाओं के प्रसव
अवधेश सिंह राजावत कहते हैं कि जर्जर सड़क होने से गांव तक एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती है। गंभीर रूप से बीमार व गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाने में भारी कठिनाई होती है। सड़क के गड्ढों के कारण रास्ते में ही प्रसव हो जाते हैं।
चार माह स्कूल नहीं जा पाते बच्चे
प्रबल प्रताप सिंह परिहार ने बताया कि गांव में जूनियर तक स्कूल है। इसके बाद बच्चों को बाहर जाना पड़ता है। रास्ता खराब होने से बारिश के मौसम में चार माह बच्चे स्कूल नहीं जा पाते हैं।
जनप्रतिनिधियों ने की गांव की उपेक्षा
मुकेश कुशवाहा ने बताया कि जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों ने हमेशा गांव की उपेक्षा की। सड़क की मुख्य मार्ग पर कभी ध्यान नहीं दिया। जबकि इस सड़क से जिगनी, बंगरा, मंगरौठ सहित छह गांव के लोग गुजरते हैं।
फोटो 21 एचएएमपी 44 पप्पू यादव
गांव के अस्पताल में नहीं आते डॉक्टर
पप्पू यादव कहते हैं नहर टूटी पड़ी है। हर साल मरम्मत होने के बावजूद टूटी रहती है। नहर की पुलिया को तोड़ने के बाद दोबारा नहीं बनाया गया। सरकारी होम्योपैथिक अस्पताल में डॉक्टर कभी कभार ही आते हैं। जूनियर हाईस्कूल का उच्चीकरण भी नहीं किया जा रहा है।
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1950 तक जिगनी रियासत थी। राजा का महल इसी गांव में था। उरई रोड से गांव को जोड़ने के लिए 1996 में सड़क बनवाई गई थी। 25 साल से सड़क की मरम्मत नहीं कराई गई है। बालू लदे ट्रक निकलने से सड़क पूरी तरह उखड़ गई है। सड़क की समस्या ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों से लेकर अधिकारियों तक बताई लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई। इससे रविवार को एक भी ग्रामीण ने विधानसभा चुनाव के लिए वोट नहीं डाला।
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लोनिवि के अधिशासी अभियंता एमएल वर्मा ने बताया कि चुनाव के पहले सड़क के गड्ढे भराए गए थे। बताया कि मगरौठ से जिगनी तक साढ़े पांच किमी सड़क खदान मार्ग है। 2017 में विशेष मरम्मत की स्वीकृति के साथ 127 लाख रुपये मंजूर हुए थे। 38 लाख रुपये लोनिवि को मिले थे। खदान का रास्ता होने से विभाग ने सड़क बनाने से इनकार कर बजट लौटा दिया था। सड़क चौड़ीकरण का प्रस्ताव भेजा गया है। इस बार सीसी रोड बनाई जाएगी।
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रास्ते में हो जाते हैं महिलाओं के प्रसव
अवधेश सिंह राजावत कहते हैं कि जर्जर सड़क होने से गांव तक एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती है। गंभीर रूप से बीमार व गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाने में भारी कठिनाई होती है। सड़क के गड्ढों के कारण रास्ते में ही प्रसव हो जाते हैं।
चार माह स्कूल नहीं जा पाते बच्चे
प्रबल प्रताप सिंह परिहार ने बताया कि गांव में जूनियर तक स्कूल है। इसके बाद बच्चों को बाहर जाना पड़ता है। रास्ता खराब होने से बारिश के मौसम में चार माह बच्चे स्कूल नहीं जा पाते हैं।
जनप्रतिनिधियों ने की गांव की उपेक्षा
मुकेश कुशवाहा ने बताया कि जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों ने हमेशा गांव की उपेक्षा की। सड़क की मुख्य मार्ग पर कभी ध्यान नहीं दिया। जबकि इस सड़क से जिगनी, बंगरा, मंगरौठ सहित छह गांव के लोग गुजरते हैं।
फोटो 21 एचएएमपी 44 पप्पू यादव
गांव के अस्पताल में नहीं आते डॉक्टर
पप्पू यादव कहते हैं नहर टूटी पड़ी है। हर साल मरम्मत होने के बावजूद टूटी रहती है। नहर की पुलिया को तोड़ने के बाद दोबारा नहीं बनाया गया। सरकारी होम्योपैथिक अस्पताल में डॉक्टर कभी कभार ही आते हैं। जूनियर हाईस्कूल का उच्चीकरण भी नहीं किया जा रहा है।