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Hamirpur News: फाइलों में दबी माध्यमिक शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार की जांच

Sat, 27 Dec 2025 12:36 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर Updated Sat, 27 Dec 2025 12:36 AM IST
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Investigation into corruption in the secondary education department buried in files.
हमीरपुर। वर्ष 2024-25 में छात्रा-छात्राओं का शैक्षिक भ्रमण कार्यक्रम भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरा रहा। बच्चों की अधिक संख्या दर्शाकर बसों के फर्जी नंबर पर बिल फाड़े गए। धांधली में जिला विद्यालय निरीक्षक व प्रधानाचार्यों पर मिली भगत के आरोप लगे। इसकी शिकायत जिलाधिकारी से की गई तो सीडीओ को जांच के आदेश दिए गए। छह माह में जांच अधिकारी तो बदल गए लेकिन जांच आदेश फाइलों में उलझे रह गए।
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जिलाधिकारी ने मामले में तत्कालीन मुख्य विकास अधिकारी चंद्रशेखर शुक्ला को जांच के आदेश दिए थे। सीडीओ ने अभिलेख मुहैया कराने के लिए डीआईओएस को पत्र भेजा। जांच अधिकारी के पत्र का डीआईओएस पर कोई असर नहीं हुआ। इसी बीच जांच अधिकारी सीडीओ सेवानिवृत्त हो गए। डीएम ने विशेष जांच टीम गठित की, इसमें जिला विकास अधिकारी राघवेंद्र सिंह को अध्यक्ष व एआरटीओ अमिताभ राय व बेसिक शिक्षा विभाग के वित्त लेखाधिकारी को सदस्य बनाया। 21 अगस्त 2025 को विशेष टीम को जांच के आदेश दिए। डीडीओ ने एक सितंबर 2025 को जिला विद्यालय निरीक्षक के लिए पत्र संख्या 721 में तीन दिवस में विद्यालयवार अभिलेख उपलब्ध कराने के लिए लिखा। जांच अधिकारी को कोई जवाब नहीं मिला। 19 सितंबर को दोबारा पत्र लिखा गया। उक्त पत्र के बाद 30 फाइलों में से सिर्फ 14 ही मुहैया कराई गईं। कमेटी अध्यक्ष ने 18 दिसंबर 2025 को एक पत्र और जिला विद्यालय निरीक्षक को भेजा गया। पत्र में अवशेष फाइलों को उपलब्ध कराने के लिए लिखा गया। आठ दिन बीतने के बाद भी फाइलों को उपलब्ध नहीं कराया गया। यही वजह है कि शिकायत को छह माह बीत गए लेकिन अभी तक जांच पत्रों की गुत्थी में ही उलझी है।
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छह जून को हुई थी शिकायत
शासन की योजना के मुताबिक माध्यमिक शिक्षा विभाग ने वर्ष 2024-25 के सत्र में छात्रा-छात्राओं को शैक्षिक भ्रमण कराया था। लेकिन हकीकत में जिला विद्यालय निरीक्षक और प्रधानाचार्यों की मिली भगत से दर्शाए गए छात्र-छात्राओं से आधे भी भ्रमण पर नहीं गए। टूर बजट सभी का बनाया गया, इसमें बसों के फर्जी नंबर पर बिल से लेकर अन्य के बिल बाउचर लगाकर भ्रष्टाचार किया गया। यूटा के जिलाध्यक्ष अरुण कुमार प्रजापति ने जिलाधिकारी घनश्याम मीना से छह जून 2025 को पूरे प्रकरण की लिखित शिकायत की गई। शिकायत में जांच को सक्षम कमेटी से कराने की मांग की गई थी। कहा गया कि इसमें अभिलेखों को दुरुस्त करने का कुचक्र भी रचा जा रहा।
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