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Hamirpur News: त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव टला तो रद्दी हो जाएंगे 31 लाख बैलेट पेपर

Sat, 21 Feb 2026 12:54 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर Updated Sat, 21 Feb 2026 12:54 AM IST
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If the three-tier Panchayat elections are postponed, 31 lakh ballot papers will become waste.
हमीरपुर। त्रिस्तरीय पंचायत निर्वाचक नामावली के वृहद पुनरीक्षण कार्यक्रम में एक बार फिर संशोधन हुआ है। अब 15 अप्रैल को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन होगा। लगातार बढ़ रही तारीखों को लेकर गांव के गलियारों में चुनाव टलने की चर्चाएं शुरू हो गई है। अगर वास्तव में ऐसा हुआ तो जिले में मंगाए गए 31 लाख 15 हजार बैलेट पेपर रद्दी हो जाएंगे।
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त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारियां राज्य निर्वाचन आयोग ने वर्ष 2025 में ही तेजी के साथ शुरू करा दी थी। उस वक्त माना जा रहा था कि चुनाव तय समय पर हो जाएंगे। मई 2026 तक गांव में नई सरकार बन जाएगी। जिले की 330 ग्राम पंचायतों में निर्वाचक नामावली का वृहद पुनरीक्षण कार्यक्रम ही पूरा नहीं हो पाया। ऐसी स्थिति में यह संभावना धरी रह गई। 18 जुलाई 2025 को निर्वाचक नामावली का वृहद पुनरीक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ था। समय पर काम न हो पाने की स्थिति में राज्य चुनाव आयोग ने पहला संशोधन 07 अक्तूबर 2025 को किया। इसके बाद 18 नवंबर 2025 को दूसरा संशोधन किया। छह जनवरी 2026 को तीसरा और 19 फरवरी को चौथा संशोधन किया है। इसी बीच अनंतिम सूची जारी हुई तो जिले में 7,34,474 मतदाता सामने आए। उक्त मतदाताओं में 2,37,548 संभावित डुप्लीकेट मतदाता निकल आए तो सत्यापन शुरू हुआ जो अभी तक पूरा नहीं हो पाया। अब अंतिम मतदाता सूची 15 अप्रैल 2026 को प्रकाशित की जाएगी। वर्ष 2021 के चुनाव की बात की जाए तो 15 अप्रैल को पहले चरण का मतदान हुआ था। दूसरी तरफ देखा जाए तो अभी तक आरक्षण पर भी काम शुरू नहीं हुआ है। ऐसे में चुनाव के जानकार मानते है कि राज्य निर्वाचन आयोग समय पर चुनाव नहीं करा पाएगा, या तो पंचायत की मौजूदा सरकार का समय बढ़ाया जाएगा या फिर प्रशासक बैठाया जाएगा। अगर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव वर्ष 2027 में हुआ तो जिले में 31 लाख 15 हजार बैलेट पेपर रद्दी की टोकरी में फेके जाएंगे। क्योंकि यह जो बैलेट पेपर है इनमें वर्ष 2026 पड़ा हुआ है। तारीख के चक्कर में यह अमान्य हो जाएंगे। हालांकि संवाद न्यूज एजेंसी ऐसी किसी संभावना की पुष्टि नहीं करता। गांव के गलियारों में चुनाव टलने की चर्चाओं ने जरूर जोर पकड़ लिया है।
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पद वार मंगाए गए बैलेट पेपर
पंचायत चुनाव के लिए 31 लाख 15 हजार बैलेट पेपर 86 बस्तों से मंगाए गए थे। इसमें जिला पंचायत सदस्य पद के लिए 9,29,700 बैलेट पेपर, क्षेत्र पंचायत सदस्य पद के लिए 8,74,700 बैलेट पेपर, प्रधान पद के लिए 9,02,100 बैलेट पेपर, ग्राम सदस्य पद के लिए 3,95,000 बैलेट पेपर निर्वाचन प्रशासन ने मंगवा लिए थे, जो चुनाव न होने की स्थिति में बेकार हो जाएंगे।
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पंचायत चुनाव टलने के संकेत से संभावित उम्मीदवार मायूस

भरुआ सुमेरपुर(हमीरपुर)। पंचायत चुनाव टलने के संकेत मिलने से तैयारियों में जुटे संभावित प्रत्याशियों में मायूसी छा गई है, जबकि मौजूदा प्रतिनिधि भीतर ही भीतर राहत महसूस कर रहे हैं। मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन 15 अप्रैल को प्रस्तावित है, वहीं अभी तक पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन न होने से समय पर चुनाव कराना कठिन प्रतीत हो रहा है।
पंचायतों का वर्तमान कार्यकाल 25 मई को समाप्त हो रहा है। शेष समय में चुनाव प्रक्रिया पूरी होना संभव नहीं दिख रहा, जिससे चुनाव टलने की संभावना प्रबल हो गई है। इससे ऐसे प्रत्याशी सबसे अधिक निराश हैं, जो पिछले छह माह से गांव-गांव संपर्क कर चुनावी तैयारियों में जुटे थे। खासकर पिछली बार उपविजेता रहे उम्मीदवारों को बड़ा झटका लगा है।

सुमेरपुर ब्लॉक में कुल 57 ग्राम पंचायतें हैं। परिसीमन यथावत रहने की स्थिति में प्रस्तावित चुनाव में भी 57 प्रधान चुने जाएंगे। ब्लॉक क्षेत्र में चार जिला पंचायत सीटें आती हैं जिसमें पौथिया, छानी, टेढ़ा और इंगोहटा है। इंगोहटा सीट में सुमेरपुर के साथ मौदहा ब्लॉक की पंचायतें भी शामिल हैं।


पिछले चुनाव में पौथिया से भारतीय जनता पार्टी, छानी से समाजवादी पार्टी तथा टेढ़ा से बहुजन समाज पार्टी को जीत मिली थी। इंगोहटा सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार ने सपा प्रत्याशी को बेहद कम अंतर से हराया था। इस बार भी इन सभी सीटों पर प्रमुख दलों की नजरें टिकी हुई थीं।

ब्लॉक प्रमुख की सीट पर पिछली बार सपा के जयनारायण सिंह यादव विजयी हुए थे, जो बाद में भाजपा में शामिल हो गए। सपा लंबे समय से इस सीट पर काबिज रही है और दोबारा जीत की रणनीति बना रही थी। चुनाव टलने की संभावना से संभावित उम्मीदवारों के चेहरे लटक गए हैं, जबकि मौजूदा प्रतिनिधि इसे तैयारी और जनसंपर्क का अतिरिक्त अवसर मान रहे हैं।
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