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अंतरा’ से जागा आत्मविश्वास
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हमीरपुर। परिवार नियोजन के अस्थायी साधनों के रूप में वर्ष 2017 में लांच त्रैमासिक गर्भनिरोधक इंजेक्शन अंतरा बहुत कम समय में महिलाओं की पहली पसंद बन गया। साल दर साल इसके लाभार्थियों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है।
कुरारा ब्लाक के एक गांव की 22 वर्षीय सुनीता बताती हैं कि अंतरा इंजेक्शन के बारे में जब पता चला तो पहले थोड़ी हिचक हुई, लेकिन जब से इसे अपनाया है तब से अनचाहे गर्भ की टेंशन नहीं रहती। वह एक बच्चे की मां हैं और दूसरा बच्चा अभी नहीं चाहती हैं। इसी तरह सुमेरपुर ब्लाक के एक गांव की लक्ष्मी देवी भी प्रत्येक तीन माह में एक बार अंतरा इंजेक्शन ले रही हैं। उन्होंने बताया कि उनके दो बच्चे हैं और अभी नसबंदी ऑपरेशन भी नहीं कराना चाहती हैं, इसलिए अंतरा को अपनाया है।
जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ.फौजिया अंजुम नोमानी ने कहा कि अंतरा इंजेक्शन के लाभार्थियों की संख्या तेजी से बढ़ी है। एक इंजेक्शन लगवाने के तीन माह तक गर्भधारण की चिंता से मुक्ति मिल जाती है। जिला महिला अस्पताल के एलएचवी (वूमेन हेल्थ विजिटर) विजय लक्ष्मी अवस्थी बताती हैं कि अस्थायी साधनों के रूप में जब से अंतरा इंजेक्शन और छाया टेबलेट लांच हुई है नसबंदी ऑपरेशन कम हुए हैं।
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कुरारा ब्लाक के एक गांव की 22 वर्षीय सुनीता बताती हैं कि अंतरा इंजेक्शन के बारे में जब पता चला तो पहले थोड़ी हिचक हुई, लेकिन जब से इसे अपनाया है तब से अनचाहे गर्भ की टेंशन नहीं रहती। वह एक बच्चे की मां हैं और दूसरा बच्चा अभी नहीं चाहती हैं। इसी तरह सुमेरपुर ब्लाक के एक गांव की लक्ष्मी देवी भी प्रत्येक तीन माह में एक बार अंतरा इंजेक्शन ले रही हैं। उन्होंने बताया कि उनके दो बच्चे हैं और अभी नसबंदी ऑपरेशन भी नहीं कराना चाहती हैं, इसलिए अंतरा को अपनाया है।
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जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ.फौजिया अंजुम नोमानी ने कहा कि अंतरा इंजेक्शन के लाभार्थियों की संख्या तेजी से बढ़ी है। एक इंजेक्शन लगवाने के तीन माह तक गर्भधारण की चिंता से मुक्ति मिल जाती है। जिला महिला अस्पताल के एलएचवी (वूमेन हेल्थ विजिटर) विजय लक्ष्मी अवस्थी बताती हैं कि अस्थायी साधनों के रूप में जब से अंतरा इंजेक्शन और छाया टेबलेट लांच हुई है नसबंदी ऑपरेशन कम हुए हैं।
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