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जिंदगी के लाले, अस्पताल के गेट पर ताले

Thu, 28 Oct 2021 12:00 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 28 Oct 2021 12:00 AM IST
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जिला महिला अस्पताल के भर्ती वार्ड के मुख्य गेट में लगा ताला। - फोटो : HAMIRPUR
हमीरपुर। जिला महिला अस्पताल के मेन गेट पर पड़े ताले डिलीवरी के लिए आने वाली गर्भवती की जिंदगी के लिए लाले डाल रहे हैं। प्रसव पीड़ा से तड़प रही गर्भवती को परिजन व एंबुलेंस कर्मी मेन गेट के बगल से तंग गली नुमा रास्ते से वार्ड तक पहुंचाते हैं। वार्ड तक दो सौ मीटर दूरी पैदल तय करने में गर्भवती की हालत खराब हो जाती है। फिर भी अस्पताल प्रबंधन मेन गेट पर ताला डालकर मनमानी कर रहा है।
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जिला महिला अस्पताल के मेन गेट पर जिम्मेदारों ने मनमानी करते हुए ताला डाल दिया है। मेन गेट बंद होने के कारण प्रसव पीड़ा से तड़प रही गर्भवती को एंबुलेंस कर्मी रोड पर ही उतार देते हैं। गेट बंद होने से अस्पताल के अंदर जाने के लिए एक मात्र रास्ता बगल से है। जो संकरा और घुमावदार है। एक बार में यहां एक ही व्यक्ति आ या जा सकता है। ऐसे में गर्भवती को सहारा देकर या गंभीर स्थिति होने पर उठाकर ले जाना बमुश्किल हो पाता है। मौदहा के चकदाहा निवासी आरती की कुछ दिन पहले अस्पताल में ही डिलीवरी हुई थी। बुुधवार को उसे डिस्चार्ज किया गया। उसकी हालत अधिक दूर तक पैदल आवाजाही करने लायक नहीं थी। इसके बाद भी उसे वार्ड से मेन गेट तक पैदल आना पड़ा।
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रोज डिलीवरी के लिए 20 केस आ रहे
जिला महिला अस्पताल में जिले के साथ जालौन, फतेहपुर और कानपुर नगर व बांदा जनपद के कुछ गांवों की गर्भवती को डिलीवरी कराने के लिए लाया जाता है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार औसतन यहां रोज 15 से 20 डिलीवरी केस आते हैं। ऐसे में मेन गेट बंद होने से इन गर्भवती को अंदर तक ले जाने में परिजन के साथ ही एंबुलेंस कर्मियों को भी परेशान होना पड़ता है।
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संकरे रास्ते से आवाजाही की मजबूरी
जिला महिला अस्पताल में डिलीवरी केस के अलावा नियमित ओपीडी भी होती है। इसमें करीब 500 महिलाएं इलाज को पहुंचती हैं। इन महिलाओं को भी गेट बंद होने के कारण गेट के बगल से संकरे रास्ते से होकर ही आवाजाही करनी पड़ती है।
वहां पर चौकीदार तैनात रहता है। ताला बंद होने की उन्हें जानकारी नहीं है। पता करेंगे, अगर ताला बंद मिला तो खुलवाया जाएगा।
- फौजिया अंजुम नोमानी, सीएमएस जिला महिला अस्पताल
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