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चिकित्सकों व स्टाफ की कमी से जूझ रहे पशु चिकित्सालय
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मौदहा (हमीरपुर)। कस्बा सहित क्षेत्र के पशु अस्पताल स्टाफ की कमी से संचालित नहीं हो पा रहे हैं। मकरांव का पशु प्रचार केंद्र भवन बनने के बाद से खोला नहीं जा सका है। खिड़की दरवाजे तक चोर निकालकर ले गए हैं।
ब्लाक क्षेत्र में दो चिकित्सालयों के साथ पांच पशु प्रसार केेंद्र हैं। इचौली गांव का पशु प्रसार केंद्र सिर्फ कागजों पर चल रहा है। इस केंद्र के पास खुद का भवन नहीं है न ही स्टाफ की तैनाती है। इसी तरह का हाल पशु प्रसार केंद्र अरतरा, मकरांव का है। मकरांव में पशु पालन विभाग ने हाईवे किनारे भवन बनवाया था, लेकिन स्टाफ की तैनाती नहीं है। भवन खंडहर में तब्दील हो चुका है। खिड़की दरवाजे चोर उखाड़कर ले गए। अरतरा का केंद्र स्टाफ के अभाव में बंद है। पशुपालक पशुओं का इलाज आज भी अनुभव के आधार पर कर रहे हैं।
मकरांव प्रधान विजय कुमार प्रजापति ने कहा भवन बनने के बाद से ताला ही नहीं खुला है। खिड़की, दरवाजे चोरी हो चुके हैं। कस्बे से 30 किमी दूर इचौली में अगर पशु प्रसार केंद्र संचालित हो जाए तो पशुपालकों को मवेशियों के इलाज में आसानी हो। इधर, क्षेत्र की 63 पंचायतों में कम से कम 50 ऐसी हैं जहां 100 से ऊपर अन्ना गायों को संरक्षित किया गया है। इसके अलावा निजी दुधारू मवेशी भी हैं। इनमें सबसे अधिक भैंसें हैं।
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क्षेत्र में दो पशु चिकित्सालय हैं। इनमें करहिया में एक तैनात है, जबकि कस्बा स्थित पशु चिकित्सालय में डॉक्टर सहित पूरा स्टाफ है। पशु प्रसार केंद्र कर्मियों की कमी के चलते सभी केंद्र संचालित नहीं हो पा रहे हैं। 17 पैरावेट कर्मी हैं, लेकिन इनको समय से मानदेय न मिलने से इनको परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है।
- डॉ.आरके सिंह, उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
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ब्लाक क्षेत्र में दो चिकित्सालयों के साथ पांच पशु प्रसार केेंद्र हैं। इचौली गांव का पशु प्रसार केंद्र सिर्फ कागजों पर चल रहा है। इस केंद्र के पास खुद का भवन नहीं है न ही स्टाफ की तैनाती है। इसी तरह का हाल पशु प्रसार केंद्र अरतरा, मकरांव का है। मकरांव में पशु पालन विभाग ने हाईवे किनारे भवन बनवाया था, लेकिन स्टाफ की तैनाती नहीं है। भवन खंडहर में तब्दील हो चुका है। खिड़की दरवाजे चोर उखाड़कर ले गए। अरतरा का केंद्र स्टाफ के अभाव में बंद है। पशुपालक पशुओं का इलाज आज भी अनुभव के आधार पर कर रहे हैं।
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मकरांव प्रधान विजय कुमार प्रजापति ने कहा भवन बनने के बाद से ताला ही नहीं खुला है। खिड़की, दरवाजे चोरी हो चुके हैं। कस्बे से 30 किमी दूर इचौली में अगर पशु प्रसार केंद्र संचालित हो जाए तो पशुपालकों को मवेशियों के इलाज में आसानी हो। इधर, क्षेत्र की 63 पंचायतों में कम से कम 50 ऐसी हैं जहां 100 से ऊपर अन्ना गायों को संरक्षित किया गया है। इसके अलावा निजी दुधारू मवेशी भी हैं। इनमें सबसे अधिक भैंसें हैं।
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क्षेत्र में दो पशु चिकित्सालय हैं। इनमें करहिया में एक तैनात है, जबकि कस्बा स्थित पशु चिकित्सालय में डॉक्टर सहित पूरा स्टाफ है। पशु प्रसार केंद्र कर्मियों की कमी के चलते सभी केंद्र संचालित नहीं हो पा रहे हैं। 17 पैरावेट कर्मी हैं, लेकिन इनको समय से मानदेय न मिलने से इनको परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है।
- डॉ.आरके सिंह, उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी