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गेहूं उत्पादन हुआ कम खरीद हुई ठप
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हमीरपुर। सरकारी गेहूं खरीद केंद्र खुले बाजार के सामने चित दिखाई दिए। लक्ष्य के सापेक्ष अभी तक महज पांच फीसदी ही गेहूं खरीद हो सकी। गेहूं खरीद के लिए केंद्रों के पास का मात्र एक दिन शेष बचा है। ऐसे में खरीद को सम्मान जनक स्थिति तक ले जाना आसान नहीं होगा।
शासन द्वारा जनपद में समर्थन मूल्य पर एक अप्रैल से 15 जून तक 50 केंद्रों में हुई गेहूं खरीद लक्ष्य का एक चौथाई आंकड़ा भी नहीं छू सका। ढाई महीने तक चली गेहूूं खरीद में मात्र अब तक 3272.40 एमटी खरीद हो सकी है। जिसमें कुल 656 किसानों ने अपना अनाज बेचा है। जबकि गतवर्ष 43 केंद्रों के माध्यम से दस हजार 700 किसानों से 51340.35 एमटी गेहूं की खरीद की गई थी। वहीं चालू वर्ष में मात्र लक्ष्य के सापेक्ष 5.27 फीसदी गेहूं खरीदा जा सका है।
किसानों की माने तो समितियों में गेहूं बेचने के लिए इंतजार करना पड़ता है। दो-तीन दिन रुकने पर ट्रैक्टर का भाड़ा, खाना पीना अलग से खर्च होता है। यह सब किसानों की जेब से जाता है। वहीं खुले बाजार में नगद पैसा मिलता है। खेत से ही अनाज बिक जाता है। समय बचता है।
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खरीद केंद्रों का मिला लक्ष्य
जिले में गेहूं खरीद के कुुल 50 केंद्रों के माध्यम से 62 हजार एमटी का लक्ष्य निर्धारित था। जिनमें खाद्य विभाग के सात केंद्रों को 12 हजार एमटी के लक्ष्य के सापेक्ष मात्र 898.35 एमटी खरीद हो सकी। इसी प्रकार पीसीएफ के 41 केंद्रों में लक्ष्य 45 हजार एमटी के सापेक्ष 2226.45 एमटी, भारतीय खाद्य निगम के दो केंद्रों में लक्ष्य पांच हजार एमटी के सापेक्ष 147.60 एमटी गेहूं खरीद हो सकी है।
33 किसानों का भुगतान अटका
देखा जाए तो जनपद में करीब सवा दो लाख किसान पंजीकृत हैं। जिसके सापेक्ष मात्र 656 किसानों ने सरकारी खरीद पर अपना गेहूं बेचा है। जिसमें 623 को 625.89 लाख का भुगतान किया गया है। जबकि अभी भी 33 किसानों का 33.49 लाख भुगतान अटका है।
-गेहूं उत्पादन कम होने से इस वर्ष लक्ष्य के सापेक्ष मात्र 5.27 फीसदी ही गेहूं की खरीद हो सकी है। कहा कि खरीद प्रतिशत बढ़ाने के लिए काफी उपाय किए गए, लेकिन 50 केंद्रों में 656 किसानों से मात्र 3272.40 एमटी गेहूं खरीदा जा सका है।
बृजेश कुमार यादव, जिला खाद्य विपणन अधिकारी
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शासन द्वारा जनपद में समर्थन मूल्य पर एक अप्रैल से 15 जून तक 50 केंद्रों में हुई गेहूं खरीद लक्ष्य का एक चौथाई आंकड़ा भी नहीं छू सका। ढाई महीने तक चली गेहूूं खरीद में मात्र अब तक 3272.40 एमटी खरीद हो सकी है। जिसमें कुल 656 किसानों ने अपना अनाज बेचा है। जबकि गतवर्ष 43 केंद्रों के माध्यम से दस हजार 700 किसानों से 51340.35 एमटी गेहूं की खरीद की गई थी। वहीं चालू वर्ष में मात्र लक्ष्य के सापेक्ष 5.27 फीसदी गेहूं खरीदा जा सका है।
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किसानों की माने तो समितियों में गेहूं बेचने के लिए इंतजार करना पड़ता है। दो-तीन दिन रुकने पर ट्रैक्टर का भाड़ा, खाना पीना अलग से खर्च होता है। यह सब किसानों की जेब से जाता है। वहीं खुले बाजार में नगद पैसा मिलता है। खेत से ही अनाज बिक जाता है। समय बचता है।
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खरीद केंद्रों का मिला लक्ष्य
जिले में गेहूं खरीद के कुुल 50 केंद्रों के माध्यम से 62 हजार एमटी का लक्ष्य निर्धारित था। जिनमें खाद्य विभाग के सात केंद्रों को 12 हजार एमटी के लक्ष्य के सापेक्ष मात्र 898.35 एमटी खरीद हो सकी। इसी प्रकार पीसीएफ के 41 केंद्रों में लक्ष्य 45 हजार एमटी के सापेक्ष 2226.45 एमटी, भारतीय खाद्य निगम के दो केंद्रों में लक्ष्य पांच हजार एमटी के सापेक्ष 147.60 एमटी गेहूं खरीद हो सकी है।
33 किसानों का भुगतान अटका
देखा जाए तो जनपद में करीब सवा दो लाख किसान पंजीकृत हैं। जिसके सापेक्ष मात्र 656 किसानों ने सरकारी खरीद पर अपना गेहूं बेचा है। जिसमें 623 को 625.89 लाख का भुगतान किया गया है। जबकि अभी भी 33 किसानों का 33.49 लाख भुगतान अटका है।
-गेहूं उत्पादन कम होने से इस वर्ष लक्ष्य के सापेक्ष मात्र 5.27 फीसदी ही गेहूं की खरीद हो सकी है। कहा कि खरीद प्रतिशत बढ़ाने के लिए काफी उपाय किए गए, लेकिन 50 केंद्रों में 656 किसानों से मात्र 3272.40 एमटी गेहूं खरीदा जा सका है।
बृजेश कुमार यादव, जिला खाद्य विपणन अधिकारी