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Hamirpur News: फसल बीमा पाने नियम कानून में उलझ जाते हैं किसान
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संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से किसानों को प्राकृतिक आपदा, ओलावृष्टि स्थिति सहित कारणों से फसल में होने वाले नुकसान की भरपाई की जाती है, लेकिन बीमा कंपनी के कड़े कायदे कानून के कारण किसानों को क्षतिपूर्ति का लाभ नहीं मिल पाता है। बीमा कंपनी को व्यक्तिगत दावे के लिए 72 घंटे में सूचना देनी होती है। तब ही लाभ मिलता है जब 50 फीसद से अधिक नुकसान हुआ हो। बीमा कंपनी के नंबरों का प्रचार प्रसार न होने से किसान समय से सूचना नहीं दे पाते हैं।
जल्ला गांव निवासी सुखदेव प्रसाद का कहना है कि केसीसी में उनका बीमा का प्रीमियम तो कट रहा है। बीते साल उन्होंने तिल की फसल बोई जिसका नुकसान हुआ था। 72 घंटे में सूचना न देने पर उन्हें बीमा का लाभ नहीं मिल पाया। किसान सूबेदार का कहना है कि उनकेे खाते से प्रीमियम तो बीमा कंपनी काट लेती है, लेकिन फसल नुकसान होने पर मुआवजा आज तक नहीं मिला है। जखेला निवासी रामबीर सिंह ने बताया कि बीते साल एक हेक्टेयर में तिल बोई थी।
बारिश में फसल सड़ गई थी। नंबर की जानकारी न होने पर बैंक में सूचना दी। उन्होंने बीमा कंपनी भेजा था। लेकिन कोई भी मुआवजा नहीं मिल सका है। उपकृषि निदेशक हरिशंकर भार्गव का कहना है कि जो किसान नियम के दायरे में आते हैं उन्हें लाभ मिलता है।
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हमीरपुर। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से किसानों को प्राकृतिक आपदा, ओलावृष्टि स्थिति सहित कारणों से फसल में होने वाले नुकसान की भरपाई की जाती है, लेकिन बीमा कंपनी के कड़े कायदे कानून के कारण किसानों को क्षतिपूर्ति का लाभ नहीं मिल पाता है। बीमा कंपनी को व्यक्तिगत दावे के लिए 72 घंटे में सूचना देनी होती है। तब ही लाभ मिलता है जब 50 फीसद से अधिक नुकसान हुआ हो। बीमा कंपनी के नंबरों का प्रचार प्रसार न होने से किसान समय से सूचना नहीं दे पाते हैं।
जल्ला गांव निवासी सुखदेव प्रसाद का कहना है कि केसीसी में उनका बीमा का प्रीमियम तो कट रहा है। बीते साल उन्होंने तिल की फसल बोई जिसका नुकसान हुआ था। 72 घंटे में सूचना न देने पर उन्हें बीमा का लाभ नहीं मिल पाया। किसान सूबेदार का कहना है कि उनकेे खाते से प्रीमियम तो बीमा कंपनी काट लेती है, लेकिन फसल नुकसान होने पर मुआवजा आज तक नहीं मिला है। जखेला निवासी रामबीर सिंह ने बताया कि बीते साल एक हेक्टेयर में तिल बोई थी।
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बारिश में फसल सड़ गई थी। नंबर की जानकारी न होने पर बैंक में सूचना दी। उन्होंने बीमा कंपनी भेजा था। लेकिन कोई भी मुआवजा नहीं मिल सका है। उपकृषि निदेशक हरिशंकर भार्गव का कहना है कि जो किसान नियम के दायरे में आते हैं उन्हें लाभ मिलता है।
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