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Hamirpur News: महंगी डीएपी बाजार से खरीदने को मजबूर किसान
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फोटो 30 एचएएमपी 32- मुस्करा की सहकारी समिति में हड़ताल के चलते लगा ताला। संवाद
मुस्करा (हमीरपुर)। सहकारी समितियों में चल रही हड़ताल के चलते डीएपी खाद की किल्लत से जूझ रहे किसानों को अब बाजार से 500 रुपये तक महंगी खाद खरीदनी पड़ रही है।निजी खाद विक्रेता किसानों की मजबूरी का फायदा उठाकर ऊंचे दाम वसूल रहे हैं, जिससे किसानों में आक्रोश व्याप्त है।
बीते 22 अक्टूबर से सहकारी समितियों के सचिव व कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। इसके चलते शुक्रवार को भी कस्बा सहकारी समिति के द्वार पर ताला लटका रहा। रबी फसल की बुवाई की तैयारी कर चुके किसान डीएपी के लिए दर-दर भटक रहे हैं। किसानों का आरोप है कि बाजार में लगभग 1350 रुपये वाली डीएपी की बोरी कस्बा के दुकानदार 1850 रुपये तक बेच रहे हैं। किसानों का आरोप है कि अधिकारी निजी विक्रेताओं पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहे।
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फोटो 30 एचएएमपी 35-भूपेंद्र राजपूत।
18 साै में खरीदी डीएपी की बोरी
कस्बा के किसान भूपेंद्र राजपूत ने बताया कि उन्होंने हाल ही में पांच बीघा भूमि में लाही की फसल बोई है। उन्हें प्राइवेट विक्रेता से 1800 रुपये में डीएपी की बोरी खरीदनी पड़ी, जो वास्तविक मूल्य से 450 रुपये अधिक है। उन्होंने कहा कि महंगी खाद न लेते तो लाही की बुवाई नहीं हो पाती।
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फोटो 30 एचएएमपी 36- अनिल तिवारी।
हड़ताल के कारण नहीं मिल रही खाद
किसान अनिल तिवारी ने कहा कि सहकारी समिति में हड़ताल के चलते बोआई के समय डीएपी खाद मिल पाना मुश्किल दिख रहा है। बाजारू विक्रेता किसानों की मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं, लेकिन किसान की सुनवाई करने वाला कोई नहीं है।
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बीते 22 अक्टूबर से सहकारी समितियों के सचिव व कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। इसके चलते शुक्रवार को भी कस्बा सहकारी समिति के द्वार पर ताला लटका रहा। रबी फसल की बुवाई की तैयारी कर चुके किसान डीएपी के लिए दर-दर भटक रहे हैं। किसानों का आरोप है कि बाजार में लगभग 1350 रुपये वाली डीएपी की बोरी कस्बा के दुकानदार 1850 रुपये तक बेच रहे हैं। किसानों का आरोप है कि अधिकारी निजी विक्रेताओं पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहे।
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फोटो 30 एचएएमपी 35-भूपेंद्र राजपूत।
18 साै में खरीदी डीएपी की बोरी
कस्बा के किसान भूपेंद्र राजपूत ने बताया कि उन्होंने हाल ही में पांच बीघा भूमि में लाही की फसल बोई है। उन्हें प्राइवेट विक्रेता से 1800 रुपये में डीएपी की बोरी खरीदनी पड़ी, जो वास्तविक मूल्य से 450 रुपये अधिक है। उन्होंने कहा कि महंगी खाद न लेते तो लाही की बुवाई नहीं हो पाती।
फोटो 30 एचएएमपी 36- अनिल तिवारी।
हड़ताल के कारण नहीं मिल रही खाद
किसान अनिल तिवारी ने कहा कि सहकारी समिति में हड़ताल के चलते बोआई के समय डीएपी खाद मिल पाना मुश्किल दिख रहा है। बाजारू विक्रेता किसानों की मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं, लेकिन किसान की सुनवाई करने वाला कोई नहीं है।

फोटो 30 एचएएमपी 32- मुस्करा की सहकारी समिति में हड़ताल के चलते लगा ताला। संवाद

फोटो 30 एचएएमपी 32- मुस्करा की सहकारी समिति में हड़ताल के चलते लगा ताला। संवाद