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Hamirpur News: महिला को पीटने व लज्जा भंग करने के आठ दोषियों को सजा
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हमीरपुर। एससी/एसटी एक्ट कोर्ट के विशेष न्यायाधीश रनवीर सिंह ने मंगलवार को 18 साल पुराने मामले में फैसला सुनाया है। दलित महिला की पिटाई, गाली-गलौज व लज्जा भंग करने के आठ आरोपियों को दोषी करार देते हुए पांच-पांच साल की सजा सुनाई है। इसमें एक दोषी की मौत हो चुकी है।
जलालपुर थाना क्षेत्र के एक गांव में 27 मार्च 2008 को विवाद का मामला सामने आया था। महिला ने पुलिस को दिए शिकायती पत्र में बताया था कि विरासत में आठ डिसमिल जमीन मिली थी जिस पर वह कच्चा मकान बनाकर बच्चों के साथ रहती है। आरोपियों ने उनके मकान के पास टॉवर लगवा लिया था और मकान खाली करने की धमकी दे रहे थे। जब मना किया तो घर बुलाकर सियाराम, शिवकुमार, रामचरन, राजू, गोपाल, गोविंद, बबलू, रम्मन व सुनील ने उसे पीटा और लज्जा भंग की।
पुलिस ने शिकायत के आधार पर 30 मार्च 2008 को नाै आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। पुलिस ने विवेचना के बाद आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया। एससी/एसटी एक्ट कोर्ट में चले ट्रायल में गवाहों, बयानों व साक्ष्यों के आधार पर विशेष न्यायाधीश रनवीर सिंह ने आठ आरोपियों को दोषी ठहराते हुए प्रत्येक को पांच-पांच वर्ष के कारावास और 16-16 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। एक आरोपी सियाराम की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो जाने से उसके विरुद्ध कार्रवाई समाप्त हो गई।
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जलालपुर थाना क्षेत्र के एक गांव में 27 मार्च 2008 को विवाद का मामला सामने आया था। महिला ने पुलिस को दिए शिकायती पत्र में बताया था कि विरासत में आठ डिसमिल जमीन मिली थी जिस पर वह कच्चा मकान बनाकर बच्चों के साथ रहती है। आरोपियों ने उनके मकान के पास टॉवर लगवा लिया था और मकान खाली करने की धमकी दे रहे थे। जब मना किया तो घर बुलाकर सियाराम, शिवकुमार, रामचरन, राजू, गोपाल, गोविंद, बबलू, रम्मन व सुनील ने उसे पीटा और लज्जा भंग की।
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पुलिस ने शिकायत के आधार पर 30 मार्च 2008 को नाै आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। पुलिस ने विवेचना के बाद आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया। एससी/एसटी एक्ट कोर्ट में चले ट्रायल में गवाहों, बयानों व साक्ष्यों के आधार पर विशेष न्यायाधीश रनवीर सिंह ने आठ आरोपियों को दोषी ठहराते हुए प्रत्येक को पांच-पांच वर्ष के कारावास और 16-16 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। एक आरोपी सियाराम की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो जाने से उसके विरुद्ध कार्रवाई समाप्त हो गई।
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