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विकास में महिलाओं की सामाजिक सहभागिता जरूरी
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हमीरपुर। महिलाओं की सामाजिक सहभागिता से ही विकास जरूरी है। यह बात सहायक प्रोफेसर डा. मनीष कुमार ने कही।
कुछेछा स्थित राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में चल रहे दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का शनिवार को समापन हो गया है। जिसमें विद्वानों ने पश्चिमी सभ्यता के प्रभाव से धूमिल होती भारतीय संस्कृति के विषय पर अपने विचार व्यक्त किए।
महिला महाविद्यालय की प्रोफ़ेसर डा. शालिनी ने भारतीय संस्कृति के मूलतत्व अनेकता में एकता, सहिष्णुता, अहिंसा, दया, समरसता आदि बिंदुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। अर्थशास्त्र के असि. प्रोफेसर डा. मनीष कुमार ने वैश्वीकरण के कारण महिलाओं के सामाजिक एवं आर्थिक समावेशन पर पड़ रहे प्रभावों से सबको अवगत कराया। कहा कि महिला और पुरुष के बीच व्याप्त हर प्रकार के विभेद में कमी आई है। पूर्व प्राचार्य डा. सत्येंद्र सिंह ने पश्चिम और पूरब के सांस्कृतिक बिंदुओं की तुलना करते हुए दोनों के समानता और विषमता पर प्रकाश डाला।
संगोष्ठी के अंत में प्राचार्य डा. वंदना कुमारी ने सभी का आभार प्रकट किया। सेमिनार को सफल बनाने में डा. देवेंद्र कुमार गिरी, डा. घनश्याम दास का सहयोग रहा। संचालन डा. आनंद कुमार ने किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के डा. जय सिंह, डा .ज्ञानेंद्र एवं अन्य प्राध्यापक सहित पूर्व पुरातन छात्र भी उपस्थित रहे।
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कुछेछा स्थित राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में चल रहे दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का शनिवार को समापन हो गया है। जिसमें विद्वानों ने पश्चिमी सभ्यता के प्रभाव से धूमिल होती भारतीय संस्कृति के विषय पर अपने विचार व्यक्त किए।
महिला महाविद्यालय की प्रोफ़ेसर डा. शालिनी ने भारतीय संस्कृति के मूलतत्व अनेकता में एकता, सहिष्णुता, अहिंसा, दया, समरसता आदि बिंदुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। अर्थशास्त्र के असि. प्रोफेसर डा. मनीष कुमार ने वैश्वीकरण के कारण महिलाओं के सामाजिक एवं आर्थिक समावेशन पर पड़ रहे प्रभावों से सबको अवगत कराया। कहा कि महिला और पुरुष के बीच व्याप्त हर प्रकार के विभेद में कमी आई है। पूर्व प्राचार्य डा. सत्येंद्र सिंह ने पश्चिम और पूरब के सांस्कृतिक बिंदुओं की तुलना करते हुए दोनों के समानता और विषमता पर प्रकाश डाला।
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संगोष्ठी के अंत में प्राचार्य डा. वंदना कुमारी ने सभी का आभार प्रकट किया। सेमिनार को सफल बनाने में डा. देवेंद्र कुमार गिरी, डा. घनश्याम दास का सहयोग रहा। संचालन डा. आनंद कुमार ने किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के डा. जय सिंह, डा .ज्ञानेंद्र एवं अन्य प्राध्यापक सहित पूर्व पुरातन छात्र भी उपस्थित रहे।
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