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जिला कारागार में निरुद्ध बंदी की इलाज के दौरान हुई मौत
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हमीरपुर। अवैध असलहा फैक्टरी चलाने के मामले में जेल में निरुद्ध बंदी की बुधवार को मौत हो गई। मृतक 15 मार्च से जेल में था। परिजनों ने पुलिस पर प्रताड़ना का आरोप लगाया है। जेल अधीक्षक ने बताया कि बंदी का जेल के अस्पताल में इलाज चल रहा था। हालत बिगड़ने पर जिला अस्पताल लाए, जहां डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। तीन डाक्टरों के पैनल ने शव का पोस्टमार्टम किया है।
राठ कोतवाली क्षेत्र के सरसई गांव निवासी मृतक के भतीजे संतोष ने बताया कि चाचा बहादुर विश्वकर्मा (45) शादी समारोह के लिए मंडप बनाने का काम करते थे। वहीं उनकी चाची सिलबट्टा टांकने का काम करती हैं। किसी ने पुलिस को गलत सूचना दी कि चाचा अवैध हथियार बनाते हैं। 12 मार्च को पुलिस ने चाचा व उनके भाई गंगादीन को पकड़ा था। पैसा देकर एक भाई को छुड़ाया था, लेकिन चाची के असमर्थता जताने पर 15 मार्च को पुलिस ने फर्जी तरीके से जेल भेजा था। चाचा को तीन दिन तक कोतवाली में बिना किसी कार्रवाई के प्रताड़ित करते रहे। मृतक अपने पीछे दो बेटे व पत्नी दयावती को रोता बिलखता छोड़ गया है।
जेल अधीक्षक एके गौतम ने बताया कि 20 मार्च को बंदी की अचानक पेशाब रुक गई थी। उसका पथरी का आपरेशन हो चुका है। जेल अस्पताल में उसका जेल चिकित्सक डा. सच्चिदानंद इलाज करते रहे। तीन दिन तक जेल अस्पताल में इलाज चलता रहा। लेकिन सुधार न होने पर बुधवार को सदर अस्पताल भेजा गया। जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया है। डा. आरटी बनर्जी, डा. अमित कुमार व डा. नरेंद्र ने शव का पोस्टमार्टम कर विसरा सुरक्षित रखा गया है
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अपर एसपी अनूप कुमार ने कहा कि अगर परिजन पुलिस पर किसी प्रकार का आरोप लगा रहे हैं तो उसकी जांच कराएंगे।
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राठ कोतवाली क्षेत्र के सरसई गांव निवासी मृतक के भतीजे संतोष ने बताया कि चाचा बहादुर विश्वकर्मा (45) शादी समारोह के लिए मंडप बनाने का काम करते थे। वहीं उनकी चाची सिलबट्टा टांकने का काम करती हैं। किसी ने पुलिस को गलत सूचना दी कि चाचा अवैध हथियार बनाते हैं। 12 मार्च को पुलिस ने चाचा व उनके भाई गंगादीन को पकड़ा था। पैसा देकर एक भाई को छुड़ाया था, लेकिन चाची के असमर्थता जताने पर 15 मार्च को पुलिस ने फर्जी तरीके से जेल भेजा था। चाचा को तीन दिन तक कोतवाली में बिना किसी कार्रवाई के प्रताड़ित करते रहे। मृतक अपने पीछे दो बेटे व पत्नी दयावती को रोता बिलखता छोड़ गया है।
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जेल अधीक्षक एके गौतम ने बताया कि 20 मार्च को बंदी की अचानक पेशाब रुक गई थी। उसका पथरी का आपरेशन हो चुका है। जेल अस्पताल में उसका जेल चिकित्सक डा. सच्चिदानंद इलाज करते रहे। तीन दिन तक जेल अस्पताल में इलाज चलता रहा। लेकिन सुधार न होने पर बुधवार को सदर अस्पताल भेजा गया। जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया है। डा. आरटी बनर्जी, डा. अमित कुमार व डा. नरेंद्र ने शव का पोस्टमार्टम कर विसरा सुरक्षित रखा गया है
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अपर एसपी अनूप कुमार ने कहा कि अगर परिजन पुलिस पर किसी प्रकार का आरोप लगा रहे हैं तो उसकी जांच कराएंगे।