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पौधे लगाकर पर्यावरण को रखें सुरक्षित
ब्यूरो, अमर उजाला/हमीरपुर
Updated Sat, 06 Jun 2015 12:36 AM IST
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विश्व पर्यावरण दिवस पर विकास संस्थान व दीवानी न्यायालय परिसर में
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संगोष्ठी हुई। जिसमें अधिक से पौधे लगाकर पर्यावरण बढ़ाने को प्रेरित किया
गया।
शुक्रवार को हमीरपुर विकास संस्थान के संयोजक मनीराम वर्मा के कार्यालय में संस्थान के प्रकाशचंद्र ओमर की अध्यक्षता में गोष्ठी हुई। जिसमें नदियों में शव व गंदे नालों क ा प्रवाह रोकने, नदियाें में मौरंग खनन पर अंकुश लगाने की मांग की गई।
महामंत्री राजेंद्रवीर सिंह चौहान ने कहा कि पेड़ों की कटाई पर अंकुश लगाया जाए। कोयला संचालित ऊर्जा उत्पादन परियोजनाओं को नियंत्रित कर सौर ऊर्जा, जल विद्युत परियोजनाओं व पवन ऊर्जा को प्रोत्साहित किया जाए। तभी पर्यावरण सुरक्षित रहेगा।
उधर, दीवानी न्यायालय परिसर में शुक्रवार की शाम जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वाधान मेें आयोजित गोष्ठी में अपर सिविल जज प्रथम/प्रभारी सिविल जज सीनियर डिवीजन अनुभव द्विवेदी ने कहा कि पर्यावरण संतुलन में वृक्षों की महती भूमिका रहती है। कहा कि भारतीय संस्कृति में वृक्षों को पुत्र के समान माना गया है।
खासतौर पर पीपल, बरगद, तुलसी के पौधे जहां भी उगते हैं। उन्हें तोड़ा नहीं जाता और न ही नष्ट किया जाता है। कहा कि पूर्वजों के लगाए वृक्षों के फलों का उपयोग उनकी तीसरी पीढ़ी करती है। लोगों को अपने जन्म दिन व पूर्वजों के नाम पर वृक्षों को यादगार के रुप में लगाने को प्रेरित किया।
शुक्रवार को हमीरपुर विकास संस्थान के संयोजक मनीराम वर्मा के कार्यालय में संस्थान के प्रकाशचंद्र ओमर की अध्यक्षता में गोष्ठी हुई। जिसमें नदियों में शव व गंदे नालों क ा प्रवाह रोकने, नदियाें में मौरंग खनन पर अंकुश लगाने की मांग की गई।
महामंत्री राजेंद्रवीर सिंह चौहान ने कहा कि पेड़ों की कटाई पर अंकुश लगाया जाए। कोयला संचालित ऊर्जा उत्पादन परियोजनाओं को नियंत्रित कर सौर ऊर्जा, जल विद्युत परियोजनाओं व पवन ऊर्जा को प्रोत्साहित किया जाए। तभी पर्यावरण सुरक्षित रहेगा।
उधर, दीवानी न्यायालय परिसर में शुक्रवार की शाम जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वाधान मेें आयोजित गोष्ठी में अपर सिविल जज प्रथम/प्रभारी सिविल जज सीनियर डिवीजन अनुभव द्विवेदी ने कहा कि पर्यावरण संतुलन में वृक्षों की महती भूमिका रहती है। कहा कि भारतीय संस्कृति में वृक्षों को पुत्र के समान माना गया है।
खासतौर पर पीपल, बरगद, तुलसी के पौधे जहां भी उगते हैं। उन्हें तोड़ा नहीं जाता और न ही नष्ट किया जाता है। कहा कि पूर्वजों के लगाए वृक्षों के फलों का उपयोग उनकी तीसरी पीढ़ी करती है। लोगों को अपने जन्म दिन व पूर्वजों के नाम पर वृक्षों को यादगार के रुप में लगाने को प्रेरित किया।