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हमीरपुर, महोबा शहर की लाइनें होंगी अंडर ग्राउंड
ब्यूरो, अमर उजाला/हमीरपुर
Updated Sat, 11 Jul 2015 12:16 AM IST
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हल्की हवा में होने वाली बिजली की ट्रिपिंग उपभोक्ताओं को रुलाने का काम
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करती है। फाल्ट को ठीक करने में कई घंटे का समय लग जाता है। इस समस्या का
हल पावर कारपोरेशन ने ढूंढ लिया है। त्वरित आर्थिक विकास योजना से शीघ्र ही
इस पर काम शुरू होगा। विद्युत लाइनों को अंडर ग्राउंड किया जाएगा। यहां तक
कि उपभोक्तों के कनेक्शनों की केबिल भी अंडर ग्राउंड हो जाएंगी। कुछ महीने
बाद सड़कों, गली मोहल्लों में सिर्फ ट्रांसफार्मर ही दिखेगा। फिलहाल इस
योजना में शहरी क्षेत्र हमीरपुर व महोबा के जिला मुख्यालय शामिल किए गए
हैं। जिसमें 25 हजार उपभोक्ता लाभान्वित होंगे।
बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित कराने की तमाम योजनाएं पावर कारपोरेशन ने संचालित की हैं, लेकिन इसके बावजूद अभी भी पोलों पर बिजली की केबिलें मकडजाल की तरह फैलीं देखी जा रही हैं।
शासन ने विद्युत बिलिंग ऑनलाइन करने के लिए पुनरीक्षित त्वरित विद्युत विकास एवं सुधार कार्यक्रम (आरएपीडीआरपी) के तहत जिले के तीन कस्बों को शामिल किया गया, वहीं जनपद महोबा मुख्यालय भी इस योजना में शामिल हुआ।
इसमें नई लाइनें, खंभे व ट्रांसफार्मर लगाकर उनमें मॉडम लगाने का कार्य किया जा रहा है। कारपोरेशन की मानें तो इस योजना के तहत हमीरपुर व महोबा जनपद मुख्यालयों में 60 फीसदी काम पूरा हो चुका है।
इस कार्य को गाजियाबाद की इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी करा रही है। देखा जाए तो विगत तीन सालों से चल रहे इस काम को अभी तक कंपनी पूरा नहीं कर सकी है। जिला मुख्यालय में कंपनी ने जहां 100केवीए के 22 ट्रांसफार्मर लगाए हैं।
वहीं पहले से लगे 90 ट्रांसफार्मरों में केबिलें बिछाने के साथ मॉडम स्थापित किए गए हैं। इस योजना का अभी 40 फीसदी काम बाकी है। इधर अधीक्षण अभियंता (साप्र) दीपक मित्तल के नए आदेश पर हमीरपुर और महोबा में इस काम रोक लगा दी गई है। इसके स्थान पर इन शहरों में भूमिगत लाइनें डाले जाने की बात कही है।
इस कार्य का सर्वे प्राइवेट लिमिटेड दिल्ली की कंपनी इरेडा ने शुरू कर दिया है। इस कार्य को त्वरित आर्थिक विकास योजना से पूरा किया जाना है। अधीक्षण अभियंता पावर कारपोरेशन राजीव कुमार ने बताया कि अंडर ग्राउंड लाइनों को बिछाने के काम का सर्वे इरेडा कंपनी ने शुरू कर दिया है।
जिसे अगस्त तक पूरा करा लिया जाएगा। दोनों जनपदों के मुख्यालयों पर यह कार्य होगा। सर्वे के बाद प्रोजेक्ट तैयार कर टेंडर प्रक्रिया होगी। फिलहाल तीन से चार माह के अंदर काम शुरू हो जाने की संभावना है।
बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित कराने की तमाम योजनाएं पावर कारपोरेशन ने संचालित की हैं, लेकिन इसके बावजूद अभी भी पोलों पर बिजली की केबिलें मकडजाल की तरह फैलीं देखी जा रही हैं।
शासन ने विद्युत बिलिंग ऑनलाइन करने के लिए पुनरीक्षित त्वरित विद्युत विकास एवं सुधार कार्यक्रम (आरएपीडीआरपी) के तहत जिले के तीन कस्बों को शामिल किया गया, वहीं जनपद महोबा मुख्यालय भी इस योजना में शामिल हुआ।
इसमें नई लाइनें, खंभे व ट्रांसफार्मर लगाकर उनमें मॉडम लगाने का कार्य किया जा रहा है। कारपोरेशन की मानें तो इस योजना के तहत हमीरपुर व महोबा जनपद मुख्यालयों में 60 फीसदी काम पूरा हो चुका है।
इस कार्य को गाजियाबाद की इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी करा रही है। देखा जाए तो विगत तीन सालों से चल रहे इस काम को अभी तक कंपनी पूरा नहीं कर सकी है। जिला मुख्यालय में कंपनी ने जहां 100केवीए के 22 ट्रांसफार्मर लगाए हैं।
वहीं पहले से लगे 90 ट्रांसफार्मरों में केबिलें बिछाने के साथ मॉडम स्थापित किए गए हैं। इस योजना का अभी 40 फीसदी काम बाकी है। इधर अधीक्षण अभियंता (साप्र) दीपक मित्तल के नए आदेश पर हमीरपुर और महोबा में इस काम रोक लगा दी गई है। इसके स्थान पर इन शहरों में भूमिगत लाइनें डाले जाने की बात कही है।
इस कार्य का सर्वे प्राइवेट लिमिटेड दिल्ली की कंपनी इरेडा ने शुरू कर दिया है। इस कार्य को त्वरित आर्थिक विकास योजना से पूरा किया जाना है। अधीक्षण अभियंता पावर कारपोरेशन राजीव कुमार ने बताया कि अंडर ग्राउंड लाइनों को बिछाने के काम का सर्वे इरेडा कंपनी ने शुरू कर दिया है।
जिसे अगस्त तक पूरा करा लिया जाएगा। दोनों जनपदों के मुख्यालयों पर यह कार्य होगा। सर्वे के बाद प्रोजेक्ट तैयार कर टेंडर प्रक्रिया होगी। फिलहाल तीन से चार माह के अंदर काम शुरू हो जाने की संभावना है।