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जांच में मिले सुराग, सुरक्षा गार्ड की गोली से हुई बदमाश की मौत
ब्यूरो/अमर उजाला, हमीरपुर
Updated Sun, 28 Dec 2014 11:07 PM IST
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मौरंग खदान के बैरियर से शनिवार सुबह एक राइफल और दो दोनाली बंदूक तथा कैश
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लूटकर भागने के साथ एक बदमाश की मौत को लेकर डीआईजी बीआर मीना घटना स्थल पर
पहुंचे। उन्होंने घटना की विस्तार से जांच कर कहा कि मंडल के दूसरे
अधिकारियों से घटना की जांच कराएंगे। फिलहाल जांच में उभरे तथ्यों में
बदमाश की मौत बैरियर के सुरक्षा गार्ड द्वारा चलाई गई गोली से होना पाया
गया है।
डीआईजी रविवार को सुबह 10 बजे घटना स्थल पर पहुंचे। वह करीब सात घंटे तक रहे। उन्होंने बैरियर पर तैनात गार्डों रामरूप, बलवान सिंह, नारायण, रामप्रकाश द्विवेदी से पूछताछ की।
कैश का काम देखने वाले उन्नाव निवासी मुनीम अनीश, रानू व राजा से भी गहनता से जानकारी ली। डीआईजी ने घटना स्थल से मिले दो खोखों के संबंध में रामरूप से करीब डेढ़ घंटे बातचीत की। तब यह बात उभर कर सामने आई
कि उसकी राइफल से नारायण सिंह ने एक फायर किया था।
इसके अलावा एक खोखा तमंचे का भी चला मिला। बैरियर के तंबू पर रजाई में लिपटी 315 बोर राइफल के मिलने पर पूछतांछ की। तो खुलासा हुआ कि एक तंबू में रामरूप और रामप्रकाश थे जबकि वहीं पर बलवान सो रहा था।
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डीआईजी को सुरक्षा गार्ड ने यह भी बताया कि वह बबलू बदमाश को पहचान गए। घटना के समय छह बदमाश थे। जांच में आया कि बदमाशों ने रामरूप, रामप्रकाश को पकड़ लिया तो बलवान खेतों की तरफ भाग निकला। बलवान ने नारायण को फोन किया कि बदमाश आ गए हैं।
रानू और नारायण दौड़कर आए और उसने रामरूप की राइफल से फायर कर दिया। डीआईजी को रानू ने यह भी बताया कि कई दिनों पहले उसके मोबाइल पर बबलू का फोन आया था। जिसमें उसने कहा था कि उसे महीने में पैसा चाहिे्ए, इस संबंध में क्या तुम्हें रामरूप ने नहीं बताया।
पूछने पर रामरुप निवासी हरेहठा ने उसकी बबलू से बात कराई थी। वहीं मुनीम अनीश ने बताया कि उस दिन खनिज की रायल्टी पर्ची एमएम-11 उसने 40 काटी थी। घटना स्थल पर डीआईजी ने मीडिया को बताया कि अभी जांच जारी है।
कहा कि मंडल के किसी अधिकारी से घटना की जांच कराएंगे। माना कि घटना को अंजाम देने में खदान में काम करने वालों की संलिप्तता से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। कहा बदमाशों की गिरफ्तारी को दबिश देने का काम तेज है।
डीआईजी के साथ पुलिस अधीक्षक वीके शेखर, सीओ सदर, महोबा के पुलिस अधिकारी सहित कई थानों की फोर्स मौजूद रही।
डीआईजी रविवार को सुबह 10 बजे घटना स्थल पर पहुंचे। वह करीब सात घंटे तक रहे। उन्होंने बैरियर पर तैनात गार्डों रामरूप, बलवान सिंह, नारायण, रामप्रकाश द्विवेदी से पूछताछ की।
कैश का काम देखने वाले उन्नाव निवासी मुनीम अनीश, रानू व राजा से भी गहनता से जानकारी ली। डीआईजी ने घटना स्थल से मिले दो खोखों के संबंध में रामरूप से करीब डेढ़ घंटे बातचीत की। तब यह बात उभर कर सामने आई
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कि उसकी राइफल से नारायण सिंह ने एक फायर किया था।
इसके अलावा एक खोखा तमंचे का भी चला मिला। बैरियर के तंबू पर रजाई में लिपटी 315 बोर राइफल के मिलने पर पूछतांछ की। तो खुलासा हुआ कि एक तंबू में रामरूप और रामप्रकाश थे जबकि वहीं पर बलवान सो रहा था।
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डीआईजी को सुरक्षा गार्ड ने यह भी बताया कि वह बबलू बदमाश को पहचान गए। घटना के समय छह बदमाश थे। जांच में आया कि बदमाशों ने रामरूप, रामप्रकाश को पकड़ लिया तो बलवान खेतों की तरफ भाग निकला। बलवान ने नारायण को फोन किया कि बदमाश आ गए हैं।
रानू और नारायण दौड़कर आए और उसने रामरूप की राइफल से फायर कर दिया। डीआईजी को रानू ने यह भी बताया कि कई दिनों पहले उसके मोबाइल पर बबलू का फोन आया था। जिसमें उसने कहा था कि उसे महीने में पैसा चाहिे्ए, इस संबंध में क्या तुम्हें रामरूप ने नहीं बताया।
पूछने पर रामरुप निवासी हरेहठा ने उसकी बबलू से बात कराई थी। वहीं मुनीम अनीश ने बताया कि उस दिन खनिज की रायल्टी पर्ची एमएम-11 उसने 40 काटी थी। घटना स्थल पर डीआईजी ने मीडिया को बताया कि अभी जांच जारी है।
कहा कि मंडल के किसी अधिकारी से घटना की जांच कराएंगे। माना कि घटना को अंजाम देने में खदान में काम करने वालों की संलिप्तता से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। कहा बदमाशों की गिरफ्तारी को दबिश देने का काम तेज है।
डीआईजी के साथ पुलिस अधीक्षक वीके शेखर, सीओ सदर, महोबा के पुलिस अधिकारी सहित कई थानों की फोर्स मौजूद रही।