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मजदूर ने फांसी लगाकर दी जान
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राठ। आर्थिक तंगी झेल रहे मजदूर ने फांसी लगा ली। वह भतीजियों की शादी में अपने बच्चों को कपडे़ नहीं दिला सका था, जिससे आहत होकर ऐसा कदम उठाया। जब तक परिजनों को जानकारी होती उसकी मौत हो चुकी थी।
कोतवाली क्षेत्र के अकौना गांव निवासी जुगल किशोर (45) ने रविवार देर रात अपने कमरे में फांसी लगा ली। फंदे पर तड़पते जुगल को देख परिजनों में हड़कंप मच गया। परिजन आननफानन में उसे लेकर सीएचसी पहुंचे, जहां डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। भाई मदनपाल ने बताया मृतक जुगल किशोर दिल्ली में रह कर मजदूरी करता था।
बताया कि 7 अप्रैल को उसकी पुत्रियां खुशबू व रोशनी की बारात आनी है। विवाह समारोह में शामिल होने के लिए वह 26 अप्रैल को अपने परिवार सहित दिल्ली से घर आया था। रविवार शाम मंडप का कार्यक्रम चल रहा था। तभी उसने कमरे में जाकर फांसी लगा ली।
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बताया कि आर्थिक स्थिति ठीक न होने से वह बच्चों के लिए विवाह में कपडे़ नहीं खरीद सका था। उसने बच्चों से सोमवार को कपडे़ दिलाने की बात कही थी। मगर पैसों की व्यवस्था न होने से आहत होकर आत्महत्या कर ली। मजदूर की मौत पर उसकी पत्नी पुष्पा, पुत्र धीरेंद्र, इंद्रजीत, विक्रम व पुत्री माया रो रोकर बेहाल हैं।
शादी वाले घर में चाचा की मौत पर मचा कोहराम
भतीजियों की शादी में बच्चों को कपडे़ न दिला पाने से था दुखी
अमर उजाला ब्यूरो
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कोतवाली क्षेत्र के अकौना गांव निवासी जुगल किशोर (45) ने रविवार देर रात अपने कमरे में फांसी लगा ली। फंदे पर तड़पते जुगल को देख परिजनों में हड़कंप मच गया। परिजन आननफानन में उसे लेकर सीएचसी पहुंचे, जहां डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। भाई मदनपाल ने बताया मृतक जुगल किशोर दिल्ली में रह कर मजदूरी करता था।
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बताया कि 7 अप्रैल को उसकी पुत्रियां खुशबू व रोशनी की बारात आनी है। विवाह समारोह में शामिल होने के लिए वह 26 अप्रैल को अपने परिवार सहित दिल्ली से घर आया था। रविवार शाम मंडप का कार्यक्रम चल रहा था। तभी उसने कमरे में जाकर फांसी लगा ली।
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बताया कि आर्थिक स्थिति ठीक न होने से वह बच्चों के लिए विवाह में कपडे़ नहीं खरीद सका था। उसने बच्चों से सोमवार को कपडे़ दिलाने की बात कही थी। मगर पैसों की व्यवस्था न होने से आहत होकर आत्महत्या कर ली। मजदूर की मौत पर उसकी पत्नी पुष्पा, पुत्र धीरेंद्र, इंद्रजीत, विक्रम व पुत्री माया रो रोकर बेहाल हैं।
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भतीजियों की शादी में बच्चों को कपडे़ न दिला पाने से था दुखी
अमर उजाला ब्यूरो