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हमीरपुरः भतीजे पर खुदकुशी के लिए उकसाने का मुकदमा
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हमीरपुर। सोमवार को मां व चार बच्चों सहित डाई पीने वाले परिवार को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। भतीजे कुलदीप पर पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने का मुकदमा दर्ज किया है। कोर्ट ने उसे जेल भेज दिया है।
सुशीला ने अस्पताल से बाहर आते ही कहा कि भतीजे को बचपन से पाल-पोसकर बड़ा किया। वही आज मेरे परिवार के लिए परेशानी का सबब बन गया है। न्याय के लिए हर दरवाजा खटखटाया, लेकिन किसी ने जब नहीं सुनी तो हार थककर आत्महत्या करने की ठानी थी। कुलदीप के पिता रामप्रताप का निधन 23 वर्ष पहले हो गया था। वहीं जेठानी की भी मौत आठ साल पहले हो गई थी। भतीजे को अपने सगे बेटे की तरह पाला और पढ़ाया-लिखाया। मकान में 1/3 का हिस्सेदार बनाया लेकिन आज उसी की नीयत खराब है। तीन मंजिला मकान की कीमत करोड़ों में है। वग उसका मकान हथियाना चाहता है।
एसपी शुभम पटेल ने बताया कि आरोपी भतीजे को कोर्ट ने जेल भेज दिया है। मकान के बटवारे को लेकर दोनों पक्षों में विवाद है। यह सिविल कोर्ट का मामला बनता है। एसडीएम रविंद्र सिंह ने बताया कि अस्पताल पहुंचकर पीड़िता के बयान लिए थे। मकान के विवाद का मामला है। दोनों पक्ष उसी मकान में रहते हैं। जिसमें आरोपी मकान में आधा हिस्सा मांग रहा है। जबकि पीड़िता का कहना है कि तीनों बेटों का बराबर हिस्सा है। कहा कि यह मामला सिविल कोर्ट के दायरे में आता है। वहीं से इनका फैसला हो सकेगा। कहा कि जो भी मदद पीड़िता की होगी वह की जा रही है।
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सुशीला ने बताया कि भतीजे व उसकी दोनों बहनों की शादी उसने की है। इसकी पावर प्लांट में नौकरी लगवाई, लेकिन नौकरी छोड़कर आ गया और मकान में बनी दुकान मांगने लगा। इस पर उसने उसे दुकान दे दी। एक हफ्ते दुकान चलाने के बाद गांव भाग गया। पिछले शुक्रवार को गांव में जोर जबरदस्ती करने पर उसे एक लाख रुपये की चेक काटकर दी।
सुशीला ने अपने घर में एक कुत्ता पाल रखा है। रविवार की रात सुशीला और उसके चारों बच्चे डाई पीकर अचेत अवस्था में पड़े रहे। सुबह होने पर घर का कोई सदस्य नहीं जागा तो कुत्ता मकान की गैलरी में दौड़-भाग कर भोंकता रहा। पड़ोसियों को शक होने पर मकान में आकर आवाज लगाने पर कोई नहीं बोला तो गेट की कुंडी काटकर अंदर दाखिल हुए थे। वहां सभी लोग बेहोश पड़े थे। सबको अस्पताल ले जाया गया, लेकिन कुत्ते पर किसी का ध्यान नहीं गया। देर शाम तक वह मकान के अंदर ही भूखा प्यासा तड़पता रहा। शाम को पुलिस आने के बाद दरवाजा खोलकर उसे बाहर निकाला गया।
सुशीला ने बताया कि दो मई को मुख्यमंत्री, डीएम, एसपी व एसडीएम से न्याय की गुहार लगाई थी। इस पर आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई। पिछले वर्ष जनवरी माह में पुलिस ने दोनों पक्षों का समझौता कराया था। इसके बाद आरोपी भतीजे के खिलाफ शांतिभंग की कार्रवाई भी गई थी, लेकिन आरोपी अपने हरकतों से बाज नहीं आ रहा है।
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सुशीला ने अस्पताल से बाहर आते ही कहा कि भतीजे को बचपन से पाल-पोसकर बड़ा किया। वही आज मेरे परिवार के लिए परेशानी का सबब बन गया है। न्याय के लिए हर दरवाजा खटखटाया, लेकिन किसी ने जब नहीं सुनी तो हार थककर आत्महत्या करने की ठानी थी। कुलदीप के पिता रामप्रताप का निधन 23 वर्ष पहले हो गया था। वहीं जेठानी की भी मौत आठ साल पहले हो गई थी। भतीजे को अपने सगे बेटे की तरह पाला और पढ़ाया-लिखाया। मकान में 1/3 का हिस्सेदार बनाया लेकिन आज उसी की नीयत खराब है। तीन मंजिला मकान की कीमत करोड़ों में है। वग उसका मकान हथियाना चाहता है।
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एसपी शुभम पटेल ने बताया कि आरोपी भतीजे को कोर्ट ने जेल भेज दिया है। मकान के बटवारे को लेकर दोनों पक्षों में विवाद है। यह सिविल कोर्ट का मामला बनता है। एसडीएम रविंद्र सिंह ने बताया कि अस्पताल पहुंचकर पीड़िता के बयान लिए थे। मकान के विवाद का मामला है। दोनों पक्ष उसी मकान में रहते हैं। जिसमें आरोपी मकान में आधा हिस्सा मांग रहा है। जबकि पीड़िता का कहना है कि तीनों बेटों का बराबर हिस्सा है। कहा कि यह मामला सिविल कोर्ट के दायरे में आता है। वहीं से इनका फैसला हो सकेगा। कहा कि जो भी मदद पीड़िता की होगी वह की जा रही है।
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सुशीला ने बताया कि भतीजे व उसकी दोनों बहनों की शादी उसने की है। इसकी पावर प्लांट में नौकरी लगवाई, लेकिन नौकरी छोड़कर आ गया और मकान में बनी दुकान मांगने लगा। इस पर उसने उसे दुकान दे दी। एक हफ्ते दुकान चलाने के बाद गांव भाग गया। पिछले शुक्रवार को गांव में जोर जबरदस्ती करने पर उसे एक लाख रुपये की चेक काटकर दी।
सुशीला ने अपने घर में एक कुत्ता पाल रखा है। रविवार की रात सुशीला और उसके चारों बच्चे डाई पीकर अचेत अवस्था में पड़े रहे। सुबह होने पर घर का कोई सदस्य नहीं जागा तो कुत्ता मकान की गैलरी में दौड़-भाग कर भोंकता रहा। पड़ोसियों को शक होने पर मकान में आकर आवाज लगाने पर कोई नहीं बोला तो गेट की कुंडी काटकर अंदर दाखिल हुए थे। वहां सभी लोग बेहोश पड़े थे। सबको अस्पताल ले जाया गया, लेकिन कुत्ते पर किसी का ध्यान नहीं गया। देर शाम तक वह मकान के अंदर ही भूखा प्यासा तड़पता रहा। शाम को पुलिस आने के बाद दरवाजा खोलकर उसे बाहर निकाला गया।
सुशीला ने बताया कि दो मई को मुख्यमंत्री, डीएम, एसपी व एसडीएम से न्याय की गुहार लगाई थी। इस पर आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई। पिछले वर्ष जनवरी माह में पुलिस ने दोनों पक्षों का समझौता कराया था। इसके बाद आरोपी भतीजे के खिलाफ शांतिभंग की कार्रवाई भी गई थी, लेकिन आरोपी अपने हरकतों से बाज नहीं आ रहा है।