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खनन घोटाला: रोक के बावजूद नौ माह चलती रहीं मौरंग खदानें
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हमीरपुर। खनन घोटाले की परत खोलने में जुटी सीबीआई टीम ने शनिवार को दो मौरंग खंड क्षेत्रों में पहुंचकर जांच शुरू की। इन खदानों का संचालन सपा के एमएलसी रमेश मिश्रा तथा बांदा के मौरंग कारोबारी कर रहे हैं।
सीबीआई की तीन सदस्यीय टीम इन दिनों अवैध मौरंग घोटाले की जांच पड़ताल में जुटी है। सीबीआई मायावती सरकार में जारी हुए मौरंग खदानों के पट्टों में लगी वन विभाग की एनओसी को भी खंगाल रही है। साथ ही फर्जी रायल्टी के जरिये जिले में चलाई गई 25 मौरंग खदानों में अवैध खनन के साक्ष्य जुटाने में सीबीआई लगी है। शनिवार को टीम मुस्करा क्षेत्र में विरमा नदी पर व सरीला क्षेत्र के बेंदा दरिया पर वर्ष 2010 में संचालित रहीं 10-10 एकड़ की खदानों पर पहुंची। वहां तमाम किसानों के बयान लिए। उस समय जिले के जिलाधिकारी जी. श्रीनिवास लू थे।
मौरंग खनन के लिए पर्यावरण संबंधी एनओसी तत्कालीन डीएफओ ललित किशोर गिरि ने जारी की थी। शिवनी में विरमा नदी पर 10 एकड़ से अधिक का मौरंग पट्टा राठ के कारोबारी के नाम था। जिसे बांदा व स्थानीय मौरंग कारोबारी संचालित करते रहे। वहीं सरीला क्षेत्र में बेंदा दरिया खदान को एमएलसी रमेश मिश्रा संचालित करते रहे। इन दोनों जगहों पर सीबीआई ने किसानों से भी पूछताछ की है। याचिकाकर्ता एवं समाजसेवी विजय द्विवेदी ने बताया कि वर्ष 2010 में सिर्फ दो मौरंग खनन के पट्टे संचालित किए गए थे। यह मौरंग पट्टे अनवरत नौ माह तक चलते रहे।
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जिसके बाद मौरंग कारोबारियों ने इन खदानों की रायल्टी के जरिये जिले में 25 अन्य स्थानों पर मौरंग खदानें चलाकर अवैध खनन किया। फर्जी रायल्टी के जरिये मौरंग कारोबारियों ने पत्योरा, पतारा सहित पूरे जिले में खनन का खेल खेला। साथ ही बेंदा दरिया व शिवनी मौरंग खदान के आसपास सैकड़ों किसानों के खेतों में भी अवैध खनन किया। मौरंग खनन करने वालों ने किसानों के खेतों में पड़ी मौरंग को बेचने के लिए अनाधिकृत रूप से एग्रीमेंट करा कर मौरंग निकाली है।
जिले में ऐसे करीब दो हजार किसान होंगे, जिनके एग्रीमेंट कराए गए हैं। उल्लेखनीय हैं कि 2 जनवरी 2019 को सीबीआई ने महिला आईएएस बी. चंद्रकला, तत्कालीन खनिज अधिकारी मुईनुद्दीन, सपा एमएलसी रमेश मिश्रा, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष संजय दीक्षित उनके पिता सत्यदेव दीक्षित, अंबिका उर्फ बबलू, खनिज विभाग के रिटायर्ड लिपिक रामआसरे व पट्टा धारक रामऔतार बाबू समेत 11 लोगों के यहां छापेमारी करने के बाद सीबीआई ने मुकदमा दर्ज किया था।
सीबीआई जांच की डर से चार मौरंग कारोबारी मरे
याचिकाकर्ता एवं समाजसेवी विजय द्विवेदी ने बताया कि खनन घोटाले की जांच सीबीआई को मिलने के कुछ अर्से बाद पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष संजय दीक्षित का मुनीम विनीत पालीवाल ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। वहीं मौरंग कारोबारी ज्वाला बाबू, रामप्रकाश सोनकर की मौत हो गई थी। इसके अलावा एक मौरंग कारोबारी के मुनीम छेदालाल निषाद की भी मौत हो गई थी। इन लोगों ने एक बार सीबीआई के समक्ष पेश होकर बयान भी दिए थे। याचिकाकर्ता ने बताया कि सीबीआई की रडार में दर्जनों मौरंग कारोबारी आ गए हैं जो भागे-भागे फिर रहे हैं।
वन विभाग की जमीन खंगालती रही टीम
राठ। वन विभाग की जमीन पर अवैध खनन की जांच करने सीबीआई की तीन सदस्यीय टीम ने सरीला क्षेत्र के बेंदा और मुस्करा ब्लाक क्षेत्र के शिवनी गांव में छानबीन की। सुबह 9 बजे पहुंची सीबीआई की टीम ने बेंदा में तीन घंटे तक पड़ताल की। बेंदा दरिया में बेतवा नदी किनारे जमीनों का निरीक्षण किया। ग्रामीणों के बयान भी दर्ज किए।
जालौन जनपद में सिमिरिया आदि क्षेत्रों में बालू खदानें संचालित रहीं हैं। वन विभाग का आरोप है कि उनकी जमीन से अवैध खनन किया गया है। जिसकी जांच करने पहुंची सीबीआई टीम ने क्षेत्र में घूम घूम कर वन विभाग के दावे की पड़ताल की। बेंदा दरिया व बेंदा डांडा के ग्रामीणों से जानकारी ली। ग्रामीणों ने बताया कि बालू से भरे ट्रकों की आवाजाही रहती थी। बताया कि हमीरपुर क्षेत्र के कच्चे पुल से होते हुए ट्रक जालौन जनपद में बालू लेने जाते थे। बेंदा के ठाकुर रामनारायण सिंह का कहना है कि उसके खेतों से होकर बालू के ट्रक निकाले गए हैं। जिससे फसलों का नुकसान हुआ है। कई बार शिकायतें करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस दौरान एसडीएम सरीला जुबेर बेग, राजस्व विभाग की टीम सहित जालौन जनपद के अधिकारी भी मौजूद रहे।
जालौन जनपद के पट्टा धारकों से पूछताछ
जालौन के सिमिरिया निवासी रामनारायण निषाद ने बताया कि उसका पट्टा खनन माफियाओं ने धोखे से हथिया लिया था। काफी प्रयास के बावजूद उसे पट्टा वापस नहीं मिला। अधिकारियों से शिकायत करना भी बेकार साबित हुआ। कहा कि उसके पट्टे पर जमकर खनन किया गया है। सिमिरिया के ही सत्यदमन सिंह ने बताया कि बालू भरे ट्रकों की धमाचौकड़ी से जनहानि भी हुई है। ट्रकों की चपेट में आकर कई दुधारू मवेशियों की भी मौत हो चुकी है।
ग्रामीणों ने जताई न्याय की उम्मीद
सीबीआई की टीम गांव में पहुंचने पर लोगों में उत्सुकता देखी गई। वहीं मामला सीबीआई के पास पहुंचने पर बेंदा गांव के शैलेंद्र कुमार कहते हैं कि खनन माफियाओं के कारण किसानों को खेतों में फसल उगाना मुश्किल रहा है। कहा कि अब मामला सीबीआई में पहुंचने पर किसानों के साथ न्याय होगा। ग्रामीणों ने खनन माफियाओं पर कड़ी कार्रवाई के साथ ही किसानों की क्षतिपूर्ति कराने की भी उम्मीद जताई है।
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सीबीआई की तीन सदस्यीय टीम इन दिनों अवैध मौरंग घोटाले की जांच पड़ताल में जुटी है। सीबीआई मायावती सरकार में जारी हुए मौरंग खदानों के पट्टों में लगी वन विभाग की एनओसी को भी खंगाल रही है। साथ ही फर्जी रायल्टी के जरिये जिले में चलाई गई 25 मौरंग खदानों में अवैध खनन के साक्ष्य जुटाने में सीबीआई लगी है। शनिवार को टीम मुस्करा क्षेत्र में विरमा नदी पर व सरीला क्षेत्र के बेंदा दरिया पर वर्ष 2010 में संचालित रहीं 10-10 एकड़ की खदानों पर पहुंची। वहां तमाम किसानों के बयान लिए। उस समय जिले के जिलाधिकारी जी. श्रीनिवास लू थे।
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मौरंग खनन के लिए पर्यावरण संबंधी एनओसी तत्कालीन डीएफओ ललित किशोर गिरि ने जारी की थी। शिवनी में विरमा नदी पर 10 एकड़ से अधिक का मौरंग पट्टा राठ के कारोबारी के नाम था। जिसे बांदा व स्थानीय मौरंग कारोबारी संचालित करते रहे। वहीं सरीला क्षेत्र में बेंदा दरिया खदान को एमएलसी रमेश मिश्रा संचालित करते रहे। इन दोनों जगहों पर सीबीआई ने किसानों से भी पूछताछ की है। याचिकाकर्ता एवं समाजसेवी विजय द्विवेदी ने बताया कि वर्ष 2010 में सिर्फ दो मौरंग खनन के पट्टे संचालित किए गए थे। यह मौरंग पट्टे अनवरत नौ माह तक चलते रहे।
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जिसके बाद मौरंग कारोबारियों ने इन खदानों की रायल्टी के जरिये जिले में 25 अन्य स्थानों पर मौरंग खदानें चलाकर अवैध खनन किया। फर्जी रायल्टी के जरिये मौरंग कारोबारियों ने पत्योरा, पतारा सहित पूरे जिले में खनन का खेल खेला। साथ ही बेंदा दरिया व शिवनी मौरंग खदान के आसपास सैकड़ों किसानों के खेतों में भी अवैध खनन किया। मौरंग खनन करने वालों ने किसानों के खेतों में पड़ी मौरंग को बेचने के लिए अनाधिकृत रूप से एग्रीमेंट करा कर मौरंग निकाली है।
जिले में ऐसे करीब दो हजार किसान होंगे, जिनके एग्रीमेंट कराए गए हैं। उल्लेखनीय हैं कि 2 जनवरी 2019 को सीबीआई ने महिला आईएएस बी. चंद्रकला, तत्कालीन खनिज अधिकारी मुईनुद्दीन, सपा एमएलसी रमेश मिश्रा, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष संजय दीक्षित उनके पिता सत्यदेव दीक्षित, अंबिका उर्फ बबलू, खनिज विभाग के रिटायर्ड लिपिक रामआसरे व पट्टा धारक रामऔतार बाबू समेत 11 लोगों के यहां छापेमारी करने के बाद सीबीआई ने मुकदमा दर्ज किया था।
सीबीआई जांच की डर से चार मौरंग कारोबारी मरे
याचिकाकर्ता एवं समाजसेवी विजय द्विवेदी ने बताया कि खनन घोटाले की जांच सीबीआई को मिलने के कुछ अर्से बाद पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष संजय दीक्षित का मुनीम विनीत पालीवाल ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। वहीं मौरंग कारोबारी ज्वाला बाबू, रामप्रकाश सोनकर की मौत हो गई थी। इसके अलावा एक मौरंग कारोबारी के मुनीम छेदालाल निषाद की भी मौत हो गई थी। इन लोगों ने एक बार सीबीआई के समक्ष पेश होकर बयान भी दिए थे। याचिकाकर्ता ने बताया कि सीबीआई की रडार में दर्जनों मौरंग कारोबारी आ गए हैं जो भागे-भागे फिर रहे हैं।
वन विभाग की जमीन खंगालती रही टीम
राठ। वन विभाग की जमीन पर अवैध खनन की जांच करने सीबीआई की तीन सदस्यीय टीम ने सरीला क्षेत्र के बेंदा और मुस्करा ब्लाक क्षेत्र के शिवनी गांव में छानबीन की। सुबह 9 बजे पहुंची सीबीआई की टीम ने बेंदा में तीन घंटे तक पड़ताल की। बेंदा दरिया में बेतवा नदी किनारे जमीनों का निरीक्षण किया। ग्रामीणों के बयान भी दर्ज किए।
जालौन जनपद में सिमिरिया आदि क्षेत्रों में बालू खदानें संचालित रहीं हैं। वन विभाग का आरोप है कि उनकी जमीन से अवैध खनन किया गया है। जिसकी जांच करने पहुंची सीबीआई टीम ने क्षेत्र में घूम घूम कर वन विभाग के दावे की पड़ताल की। बेंदा दरिया व बेंदा डांडा के ग्रामीणों से जानकारी ली। ग्रामीणों ने बताया कि बालू से भरे ट्रकों की आवाजाही रहती थी। बताया कि हमीरपुर क्षेत्र के कच्चे पुल से होते हुए ट्रक जालौन जनपद में बालू लेने जाते थे। बेंदा के ठाकुर रामनारायण सिंह का कहना है कि उसके खेतों से होकर बालू के ट्रक निकाले गए हैं। जिससे फसलों का नुकसान हुआ है। कई बार शिकायतें करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस दौरान एसडीएम सरीला जुबेर बेग, राजस्व विभाग की टीम सहित जालौन जनपद के अधिकारी भी मौजूद रहे।
जालौन जनपद के पट्टा धारकों से पूछताछ
जालौन के सिमिरिया निवासी रामनारायण निषाद ने बताया कि उसका पट्टा खनन माफियाओं ने धोखे से हथिया लिया था। काफी प्रयास के बावजूद उसे पट्टा वापस नहीं मिला। अधिकारियों से शिकायत करना भी बेकार साबित हुआ। कहा कि उसके पट्टे पर जमकर खनन किया गया है। सिमिरिया के ही सत्यदमन सिंह ने बताया कि बालू भरे ट्रकों की धमाचौकड़ी से जनहानि भी हुई है। ट्रकों की चपेट में आकर कई दुधारू मवेशियों की भी मौत हो चुकी है।
ग्रामीणों ने जताई न्याय की उम्मीद
सीबीआई की टीम गांव में पहुंचने पर लोगों में उत्सुकता देखी गई। वहीं मामला सीबीआई के पास पहुंचने पर बेंदा गांव के शैलेंद्र कुमार कहते हैं कि खनन माफियाओं के कारण किसानों को खेतों में फसल उगाना मुश्किल रहा है। कहा कि अब मामला सीबीआई में पहुंचने पर किसानों के साथ न्याय होगा। ग्रामीणों ने खनन माफियाओं पर कड़ी कार्रवाई के साथ ही किसानों की क्षतिपूर्ति कराने की भी उम्मीद जताई है।