{"_id":"c00b06fb23b74a2751bf42147037f1ba","slug":"cm-resign-demand-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग बेतुकी : राजेंद्र राणा ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग बेतुकी : राजेंद्र राणा
अमर उजाला ब्यूरो/हमीरपुर
Updated Mon, 02 Nov 2015 11:00 PM IST
विज्ञापन
आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष राजेंद्र राणा ने प्रदेश के भाजपा
विज्ञापन
नेताओं से मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को हटाए जाने की मांग को बेतुका करार
दिया।
उन्होंने कहा कि वीरभद्र सिंह प्रदेश के सर्वाधिक जनाधार वाले नेता हैं। उन्होंने छह बार के अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल में हिमाचल प्रदेश का विकास करवाया है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से इस्तीफे की मांग करने वाले भाजपा नेता जनता में हंसी का पात्र बन रहे हैं।
उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं को मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से इस्तीफा मांगने की बजाय सांप्रदायिकता फैलाने वाले भाजपा नेतृत्व से इस्तीफा मांगना चाहिए।
उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार के कार्यकाल में हिमाचल प्रदेश को कोई आर्थिक पैकेज तो मिलना दूर रहा, विभिन्न स्कीमों के तहत मिलने वाले केंद्रीय बजट में भी कटौती कर दी गई है या बजट ही नहीं दिया गया।
उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता भाजपा नेताओं से जानना चाहती है कि नरेंद्र मोदी ने हिमाचल की जनता से वोट बटोरने के लिए अपने भाषणों में जो लच्छेदार वायदे किए थे, उन वायदों को मोदी सरकार पूरा क्यों नहीं कर रही।
उन्होंने कहा कि वीरभद्र सिंह प्रदेश के सर्वाधिक जनाधार वाले नेता हैं। उन्होंने छह बार के अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल में हिमाचल प्रदेश का विकास करवाया है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से इस्तीफे की मांग करने वाले भाजपा नेता जनता में हंसी का पात्र बन रहे हैं।
उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं को मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से इस्तीफा मांगने की बजाय सांप्रदायिकता फैलाने वाले भाजपा नेतृत्व से इस्तीफा मांगना चाहिए।
उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार के कार्यकाल में हिमाचल प्रदेश को कोई आर्थिक पैकेज तो मिलना दूर रहा, विभिन्न स्कीमों के तहत मिलने वाले केंद्रीय बजट में भी कटौती कर दी गई है या बजट ही नहीं दिया गया।
उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता भाजपा नेताओं से जानना चाहती है कि नरेंद्र मोदी ने हिमाचल की जनता से वोट बटोरने के लिए अपने भाषणों में जो लच्छेदार वायदे किए थे, उन वायदों को मोदी सरकार पूरा क्यों नहीं कर रही।