{"_id":"62d6f14e660bab7c3c2192c8","slug":"civic-hamirpur-news-knp708423958","type":"story","status":"publish","title_hn":"हमीरपुरः मौसम की बेरुखी से बढ़ा सूखे का खतरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हमीरपुरः मौसम की बेरुखी से बढ़ा सूखे का खतरा
विज्ञापन
जखेला गांव में धान के खेत में बैठा गमगीन किसान मुन्ना धुरिया।
- फोटो : HAMIRPUR
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हमीरपुर। जनपद एक बार फिर सूखे की चपेट में दिख रहा है। सावन शुरू होने के बाद भी खेत-खलिहानों में धूल उड़ रही है। खेती-किसानी के काम न होने से किसान चिंतित हैं। अन्ना मवेशी व जंगली जीव-जंतु पानी की तलाश में भटक रहे हैं। 10-15 दिन और बरसात न होने पर जिला सूखा घोषित हो जाएगा। पिछले 16 वर्षों में छह बार जिला सूखे से प्रभावित रहा है।
जिले का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल चार लाख 18 हजार 870 हेक्टेयर में फैला है। इसमें कृषि योग्य क्षेत्रफल दो लाख 99 हजार 103 हेक्टेयर है। कृषिगत क्षेत्रफल के सापेक्ष खरीफ 2021 में एक लाख आठ हजार 969 हेक्टेयर आच्छादित हुआ था। कुल सिंचित क्षेत्रफल एक लाख 48 हजार 302 हेक्टेयर है। यह नहरों, राजकीय व निजी नलकूपों से सिंचित है। इसमें 10 पंप कैनाल, 210 टेलें, 517 राजकीय नलकूप व 1013 निजी नलकूप संचालित हैं। संपूर्ण क्षेत्रफल का 49 फीसदी क्षेत्रफल सिंचित है। जल संसाधनों का समुचित विकास न होने से अधिकांश कृषि मानसूनी वर्षा पर निर्भर है। (संवाद)
जिले में अधिकांशत: सामान्य से कम वर्षा होने के कारण सूखे की स्थिति बनी रहती है। पिछले 15 वर्षों के दौरान 2004-05, 2007 - 08, 2008 - 09, 2009-10, 2014-15 और 2015-16 में सूखा पड़ा था।
विज्ञापन
महमूदपुर निवासी किसान छुग्गा ने बताया कि क्षेत्र में नहरें नहीं है। पानी भी नहीं बरस रहा है। आठ बीघे खेत हैं। इनमें कहीं हरियाली नहीं है। धरती आग बरसा रही है। कुछ किसानों ने किसी तरह पलेवा कर फसलें बो दी थी, वह सूख रही हैं। किसान मुन्ना धुरिया ने बताया कि क्षेत्र के किसान भगवान भरोसे खेती करते हैं। समय रहते बरसात होने पर ज्वार, मूंग, उर्द, अरहर तैयार हो जाती है। सरकारी नलकूपों से पानी की कोई उम्मीद नहीं है। धान की फसल बिन बरसात सूख रही है।
जिले में बरसात औसतन बहुत कम हुई है। अगर 15 दिन बारिश नहीं होती है तो शासन सूखा घोषित कर देगा। शासन से आदेश मिलते ही सर्वे शुरू करा दिया जाएगा।
-रमेशचंद्र, एडीएम वित्त
विज्ञापन
जिले का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल चार लाख 18 हजार 870 हेक्टेयर में फैला है। इसमें कृषि योग्य क्षेत्रफल दो लाख 99 हजार 103 हेक्टेयर है। कृषिगत क्षेत्रफल के सापेक्ष खरीफ 2021 में एक लाख आठ हजार 969 हेक्टेयर आच्छादित हुआ था। कुल सिंचित क्षेत्रफल एक लाख 48 हजार 302 हेक्टेयर है। यह नहरों, राजकीय व निजी नलकूपों से सिंचित है। इसमें 10 पंप कैनाल, 210 टेलें, 517 राजकीय नलकूप व 1013 निजी नलकूप संचालित हैं। संपूर्ण क्षेत्रफल का 49 फीसदी क्षेत्रफल सिंचित है। जल संसाधनों का समुचित विकास न होने से अधिकांश कृषि मानसूनी वर्षा पर निर्भर है। (संवाद)
विज्ञापन
जिले में अधिकांशत: सामान्य से कम वर्षा होने के कारण सूखे की स्थिति बनी रहती है। पिछले 15 वर्षों के दौरान 2004-05, 2007 - 08, 2008 - 09, 2009-10, 2014-15 और 2015-16 में सूखा पड़ा था।
विज्ञापन
महमूदपुर निवासी किसान छुग्गा ने बताया कि क्षेत्र में नहरें नहीं है। पानी भी नहीं बरस रहा है। आठ बीघे खेत हैं। इनमें कहीं हरियाली नहीं है। धरती आग बरसा रही है। कुछ किसानों ने किसी तरह पलेवा कर फसलें बो दी थी, वह सूख रही हैं। किसान मुन्ना धुरिया ने बताया कि क्षेत्र के किसान भगवान भरोसे खेती करते हैं। समय रहते बरसात होने पर ज्वार, मूंग, उर्द, अरहर तैयार हो जाती है। सरकारी नलकूपों से पानी की कोई उम्मीद नहीं है। धान की फसल बिन बरसात सूख रही है।
जिले में बरसात औसतन बहुत कम हुई है। अगर 15 दिन बारिश नहीं होती है तो शासन सूखा घोषित कर देगा। शासन से आदेश मिलते ही सर्वे शुरू करा दिया जाएगा।
-रमेशचंद्र, एडीएम वित्त