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बिजली ने उड़ाई नींद, सुख-चैन छीना
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हमीरपुर। पिछले एक पखवाड़े से ग्रामीण क्षेत्रों में अंधाधुंध बिजली कटौती की जा रही है। दिन-रात बिजली कटौती से उमस भरी गर्मी में लोगों के पसीने छूट रहे हैं। बिजली कटौती से लोगों की दिनचर्या गड़बड़ा रही है। हालत यह है कि ग्रामीण क्षेत्र में आठ घंटे ही बिजली मिल रही है।
अप्रैल माह में मई व जून जैसी भीषण गर्मी पड़ने से लोग बेहाल हैं। कूलर, पंखा, एसी से उपभोक्ताओं को गर्मी से कुछ राहत मिलती है, लेकिन अघोषित बिजली कटौती में उपकरण रात भर बंद रहते हैं। कब बिजली आएगी कब जाएगी, पता ही नहीं रहता है। आलम यह है कि बिजली कटौती से परेशान लोग आधी रात में टहलने को मजबूर हैं। नौकरी-पेशा वाले लोग सुबह देर तक सोते रहते हैं। पिछले वर्ष फरवरी में 59.46 मिलियन यूनिट तो मार्च में 60.36 मिलियन यूनिट बिजली खपत हुई थी। इस वर्ष फरवरी माह में 47.27 मिलियन यूनिट व मार्च माह में बढ़कर 53.25 मिलियन यूनिट खपत हुई है। अभी अप्रैल माह की रिपोर्ट उपलब्ध नहीं है।
अनंता सिंह ने कहा कि शासन के निर्देश हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे बिजली आपूर्ति की जाए, लेकिन आठ घंटे ही बिजली मिल रही है। रात में कटौती से नींद उड़ जाती है। इससे दिनचर्या प्रभावित होती है। बबलू सिंह का कहना है कि बिजली जाने पर उमस व मच्छरों के प्रकोप से रात भर नींद नहीं आती है। इससे सुबह देर में नींद खुलती है। ऐसे में काम प्रभावित होते हैं। कम से कम रात की कटौती नहीं होनी चाहिए। देवगांव के मदन सिंह ने कहा कि अफसर एसी में आराम फरमा रहे हैं। जनता अंधेरे में रात गुजार रही है। पहली बार बिजली की किल्लत से जूझना पड़ रहा है।
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कोयले की कमी से बिजली उत्पादन पर बुरा असर पड़ा है। इससे पर्याप्त बिजली आपूर्ति नहीं हो पा रही है। कोयले की उपलब्धता होने पर रोस्टर के मुताबिक बिजली दी जाएगी।
-सुमित व्यास, अधिशासी अभियंता विद्युत
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अप्रैल माह में मई व जून जैसी भीषण गर्मी पड़ने से लोग बेहाल हैं। कूलर, पंखा, एसी से उपभोक्ताओं को गर्मी से कुछ राहत मिलती है, लेकिन अघोषित बिजली कटौती में उपकरण रात भर बंद रहते हैं। कब बिजली आएगी कब जाएगी, पता ही नहीं रहता है। आलम यह है कि बिजली कटौती से परेशान लोग आधी रात में टहलने को मजबूर हैं। नौकरी-पेशा वाले लोग सुबह देर तक सोते रहते हैं। पिछले वर्ष फरवरी में 59.46 मिलियन यूनिट तो मार्च में 60.36 मिलियन यूनिट बिजली खपत हुई थी। इस वर्ष फरवरी माह में 47.27 मिलियन यूनिट व मार्च माह में बढ़कर 53.25 मिलियन यूनिट खपत हुई है। अभी अप्रैल माह की रिपोर्ट उपलब्ध नहीं है।
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अनंता सिंह ने कहा कि शासन के निर्देश हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे बिजली आपूर्ति की जाए, लेकिन आठ घंटे ही बिजली मिल रही है। रात में कटौती से नींद उड़ जाती है। इससे दिनचर्या प्रभावित होती है। बबलू सिंह का कहना है कि बिजली जाने पर उमस व मच्छरों के प्रकोप से रात भर नींद नहीं आती है। इससे सुबह देर में नींद खुलती है। ऐसे में काम प्रभावित होते हैं। कम से कम रात की कटौती नहीं होनी चाहिए। देवगांव के मदन सिंह ने कहा कि अफसर एसी में आराम फरमा रहे हैं। जनता अंधेरे में रात गुजार रही है। पहली बार बिजली की किल्लत से जूझना पड़ रहा है।
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कोयले की कमी से बिजली उत्पादन पर बुरा असर पड़ा है। इससे पर्याप्त बिजली आपूर्ति नहीं हो पा रही है। कोयले की उपलब्धता होने पर रोस्टर के मुताबिक बिजली दी जाएगी।
-सुमित व्यास, अधिशासी अभियंता विद्युत