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खरीफ फसलों को बचाने की जद्दोजहद में किसान
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सिमनौड़ी गांव में अन्ना मवेशियों को हाकते किसान।
- फोटो : HAMIRPUR
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हमीरपुर। अन्ना मवेशियों से राहत को तमाम वादे हो चुके हैं, लेकिन हालात जस के तस ही हैं। रबी सीजन में 338 पशु आश्रय स्थल बनाए गए थे। इनमें करीब साढ़े 32 हजार अन्ना मवेशियों को संरक्षित करने का दावा पशुपालन विभाग कर रहा है, लेकिन मार्च आते ही ज्यादातर गोशालाएं खाली हो गईं। मवेशियों पर बीते साल साढ़े सात करोड़ रुपये खर्च किए गए। मगर अब वह भी बेमतलब साबित हो रहा है। इधर खरीफ अभियान में किसानों ने करीब 70 फीसदी क्षेत्रफल में फसलें बोईं हैं। हालात यह हैं कि बारिश के मौसम में अन्ना मवेशियों से फसल बचाने के लिए किसानों को जद्दोजहद करनी पड़ रही है। मवेशी फसलों को नुकसान पहुंचाने में जुटे हैं। मगर अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे।
बतादें रबी अभियान के दौरान पशुपालन विभाग करीब 32 हजार अन्ना मवेशियों की टैंगिंग कर चुका है। इनमें 2 हजार 875 मवेशी पशुपालकों को गोद दे दिए गए। मवेशियों के लिए ग्राम पंचायतों में 326 स्थायी पशु आश्रय व शहरों में 12 स्थानों में गोशालाएं बनाईं गईं। जिसमें सीएनडीएस की 5 व मनरेगा के 7 पशु आश्रयस्थल शामिल हैं। वहीं पशु आश्रय स्थलों में बंद 32 हजार मवेशियों के भरण पोषण के लिए गत वर्ष शासन ने साढे़ सात करोड़ खर्च किए।
फिर भी अन्ना से किसान परेशान हैं। सिमनौड़ी के ग्राम प्रधान अरुण कुमार सोनकर ने बताया रबी सीजन में करीब दो सैकड़ा मवेशी संरक्षित किए थे। सभी की टैंगिंग कराई थी। कुछ मवेशी गोद दिए गए थे। बताया गर्मियों में अस्थायी गोशाला में तेज धूप के कारण फसल कटने के बाद उन्हें छोड़ दिए थे। तब से अब तक पशुओं को संरक्षित करने का कोई आदेश नहीं मिला है।
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जल्द ही कराएंगे मुनादी
सुरौलीबुजुर्ग के ग्राम प्रधान प्रतिनिधि रामफ़ूल निषाद ने कहा कि अभी वह बाहर हैं। गांव में अन्ना मवेशियों की संख्या ठीक से ध्यान नहीं है। जल्द ही मुनादी कराकर अन्ना मवेशियों को संरक्षित कराया जाएगा।
प्रधानों के पास सारे अधिकार
ग्राम पंचायत सचिव रामसेवक ने बताया पशुओं को संरक्षित करने का कार्य प्रधानों के सुपुर्द है। गत वर्ष सभी पशु आश्रय स्थलों पर चरवाहे लगाए गए थे। सभी का भुगतान भी प्रधान ही देंगे। अभी तक किसी भी ग्राम पंचायत में पशुओं को संरक्षित नहीं किया गया है।
लॉकडाउन के समय ही जिले का चार्ज संभाला है। इधर कोविड-19 के चलते सारे कार्य ठप हैं। वह अस्वस्थ हैं। बताया जल्द ही निर्देश जारी करेंगे और मुनादी कराकर अन्ना मवेशी संरक्षित कराए जाएंगे।
-डा. एके यादव, मुख्य पशुचिकित्साधिकारी
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बतादें रबी अभियान के दौरान पशुपालन विभाग करीब 32 हजार अन्ना मवेशियों की टैंगिंग कर चुका है। इनमें 2 हजार 875 मवेशी पशुपालकों को गोद दे दिए गए। मवेशियों के लिए ग्राम पंचायतों में 326 स्थायी पशु आश्रय व शहरों में 12 स्थानों में गोशालाएं बनाईं गईं। जिसमें सीएनडीएस की 5 व मनरेगा के 7 पशु आश्रयस्थल शामिल हैं। वहीं पशु आश्रय स्थलों में बंद 32 हजार मवेशियों के भरण पोषण के लिए गत वर्ष शासन ने साढे़ सात करोड़ खर्च किए।
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फिर भी अन्ना से किसान परेशान हैं। सिमनौड़ी के ग्राम प्रधान अरुण कुमार सोनकर ने बताया रबी सीजन में करीब दो सैकड़ा मवेशी संरक्षित किए थे। सभी की टैंगिंग कराई थी। कुछ मवेशी गोद दिए गए थे। बताया गर्मियों में अस्थायी गोशाला में तेज धूप के कारण फसल कटने के बाद उन्हें छोड़ दिए थे। तब से अब तक पशुओं को संरक्षित करने का कोई आदेश नहीं मिला है।
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जल्द ही कराएंगे मुनादी
सुरौलीबुजुर्ग के ग्राम प्रधान प्रतिनिधि रामफ़ूल निषाद ने कहा कि अभी वह बाहर हैं। गांव में अन्ना मवेशियों की संख्या ठीक से ध्यान नहीं है। जल्द ही मुनादी कराकर अन्ना मवेशियों को संरक्षित कराया जाएगा।
प्रधानों के पास सारे अधिकार
ग्राम पंचायत सचिव रामसेवक ने बताया पशुओं को संरक्षित करने का कार्य प्रधानों के सुपुर्द है। गत वर्ष सभी पशु आश्रय स्थलों पर चरवाहे लगाए गए थे। सभी का भुगतान भी प्रधान ही देंगे। अभी तक किसी भी ग्राम पंचायत में पशुओं को संरक्षित नहीं किया गया है।
लॉकडाउन के समय ही जिले का चार्ज संभाला है। इधर कोविड-19 के चलते सारे कार्य ठप हैं। वह अस्वस्थ हैं। बताया जल्द ही निर्देश जारी करेंगे और मुनादी कराकर अन्ना मवेशी संरक्षित कराए जाएंगे।
-डा. एके यादव, मुख्य पशुचिकित्साधिकारी