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यमुना-बेतवा की उफान से डूबे दर्जनों मकान, कार्यालय
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हमीरपुर। यमुना और बेतवा समेत कई नदियों के उफान से दर्जनों गांव जलमग्न होने के साथ खाली हो गए हैं। शहर स्थित लघु सिंचाई विभाग भी पानी में जलमग्न हो चुका है। शहर समेत कई गांवों में बाढ़ ने भारी तबाही मची है। हजारों लोग खुले आसमान के नीचे डेरा डाले हैं। वहीं प्रशासन के राहत शिविरों में भी तीन हजार से अधिक लोग को शरण मिली है। राहत केंद्रों में बाढ़ पीड़ितों के लिए लंच पैकेज के साथ खाद्य सामग्री वितरित की जा रही है। वहीं अमिरता के ग्रामीणों ने हाईवे पर लेखपाल की मनमानी के विरोध में हंगामा किया। इससे करीब आधा घंटे तक आवागमन बाधित रहा।
चंबल और माताटीला डेम से लाखों क्यूसेक पानी छोड़े जाने से मुख्यालय समेत आसपास के दर्जनों गांवों में भारी तबाही मची है। लघु सिंचाई विभाग, सरदार पटेल बालिका इंटर कालेज, गौरादेवी डिग्री कालेज समेत तमाम स्कूल, कार्यालय और मकान बाढ़ से जलमग्न हैं। शहर के आधे से अधिक हिस्से में बाढ़ का पानी भर गया है। वहीं मेरापुर, भिलांवा, डिग्गी रमेड़ी, केसरिया का डेरा, भोला का डेरा, चंदुलीतीर, कलौलीतीर, अमरिता, पारा ओझी, ब्रह्माडेरा समेत तमाम गांवों से लोग जान बचाकर पलायन कर गए हैं।
रानी लक्ष्मीबाई तिराहे से लेकर बेतवा पुल के पार कुछेछा, राठ तिराहे तक हाईवे किनारे बाढ़ पीड़ितों ने डेरा डाल रखा है। बाढ़ से हजारों बीघे की फसलें चौपट हो गई है। सैकड़ों की तादाद में मकान भी जमींदोज हो गए हैं। बाढ़ पीड़ितों में पवन कुमार, मूलचंद्र व वृंदा ने बताया समाजसेवियों ने पूड़ी-सब्जी के पैकेट बांटे हैं। लेकिन प्रशासन स्तर से जो मदद मिलनी चाहिए अभी नहीं मिली है। मदद भी सिर्फ सरकारी राहत शिविरों में लोगों को मिल रही है। हाईवे और चौरादेवी मंदिर के आसपास खुले आसमान के नीचे बैठे बाढ़ पीड़ितों को अभी तक कोई मदद नहीं मिली है। वहीं सोमवार दोपहर से बारिश शुरू होने से खुले आसमान के नीचे डेरा डाले बाढ़ पीड़ित कुछ ज्यादा ही परेशान हैं।
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एडीएम विनय प्रकाश श्रीवास्तव ने बताया इस समय बाढ़ का पानी गांवों में भरा है। हालात सामान्य होते ही राजस्व कर्मियों से सर्वे कराकर बाढ़ पीड़ितों की सूची तैयार कराई जाएगी। क्षतिग्रस्त मकानों और फसलों के नुकसान होने की भी जांच कराकर सूची तैयार करवाई जाएगी। इसके बाद आर्थिक मदद के लिए कार्रवाई की जाएगी। बताया इस समय तीन हजार से अधिक लोग बाढ़ पीड़ित राहत शिविरों में हैं।
जिन्हें भोजन और राशन सामग्री की व्यवस्था कराई जा रही है। जिले में बाढ़ से बिगड़े हालातों को लेकर जलशक्ति मंत्री व प्रभारी मंत्री बाढ़ग्रस्त इलाकों का दौरा कर चुके हैं। सोमवार को अपर पुलिस महानिदेशक प्रयागराज, चित्रकूट धाम मंडल के कमिश्नर, आईजी भी यहां बाढ़ से प्रभावित स्थानों का निरीक्षण किया है।
1978 की बाढ़ में खतरे का निशान पार कर गया था रेलवे पुल
पत्योरा। अंग्रेजी शासन काल में कानपुर-बांदा रेलवे लाइन के मध्य बना पत्योरा रेलवे पुल अभी खतरे के निशान से डेढ़ मीटर दूर है। दोनों नदियों का संगम यहीं पर होने के कारण यहां बाढ़ का नजारा देखने दूर-दूर से लोग आते हैं। पत्योरा निवासी बुजुर्ग करन सिंह ने बताया यमुना रेलवे स्टेशन के पास यमुना नदी पर बना रेलवे पुल वर्ष 1908 में अंग्रेजी शासनकाल में बना था। रेलवे पुल एक किमी लंबा है। जो आज भी उतना ही मजबूत है, जितना पहले था। वर्ष 1978 में आई बाढ़ में खतरे का निशान पार कर गया था।
वहीं वर्ष 1983 में भी खतरे का बिंदु पार कर गया। तबसे उतीन बाढ़ नहीं आई है। लेकिन अबकी बार अच्छी बरसात हुई है। जिससे दोनों नदियां उफान पर हैं। बताया गांव के चारों तरफ पानी है। रेलवे विभाग के इंजीनियर उपेंद्र कुमार ने कहा अभी कोई खतरे की बात नहीं है। खतरे के निशान से दोनों नदियां 1.20 मीटर दूर हैं। अभी ट्रेन आदि रोकने के कोई निर्देश नहीं जारी हुए हैं। वर्ष 2019 में आई बाढ़ में मात्र डेढ़ मीटर खतरे का निशान शेष रह गया था। लेकिन अबकी बार वर्ष 2019 का रिकॉर्ड तोड़ दिया और खतरे के निशान से मात्र 1.20 मीटर शेष बचा है। (संवाद)
बाढ़ पीड़ितों ने नेशनल हाईवे पर किया हंगामा
बेतवा पुल के पार अमिरता गांव में बाढ़ से प्रभावित सैकड़ों लोगों ने सोमवार को राहत सामग्री वितरण सूची में नाम शामिल करने में लेखपाल पर भेदभाव करने का आरोप लगाकर हाईवे पर जाम लगा दिया। ग्रामीणों ने जमकर हंगामा किया। लेखपाल पर मनमानी का आरोप लगाने पर मंडलायुक्त दिनेश कुमार व आईजी के सत्यनारायण ने मौके पर पहुंचे और बाढ़ पीड़ितों की शिकायत पर कार्रवाई का आश्वासन दिया। अधिकारियों के आश्वासन के बाद बाढ़ पीड़ित हाईवे से हटे।
हजारों हेक्टेयर की फसलें बाढ़ से चौपट
उप कृषि निदेशक डा. सरस कुमार तिवारी ने बताया बाढ़ से खरीफ की फसलें चौपट हो गई हैं। प्राथमिक सूचना के अनुसार 1927 हेक्टेयर में बोई गई फसलें बर्बाद हुई हैं। बताया डीएम के निर्देश पर टीम गठित की गई है। टीम में राजस्व, बीमा कंपनी व कृषि विभाग संयुक्त रूप से बाढ़ खत्म होते ही सर्वे कर फसलों के नुकसान की सूची तैयार करेगा। खरीफ की फसलों में तिल, उड़द, मूंग व ज्वार पूरी तरह से पानी में चौपट है।
बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री बांटी
कुरारा। बाढ़ प्रभावित लोगों को सोमवार को लंच पैकेट वितरण किए गए। यमुना नदी किनारे मनकीकला, मनकीखुर्द, जमरेहीतीर, कोतुपुर पटिया, सिकरोढ़ी, बेरी, पारा आदि गांवों के राहत शिविरों में एसडीएम-प्रभारी बीडीओ रविंद्र सिंह ने लंच पैकेट बांटे। इस दौरान ग्राम सचिव शामिल रहे। टीम में एडीओ शिव नरेश राजपूत, सचिव शिवा वर्मा, सुरेश वर्मा, हरी बाबू, विनोद कुशवाहा, मनीष कौशिक, बलजीत आदि ने सहयोग किया। (संवाद)
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चंबल और माताटीला डेम से लाखों क्यूसेक पानी छोड़े जाने से मुख्यालय समेत आसपास के दर्जनों गांवों में भारी तबाही मची है। लघु सिंचाई विभाग, सरदार पटेल बालिका इंटर कालेज, गौरादेवी डिग्री कालेज समेत तमाम स्कूल, कार्यालय और मकान बाढ़ से जलमग्न हैं। शहर के आधे से अधिक हिस्से में बाढ़ का पानी भर गया है। वहीं मेरापुर, भिलांवा, डिग्गी रमेड़ी, केसरिया का डेरा, भोला का डेरा, चंदुलीतीर, कलौलीतीर, अमरिता, पारा ओझी, ब्रह्माडेरा समेत तमाम गांवों से लोग जान बचाकर पलायन कर गए हैं।
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रानी लक्ष्मीबाई तिराहे से लेकर बेतवा पुल के पार कुछेछा, राठ तिराहे तक हाईवे किनारे बाढ़ पीड़ितों ने डेरा डाल रखा है। बाढ़ से हजारों बीघे की फसलें चौपट हो गई है। सैकड़ों की तादाद में मकान भी जमींदोज हो गए हैं। बाढ़ पीड़ितों में पवन कुमार, मूलचंद्र व वृंदा ने बताया समाजसेवियों ने पूड़ी-सब्जी के पैकेट बांटे हैं। लेकिन प्रशासन स्तर से जो मदद मिलनी चाहिए अभी नहीं मिली है। मदद भी सिर्फ सरकारी राहत शिविरों में लोगों को मिल रही है। हाईवे और चौरादेवी मंदिर के आसपास खुले आसमान के नीचे बैठे बाढ़ पीड़ितों को अभी तक कोई मदद नहीं मिली है। वहीं सोमवार दोपहर से बारिश शुरू होने से खुले आसमान के नीचे डेरा डाले बाढ़ पीड़ित कुछ ज्यादा ही परेशान हैं।
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एडीएम विनय प्रकाश श्रीवास्तव ने बताया इस समय बाढ़ का पानी गांवों में भरा है। हालात सामान्य होते ही राजस्व कर्मियों से सर्वे कराकर बाढ़ पीड़ितों की सूची तैयार कराई जाएगी। क्षतिग्रस्त मकानों और फसलों के नुकसान होने की भी जांच कराकर सूची तैयार करवाई जाएगी। इसके बाद आर्थिक मदद के लिए कार्रवाई की जाएगी। बताया इस समय तीन हजार से अधिक लोग बाढ़ पीड़ित राहत शिविरों में हैं।
जिन्हें भोजन और राशन सामग्री की व्यवस्था कराई जा रही है। जिले में बाढ़ से बिगड़े हालातों को लेकर जलशक्ति मंत्री व प्रभारी मंत्री बाढ़ग्रस्त इलाकों का दौरा कर चुके हैं। सोमवार को अपर पुलिस महानिदेशक प्रयागराज, चित्रकूट धाम मंडल के कमिश्नर, आईजी भी यहां बाढ़ से प्रभावित स्थानों का निरीक्षण किया है।
1978 की बाढ़ में खतरे का निशान पार कर गया था रेलवे पुल
पत्योरा। अंग्रेजी शासन काल में कानपुर-बांदा रेलवे लाइन के मध्य बना पत्योरा रेलवे पुल अभी खतरे के निशान से डेढ़ मीटर दूर है। दोनों नदियों का संगम यहीं पर होने के कारण यहां बाढ़ का नजारा देखने दूर-दूर से लोग आते हैं। पत्योरा निवासी बुजुर्ग करन सिंह ने बताया यमुना रेलवे स्टेशन के पास यमुना नदी पर बना रेलवे पुल वर्ष 1908 में अंग्रेजी शासनकाल में बना था। रेलवे पुल एक किमी लंबा है। जो आज भी उतना ही मजबूत है, जितना पहले था। वर्ष 1978 में आई बाढ़ में खतरे का निशान पार कर गया था।
वहीं वर्ष 1983 में भी खतरे का बिंदु पार कर गया। तबसे उतीन बाढ़ नहीं आई है। लेकिन अबकी बार अच्छी बरसात हुई है। जिससे दोनों नदियां उफान पर हैं। बताया गांव के चारों तरफ पानी है। रेलवे विभाग के इंजीनियर उपेंद्र कुमार ने कहा अभी कोई खतरे की बात नहीं है। खतरे के निशान से दोनों नदियां 1.20 मीटर दूर हैं। अभी ट्रेन आदि रोकने के कोई निर्देश नहीं जारी हुए हैं। वर्ष 2019 में आई बाढ़ में मात्र डेढ़ मीटर खतरे का निशान शेष रह गया था। लेकिन अबकी बार वर्ष 2019 का रिकॉर्ड तोड़ दिया और खतरे के निशान से मात्र 1.20 मीटर शेष बचा है। (संवाद)
बाढ़ पीड़ितों ने नेशनल हाईवे पर किया हंगामा
बेतवा पुल के पार अमिरता गांव में बाढ़ से प्रभावित सैकड़ों लोगों ने सोमवार को राहत सामग्री वितरण सूची में नाम शामिल करने में लेखपाल पर भेदभाव करने का आरोप लगाकर हाईवे पर जाम लगा दिया। ग्रामीणों ने जमकर हंगामा किया। लेखपाल पर मनमानी का आरोप लगाने पर मंडलायुक्त दिनेश कुमार व आईजी के सत्यनारायण ने मौके पर पहुंचे और बाढ़ पीड़ितों की शिकायत पर कार्रवाई का आश्वासन दिया। अधिकारियों के आश्वासन के बाद बाढ़ पीड़ित हाईवे से हटे।
हजारों हेक्टेयर की फसलें बाढ़ से चौपट
उप कृषि निदेशक डा. सरस कुमार तिवारी ने बताया बाढ़ से खरीफ की फसलें चौपट हो गई हैं। प्राथमिक सूचना के अनुसार 1927 हेक्टेयर में बोई गई फसलें बर्बाद हुई हैं। बताया डीएम के निर्देश पर टीम गठित की गई है। टीम में राजस्व, बीमा कंपनी व कृषि विभाग संयुक्त रूप से बाढ़ खत्म होते ही सर्वे कर फसलों के नुकसान की सूची तैयार करेगा। खरीफ की फसलों में तिल, उड़द, मूंग व ज्वार पूरी तरह से पानी में चौपट है।
बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री बांटी
कुरारा। बाढ़ प्रभावित लोगों को सोमवार को लंच पैकेट वितरण किए गए। यमुना नदी किनारे मनकीकला, मनकीखुर्द, जमरेहीतीर, कोतुपुर पटिया, सिकरोढ़ी, बेरी, पारा आदि गांवों के राहत शिविरों में एसडीएम-प्रभारी बीडीओ रविंद्र सिंह ने लंच पैकेट बांटे। इस दौरान ग्राम सचिव शामिल रहे। टीम में एडीओ शिव नरेश राजपूत, सचिव शिवा वर्मा, सुरेश वर्मा, हरी बाबू, विनोद कुशवाहा, मनीष कौशिक, बलजीत आदि ने सहयोग किया। (संवाद)