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यमुना-बेतवा के उफनाने से दर्जनों गांव खाली
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हमीरपुर। यमुना और बेतवा समेत कई नदियां इस समय उफनाई हैं। इस कारण शहर से लेकर तटवर्ती गांवों तक तबाही का मंजर शुरू है। शहर के आधे हिस्से में दोनों नदियों की बाढ़ का पानी फैल चुका है। बड़ी संख्या में मकान भी ढह गए हैं। वहीं कई गांव और मजरे खाली हो गए हैं। हाईवे किनारे बाढ़ से बेघर हुए लोगों ने परिवार समेत डेरा डाला है। जलस्तर लगातार बढ़ने से 25 साल के रिकार्ड तोड़ने के मुहाने दोनों नदियां आ गई हैं।
हमीरपुर शहर यमुना व बेतवा नदियों के बीच बसा है। शहर और कई गांव, मजरे बाढ़ का दंश झेल रहे हैं। चंबल नदी से 22 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से यमुना नदी खतरे के निशान से तीन मीटर, वहीं माताटीला डैम से फिर 3.70 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से बेतवा नदी दो मीटर पार हैं। शहर के डिग्गी, भोला का डेरा, चूरामन का डेरा, मेरापुर, भिलांवा, चंदुलीतीर, ब्रह्मा डेरा समेत कई गांव व मजरे बाढ़ से प्रभावित हैं। भिलांवा में यमुना किनारे चैतन्य आश्रम बना है। कई करोड़ की लागत निर्माण कार्यों में खर्च भी हो गई है, लेकिन बाढ़ से इसे बचाया नहीं जा सका।
यमुना की उफान से यहां कई फीट तक पानी भर गया है। तमाम घर भी कटान से गिर गए। जबकि शहर के अंदर पुराना जमुना घाट, बेतवा घाट, गांधी नगर गौरादेवी व हाथी दरवाजा के निचले रिहायशी इलाके बाढ़ के पानी से डूब चुके हैं। केन नदी की बाढ़ की जद में मौदहा क्षेत्र के तमाम गांव आ गए हैं। वहीं नदियों की बाढ़ से हजारों बीघे की फसलें जलमग्न हो चुकी हैं। जिलाधिकारी ज्ञानेश्वर ज्ञिपाठी ने बताया बाढ़ से 13 गांव प्रभावित हुए हैं। 1327 लोग को राहत सामग्री वितरित कराई जा रही है। बाढ़ से निपटने के लिए भी नोडल अधिकारी बनाए गए हैं।
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24 घंटे से बाढ़ पीड़ितों को नहीं मिली राहत सामग्री
डिग्गी मोहल्ले में बाढ़ का पानी भर जाने से दो दर्जन परिवार रात में ही गृहस्थी समेट कर बेतवा पुल के पास हाईवे किनारे डेरा डाल लिए हैं। कमला, मालती, कालीदीन समेत तमाम पीड़ितों ने बताया बाढ़ के पानी से मकान पूरी तरह से डूबा है। अभी तक राहत सामग्री नहीं मिली है। सुबह से कुछ भी खाने को नहीं मिला है। राठ तिराहे के पास भी पीड़ित डेरा डाले हैं। उन्हें भी मदद नहीं मिली। कलौलीतीर गांव में पानी घुसने से मेवालाल, कल्लू, संगीता आदि के मकान धराशाई हो गए हैं।
रिकार्ड तोड़ने के मुहाने पर नदियां
मौदहा बांध निर्माण खंड के सहायक अभियंता ने बताया यमुना खतरे के निशान से तीन मीटर पार कर 106.810 मीटर व बेतवा नदी लाल निशान पार कर 106.340 मीटर ऊपर बह रही है। बतादें कि वर्ष 2013 में यमुना नदी का जलस्तर 106.100 मीटर व बेतवा का जलस्तर 106.080 मीटर हो गया था। जबकि 1886 में यमुना 107.110 व बेतवा 106.500 मीटर ऊपर बह रही थी।
करोड़ों के प्रोजेक्ट को लगा झटका
हमीरपुर शहर से सटे भिलांवा मोहल्ले में यमुना नदी किनारे चौतन्य आश्रम बना है। यहां कुछ साल पहले प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या आए थे। उन्होंने कटान से आश्रम को बचाने के लिए बड़ी योजना की सौगात दी थी। जलशक्ति मंत्री डा. महेंद्र सिंह ने यमुना नदी किनारे तटबंध को सुरक्षित कराने के लिए करोड़ों रुपये के प्रोजेक्ट के निर्माण कार्यों का शुभारंभ कराया था। कई करोड़ की लागत निर्माण कार्यों में खर्च भी हो गए हैं, लेकिन बाढ़ से इसे बचाया नहीं जा सका। यमुना नदी की उफान से आश्रम के अंदर कई फीट तक पानी भर गया है। वहीं तमाम घर भी कटान से गिर गए हैं।
हजारों ग्रामीण अपने गांव में कैद
शहर से जुड़े ब्रह्मा डेरा गांव में यमुना नदी की उफनाने से बाढ़ का पानी चारो और भर गया है। गांव में हजारों लोगों का बाहर जाना मुश्किल हो गया है। गांव के बाहर नावें चल रही हैं। इधर शहर के अंदर कई मोहल्लों में भी नावें चल रही हैं। बेतवा और यमुना की बाढ़ से सैकड़ों लोगों के घरों के अंदर पानी भर चुका है। गृहस्थी छोड़कर तमाम लोग जान बचाकर भागे। वहीं कई ऐसे भी इलाके हैं जहां कटान से कच्चे मकान नदी में जमींदोज हो गए हैं। नदियों की बाढ़ से हजारों बीघे की फसलें जलमग्न हो चुकी हैं।
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हमीरपुर शहर यमुना व बेतवा नदियों के बीच बसा है। शहर और कई गांव, मजरे बाढ़ का दंश झेल रहे हैं। चंबल नदी से 22 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से यमुना नदी खतरे के निशान से तीन मीटर, वहीं माताटीला डैम से फिर 3.70 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से बेतवा नदी दो मीटर पार हैं। शहर के डिग्गी, भोला का डेरा, चूरामन का डेरा, मेरापुर, भिलांवा, चंदुलीतीर, ब्रह्मा डेरा समेत कई गांव व मजरे बाढ़ से प्रभावित हैं। भिलांवा में यमुना किनारे चैतन्य आश्रम बना है। कई करोड़ की लागत निर्माण कार्यों में खर्च भी हो गई है, लेकिन बाढ़ से इसे बचाया नहीं जा सका।
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यमुना की उफान से यहां कई फीट तक पानी भर गया है। तमाम घर भी कटान से गिर गए। जबकि शहर के अंदर पुराना जमुना घाट, बेतवा घाट, गांधी नगर गौरादेवी व हाथी दरवाजा के निचले रिहायशी इलाके बाढ़ के पानी से डूब चुके हैं। केन नदी की बाढ़ की जद में मौदहा क्षेत्र के तमाम गांव आ गए हैं। वहीं नदियों की बाढ़ से हजारों बीघे की फसलें जलमग्न हो चुकी हैं। जिलाधिकारी ज्ञानेश्वर ज्ञिपाठी ने बताया बाढ़ से 13 गांव प्रभावित हुए हैं। 1327 लोग को राहत सामग्री वितरित कराई जा रही है। बाढ़ से निपटने के लिए भी नोडल अधिकारी बनाए गए हैं।
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24 घंटे से बाढ़ पीड़ितों को नहीं मिली राहत सामग्री
डिग्गी मोहल्ले में बाढ़ का पानी भर जाने से दो दर्जन परिवार रात में ही गृहस्थी समेट कर बेतवा पुल के पास हाईवे किनारे डेरा डाल लिए हैं। कमला, मालती, कालीदीन समेत तमाम पीड़ितों ने बताया बाढ़ के पानी से मकान पूरी तरह से डूबा है। अभी तक राहत सामग्री नहीं मिली है। सुबह से कुछ भी खाने को नहीं मिला है। राठ तिराहे के पास भी पीड़ित डेरा डाले हैं। उन्हें भी मदद नहीं मिली। कलौलीतीर गांव में पानी घुसने से मेवालाल, कल्लू, संगीता आदि के मकान धराशाई हो गए हैं।
रिकार्ड तोड़ने के मुहाने पर नदियां
मौदहा बांध निर्माण खंड के सहायक अभियंता ने बताया यमुना खतरे के निशान से तीन मीटर पार कर 106.810 मीटर व बेतवा नदी लाल निशान पार कर 106.340 मीटर ऊपर बह रही है। बतादें कि वर्ष 2013 में यमुना नदी का जलस्तर 106.100 मीटर व बेतवा का जलस्तर 106.080 मीटर हो गया था। जबकि 1886 में यमुना 107.110 व बेतवा 106.500 मीटर ऊपर बह रही थी।
करोड़ों के प्रोजेक्ट को लगा झटका
हमीरपुर शहर से सटे भिलांवा मोहल्ले में यमुना नदी किनारे चौतन्य आश्रम बना है। यहां कुछ साल पहले प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या आए थे। उन्होंने कटान से आश्रम को बचाने के लिए बड़ी योजना की सौगात दी थी। जलशक्ति मंत्री डा. महेंद्र सिंह ने यमुना नदी किनारे तटबंध को सुरक्षित कराने के लिए करोड़ों रुपये के प्रोजेक्ट के निर्माण कार्यों का शुभारंभ कराया था। कई करोड़ की लागत निर्माण कार्यों में खर्च भी हो गए हैं, लेकिन बाढ़ से इसे बचाया नहीं जा सका। यमुना नदी की उफान से आश्रम के अंदर कई फीट तक पानी भर गया है। वहीं तमाम घर भी कटान से गिर गए हैं।
हजारों ग्रामीण अपने गांव में कैद
शहर से जुड़े ब्रह्मा डेरा गांव में यमुना नदी की उफनाने से बाढ़ का पानी चारो और भर गया है। गांव में हजारों लोगों का बाहर जाना मुश्किल हो गया है। गांव के बाहर नावें चल रही हैं। इधर शहर के अंदर कई मोहल्लों में भी नावें चल रही हैं। बेतवा और यमुना की बाढ़ से सैकड़ों लोगों के घरों के अंदर पानी भर चुका है। गृहस्थी छोड़कर तमाम लोग जान बचाकर भागे। वहीं कई ऐसे भी इलाके हैं जहां कटान से कच्चे मकान नदी में जमींदोज हो गए हैं। नदियों की बाढ़ से हजारों बीघे की फसलें जलमग्न हो चुकी हैं।